बूंदी

Bundi : कलश यात्रा में उमड़े श्रद्धालु, घोड़ी नृत्य बना आकर्षण

अखिल भारतीय गुर्जर विकास संगठन की ओर से सोमवार को भगवान देवनारायण जयन्ती महोत्सव का आगाज कलश यात्रा से हुआ।

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Jan 20, 2026
बूंदी. देवनारायण जयंती के अवसर पर निकाली गई कलश यात्रा।

बूंदी. अखिल भारतीय गुर्जर विकास संगठन की ओर से सोमवार को भगवान देवनारायण जयन्ती महोत्सव का आगाज कलश यात्रा से हुआ। कलश यात्रा में 5100 से अधिक महिलाएं कलश लेकर शामिल हुई। डीजे की धुन पर युवा नृत्य करते हुए चल रहे थे। यह कलश यात्रा दोपहर को आजाद पार्क से शुरू हुई, जो शहर के देवली रोड़, कोटा रोड़, सब्जीमण्डी रोड़, सूर्यमल्ल चौराहा, लंकागेट रोड़ से पुरानी धानमण्डी रोड़ होते हुए सायंकाल बायपास स्थित देवनारायण मंदिर पहुंची।

कलश यात्रा में डीजे पर भगवान देवनारायण के भजनो पर महिलाएं व युवा नृत्य करते हुए चल रहे थे। सजी धजी बग्गियों में बाबा बालकदास, पीठाधीश्वर पावन कोटाला धाम कटियाली गुफा सावर व रामगोपाल भोपाजी मुख्य पुजारी दलपुरा देवधाम सवार थे। वहीं कलश यात्रा शुरू होने से पूर्व आजाद पार्क में घोड़ी नृत्य भी समाज के लोगों में आकर्षण का केन्द्र रहा। कलश यात्रा में एक खुली जीप में गुर्जर समाज के जिलाध्यक्ष महावीर चांदना दल बल के साथ जनता का अभिवादन करते हुए चल रहे थे, जिनका जगह-जगह लोगों ने स्वागत किया। गुर्जर समाज के संरक्षक गणेशलाल हूण, रणजीत गुर्जर, भरत गुर्जर, महावीर दायमा, जीतमल कोली, पिंकू गुर्जर, सुरेश गुर्जर, देवलाल चांदना कंवरपुरा, जोधराज, दीपक, हेतराम, हेमराज गुर्जर, गोविन्द उमरवाल, राजकुमार उमरवाल सहित समाज के लोग शामिल हुए।

हवन के साथ हुई पूर्णाहुति
बड़ानयागांव.
क्षेत्र के ग्राम अकलोर में सोमवार को छूरा के देवनारायण भगवान के स्थान पर वार्षिक भंडारा महोत्सव का आयोजन किया गया। रविवार को मंदिर परिसर में भजन संध्या का आयोजन किया गया, जिसमें कलाकारों ने मनमोहक भजनों की प्रस्तुतियां दी। मंदिर परिसर में पूर्णाहुति पर हवन किया गया, जिसमें क्षेत्र के 101 जोड़ों ने क्षेत्र में सुख समृद्धि की कामना को लेकर वैदिक मंत्रोच्चार के साथ हवन कुंडों में आहुतियां दी।

इस मौके पर देवनारायण भगवान की प्रतिमाओं का विशेष शृंगार कर महाआरती की गई। शाम को महाप्रसादी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में शामिल हुए साधु संतों का मंदिर समिति की ओर से सम्मान किया गया। कार्यक्रम में मंदिर समिति के अध्यक्ष रमेश पोसवाल, सचिव सुरेश, सत्यनारायण गुर्जर, हरिराम प्रजापत, तुलसीराम, दुर्गा गुर्जर, कालू गुर्जर, जगदीश, भंवरलाल प्रजापत आदि व्यवस्था बनाने में जुटे रहे।

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