शहर में स्थित राजकीय महाविद्यालय के बाहर ऐतिहासिक धाबाइयों के कुण्ड के प्रवेश द्वार पर नगरपरिषद की ओर से बनाया गया कचरा पॉइंट इन दिनों आमजन और पर्यटकों के लिए गंभीर समस्या बनता जा रहा है।
बूंदी. शहर में स्थित राजकीय कन्या महाविद्यालय के बाहर ऐतिहासिक धाबाइयों के कुण्ड के प्रवेश द्वार पर नगरपरिषद की ओर से बनाया गया कचरा पॉइंट इन दिनों आमजन और पर्यटकों के लिए गंभीर समस्या बनता जा रहा है। इस कचरा पॉइंट को हटाने की मांग स्थानीय नागरिकों और सामाजिक संगठनों द्वारा कई बार की जा चुकी है, लेकिन संबंधित विभागों की उदासीनता के चलते अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो सकी है।
धाबाइयों का कुण्ड पुरातत्व विभाग के अधीन एक महत्वपूर्ण ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहर है। यह कुण्ड न केवल स्थानीय लोगों की आस्था और पहचान से जुड़ा है, बल्कि बाहर से आने वाले पर्यटकों के लिए भी आकर्षण का केंद्र माना जाता है। इसके बावजूद कुण्ड के प्रवेश द्वार पर कचरे का ढेर लगे रहने से यहां आने वाले पर्यटक असहज महसूस करते हैं। कई पर्यटक इस स्थिति को देखकर निराश होकर लौट जाते हैं, जिससे शहर की छवि पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि जब कोई पर्यटक ऐतिहासिक स्थल देखने आता है और सबसे पहले उसे कचरे का ढेर दिखाई देता है, तो स्वाभाविक रूप से वह स्वयं को ठगा हुआ महसूस करता है। एक ओर प्रशासन पर्यटन को बढ़ावा देने की बात करता है, वहीं दूसरी ओर ऐसे स्थलों की मूलभूत साफ-सफाई और व्यवस्थाओं पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है। कुण्ड की देखरेख और सफाई की जिम्मेदारी पुरातत्व विभाग की है, लेकिन लंबे समय से यहां नियमित सफाई नहीं हो रही है।
कुण्ड में जमी गंदगी, आसपास उगी झाड़ियां और प्रवेश द्वार पर बना कचरा पॉइंट मिलकर इस ऐतिहासिक धरोहर की गरिमा को ठेस पहुंचा रहे हैं। स्थानीय नागरिकों का मानना है कि यदि समय रहते ध्यान नहीं दिया गया, तो यह धरोहर धीरे-धीरे उपेक्षा का शिकार हो जाएगी। हालांकि प्रशासनिक लापरवाही के बीच कुछ सामाजिक संगठन सकारात्मक पहल करते नजर आए हैं। गत दिनों रामेष्ट कला मंडल के युवाओं ने स्वप्रेरणा से धाबाइयों के कुण्ड की साफ-सफाई की।
युवाओं ने श्रमदान कर कुण्ड परिसर से कचरा हटाया और स्वच्छता का संदेश दिया। उनकी इस पहल की शहरवासियों ने सराहना की है। स्थानीय नागरिकों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने मांग की है कि नगरपरिषद द्वारा बनाए गए कचरा पॉइंट को तत्काल कुण्ड के प्रवेश द्वार से हटाया जाए तथा इसके लिए कोई वैकल्पिक स्थान निर्धारित किया जाए। साथ ही पुरातत्व विभाग को नियमित सफाई, रखरखाव और संरक्षण की ठोस व्यवस्था करनी चाहिए। यदि संबंधित विभाग आपसी समन्वय से कार्य करें, तो धाबाइयों का कुण्ड न केवल स्वच्छ और सुंदर बन सकता है, बल्कि शहर के पर्यटन विकास में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।