क्षेत्र के ग्राम सथूर के निकट चन्द्रभागा लघु ङ्क्षसचाई परियोजना में नौ वर्ष बाद भी पानी का ठहराव नहीं होने से गर्मी में पानी सूख जाता है। बांध के पानी को रोकने के लिए जलसंसाधन विभाग द्वारा कई जतन किए गए, लेकिन सफलता नहीं मिली।
हिण्डोली. क्षेत्र के ग्राम सथूर के निकट चन्द्रभागा लघु सिंचाई परियोजना में नौ वर्ष बाद भी पानी का ठहराव नहीं होने से गर्मी में पानी सूख जाता है। बांध के पानी को रोकने के लिए जलसंसाधन विभाग द्वारा कई जतन किए गए, लेकिन सफलता नहीं मिली।
जानकारी के अनुसार वर्ष 2017 में बने सथूर लघु सिंचाई परियोजना का कार्य पूर्ण हो गया था। उसके बाद सथूर, बड़ौदिया व ठीकरदा के सैकड़ों किसानों की हजारों बीघा भूमि सिंचित होनी थी, लेकिन उस समय किसानों के अरमानों पर पानी फिर गया, जब पहली बार लबालब भरे बांध का पानी तीन माह बाद ही रीत गया। उसके बाद जलसंसाधन विभाग के अभियंताओं ने सथूर बांध के उपचार के प्रस्ताव तैयार कर जयपुर से भू जल संरक्षण विभाग की टीम बुलाई। उन्होंने दो वर्ष तक बांध का उपचार किया गया। सर्वे टीम ने बताया कि बांध के पेटे पर गोल पत्थर होने से पानी का ठहराव में परेशानी होती है।दो तीन साल बाद सिल्ट जमा होने पर पानी का ठहराव होगा,लेकिन 9 वर्ष बीत जाने के बाद भी बांध अपना पानी पूरा पी जाता है।
बांध की दोबारा हो ग्राउटिंग
जल संसाधन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि बांध निर्माण के दौरान जो भी खामियां रहीं हों, लेकिन बांध की दोबारा ग्राउटिंग की जानी चाहिए। उसके बाद ही बांध में पानी का ठहराव होने की संभावना है।
लिफ्ट का नहीं हो रहा है उपयोग
यहां पर करीब दो करोड़ की लागत से बांध के पानी को लिफ्ट द्वारा किसानों के खेतों तक पहुंचाना था, लेकिन उसमें भी तकनीकी खामी रखने से लिफ्ट का उपयोग नहीं हो पा रहा है। सूत्रों की माने तो यहां पर लिफ्ट बांध की नहर की ऊंचाई तक लगा दी जाए तो जनवरी माह से पहले बांध का पानी किसानों को ङ्क्षसचाई के लिए मिल सकता था।
बांध के मोरी तक डिग्गी बने
जल संसाधन विभाग के आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि बांध में फरवरी माह तक पानी रहता है, लेकिन माइक्रो लिफ्ट सिंचाई योजना के संवेदक द्वारा डिग्गी से पाइपलाइन में तकनीकी खामी रख दी है। इस कारण बांध की नहर से डिग्गी का कनेक्शन नहीं जुड़ रहा है।
बांध के उपचार के पूर्व में कई प्रयास किए गए थे।माइक्रो लिफ्ट संवेदक ने डिग्गी को बांध की मोरी से जोड़ दे, तो फरवरी माह के पहले किसानों को सिंचाई के लिए पानी मिल सकता है ।इसके लिए संवेदक को निर्देश जारी किए गए हैं।
रोहित वघेरा, अधिशासी अभियंता, जल संसाधन विभाग बूंदी।