हाड़ौती अंचल की भौगोलिक संरचना में जल संसाधनों की महत्वपूर्ण भूमिका रही है और इसी परंपरा को सशक्त रूप देता है गुढ़ा बांध।
बूंदी. हाड़ौती अंचल की भौगोलिक संरचना में जल संसाधनों की महत्वपूर्ण भूमिका रही है और इसी परंपरा को सशक्त रूप देता है गुढ़ा बांध। जो बूंदी जिले का सबसे बड़ा बांध होने के साथ-साथ हिण्डोली क्षेत्र की जीवनरेखा भी है। जिला मुख्यालय से लगभग 22 किलोमीटर दूर बसोली रोड पर नारायणपुर से आगे डाटूंदा के समीप गुढ़ा बांध गांव में स्थित यह बांध प्राकृतिक सौंदर्य, सुदृढ़ संरचना और जल प्रबंधन का उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत करता है। वर्ष 1958 में पूर्ण हुआ यह बांध मेज नदी पर गुढ़ा और टहला गांव के बीच निर्मित किया गया।
भौगोलिक दृष्टि से यह क्षेत्र पहाड़ियों और जलग्रहण तंत्र से समृद्ध है, जहां वर्षा जल का प्राकृतिक संग्रह इस बांध को निरंतर पोषित करता है। विशेष बात यह है कि गुढ़ा बांध एक अर्धन डैम है, जो मिट्टी से निर्मित होने के कारण अपनी अलग पहचान रखता है और विश्व स्तर पर भी एक विशिष्ट स्थान रखता है। लगभग 3 किलोमीटर लंबी इसकी पाल इसे संरचनात्मक रूप से अत्यंत विशाल बनाती है।
45 हजार किसान हो रहे लाभान्वित
स्थानीय निवासी नरोत्तम कुमार शर्मा के अनुसार गुढ़ा बांध का निर्माण मुख्यत: किसानों को सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध कराने के उद्देश्य से किया गया था। वर्तमान में यह बांध क्षेत्र के 55 से 60 गांवों की लगभग 10 हजार 860 हेक्टेयर से अधिक भूमि को ङ्क्षसचित करता है, जिससे करीब 45 हजार किसान सीधे लाभान्वित हो रहे हैं। इसके अलावा यह बांध पेयजल आपूर्ति और भूजल स्तर को बनाए रखने में भी महत्वपूर्ण योगदान देता है। यही कारण है कि इसे क्षेत्र की ‘‘लाइफ लाइन’’ कहा जाता है।
तकनीकी दृष्टि से सशक्त संरचना
लगभग 34.50 फीट की कुल भराव क्षमता वाले इस बांध में वर्तमान में करीब 27.50 फीट जलस्तर दर्ज किया गया है। इसकी टैंक स्टोरेज क्षमता लगभग 3375 एमसीएफटी मानी जाती है। बांध में कुल 30 गेट निर्मित हैं, जिनका संचालन आधुनिक (स्काडा) प्रणाली के माध्यम से किया जाता है। जलस्तर की निगरानी के लिए सेंसर तथा सुरक्षा के लिए सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं,जिससे बांध का संचालन सुरक्षित और व्यवस्थित रूप से किया जा सके। मानसून के दौरान जल आवक बढ़ने पर प्रशासन द्वारा निर्धारित सुरक्षा प्रोटोकॉल के तहत गेटों का संचालन किया जाता है।
इतिहास एक नजर में
निर्माण वर्ष : 1958-59
स्थान : बसोली रोड, नारायणपुर से आगे डाटूंदा के पास, हिण्डोली (बूंदी)
नदी : मेज नदी (गुढ़ा व टहला गांव के बीच)
विशेषता : बूंदी जिले का सबसे बड़ा बांध
भराव क्षमता : 34.50 फीट
कुल गेट : 30 (स्काडा सिस्टम से संचालित)
सिंचित क्षेत्र : 10,860 हेक्टेयर (55-60 गांव)
पर्यटन के रूप में उभरता
प्राकृतिक सुंदरता और शांत वातावरण के कारण गुढ़ा बांध अब पर्यटन के रूप में भी तेजी से उभर रहा है। सूर्योदय और सूर्यास्त के समय यहां का दृश्य अत्यंत मनोहारी होता है। मानसून के दौरान गेटों से बहने वाली चादर और बांध के मध्य स्थित टापू और यहां बने मंगलेश्वर महादेव एवं हनुमान जी के मंदिर श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र हैं।