कितनी ही बार अकाल पड़ा, लेकिन नैनवां उपखण्ड के बाछोला ग्राम पंचायत में स्थित रियासतकालीन ग्वाला तालाब कभी नहीं सूखा। तालाब का निर्माण हुआ तब से डेढ़ सौ वर्ष में पहली बार ग्वाला तालाब खाली हो गया। प्रशासन की अनदेखी ने तालाब को सूखा दिया।
नैनवां. कितनी ही बार अकाल पड़ा, लेकिन नैनवां उपखण्ड के बाछोला ग्राम पंचायत में स्थित रियासतकालीन ग्वाला तालाब कभी नहीं सूखा। तालाब का निर्माण हुआ तब से डेढ़ सौ वर्ष में पहली बार ग्वाला तालाब खाली हो गया। प्रशासन की अनदेखी ने तालाब को सूखा दिया। नैनवां क्षेत्र में 22 अगस्त को एक ही दिन में हुई बीस इंच बरसात में तालाब के ऊपर से निकले ओवर फ्लो पानी से तालाब के टूटने के खतरे को टालने के लिए वेस्टवेयर व पक्की पाळ की मोरी से पानी की निकासी कराने के बाद बचे पानी को रोकने के लिए प्रशासन की ओर से कोई उपाय नहीं करने से गर्मी के मौसम में भी लबालब रहने वाला ग्वाला तालाब खाली हो गया। ग्वाला तालाब की पाळ की मिट्टी का कटाव हुए लगभग छह माह हो गए है, लेकिन अभी तक भी प्रशासन द्वारा तालाब की कोई सुध नहीं ली। आज भी तालाब की पाल जीर्ण-शीर्ण अवस्था में पड़ी है।
कलक्टर-एसपी आए थे देखने
ग्वाला तालाब के टूटने का खतरा देख 23 अगस्त को जिला कलक्टर, पुलिस अधीक्षक, जिला परिषद के सीईओ, उपखण्ड अधिकारी, पूर्व मंत्री प्रभुलाल सैनी भी पाळ की स्थिति देखने पहुंचे थे। तालाब की पाळ के ऊपर से निकले पानी से क्षतिग्रस्त हुई पाळ को टूटने से रोकने के लिए वेस्टवेयर को गहरा करा व मोरी से पानी की निकासी कराई गई थी। नैनवां पंचायत समिति के विकास अधिकारी व सहायक अभियंता को बरसात थमने के बाद पानी की निकासी को रोककर तालाब खाली होने से बचाने व पाळ की आवश्यक मरम्मत के लिए प्रस्ताव भेजने के निर्देश दिए थे। बरसात थमने के साथ ही प्रशासन भी तालाब की सुध लेना भूल गया और 6 माह में ही तालाब खाली हो गया।
कई बार अवगत कराने पर भी नहीं ली सुध
बाछोला ग्राम पंचायत के सरपंच रहे 71 वर्षीय उम्मेदङ्क्षसह सोलंकी ने बताया कि बाछोला, कोरमा, भीमगंज गांवों सहित अन्य मजरों के लोगों ने जनसहयोग से 150 वर्ष पहले दो पहाड़ी टीलों के 12 फीट ऊंची, दस फीट चोड़ी व सौ मीटर लंबी पक्की पाळ बनाकर तालाब का निर्माण कराया था। तीस वर्ष पहले तालाब में पानी की भराव क्षमता बढ़ाने के लिए तालाब की पाळ को पांच फीट ऊंचा बढाकर पक्की पाळ का निर्माण कराकर पक्की पाळ की दीवार के सहारे मिट्टी की पाळ का भी निर्माण कराया था। बाछोला पंचायत के लोगों का आरोप है कि कई बार अवगत कराने के बाद भी प्रशासन द्वारा सुध नही लेने से डेढ़ सौ वर्ष में पहली बार अकाल में भी नहीं सूखने वाला तालाब खाली हुआ है। तालाब की मरम्मत नहीं हो पाई तो मानसून की बरसात में तालाब के टूटने का खतरा हो जाएगा।
तीन बार लिखे पत्र
नैनवां पंचायत समिति के सहायक अभियंता चंपालाल ने बताया कि ग्वाला तालाब की पाळ की मरम्मत व पानी की निकासी को रोकने के उपाय के लिए बजट की आवश्यकता थी, जिसके लिए 6 माह में तीन बार जिला कलक्टर, सीईओ व राज्य सरकार को पत्र भेजकर पाळ की मार्गदर्शन मांग चुके है, लेकिन प्रशासन और सरकार की ओर से किसी भी प्रकार का मार्गदर्शन नहीं मिला। मार्गदर्शन मिल जाता तो तालाब की पाळ की मरम्मत के लिए भी बजट मिल जाता।
अब मौका देखेंगे
नैनवां पंचायत समिति के विकास अधिकारी नरेन्द्रङ्क्षसह झाला का कहना है कि तालाब की स्थिति का मौका देखने के बाद उच्चाधिकारियों को स्थिति से अवगत कराया जाएगा।