जिले के सर्किट हाउस में करीब तीन दशक से शेर की खाल पॉलिथीन में बंद कर पड़ी हुई है, कई बार अवगत कराने के बाद भी जिला प्रशासन सहित रामगढ़ विषधारी टाइगर रिजर्व क्षेत्र के अधिकारी इसका निस्तारण नहीं कर रहे है।
शेर की खाल को आखिर कब मिलेगा ‘मोक्ष’
बूंदी. जिले के सर्किट हाउस में करीब तीन दशक से शेर की खाल पॉलिथीन में बंद कर पड़ी हुई है, कई बार अवगत कराने के बाद भी जिला प्रशासन सहित रामगढ़ विषधारी टाइगर रिजर्व क्षेत्र के अधिकारी इसका निस्तारण नहीं कर रहे है। हालाकि यह खाल कब की है तथा इसका शिकार किसने किया इसके बारे पुष्ट रूप से जानकारी किसी के पास नहीं है।
जानकारी अनुसार स्टेट टाइम में बने बूंदी के सर्किट हाउस में शेर की खाल में मसाला भर कर ट्रॉफी बना कर रखी हुई थी। वर्ष 1985 तक यह ट्रॉफी सर्किट हाउस में गेट के पास रखी हुई थी। इस दौरान राज्य सरकार के निर्देश पर इस वहां से हटा कर पॉलिथीन में लपेट कर स्टोर में रख दिया गया। बीते दशकों में इसकी देखरेख नहीं होने से दीमक लग गई। ऐसे में खाल में कई जगह सुराख होने से कट चुकी है। ट्रॉफी में भरा हुआ मसाला भी बाहर निकल चुका है। अब हालत यह है कि सामान्य रूप से देखने पर पता ही नहीं चलता है कि यह शेर की खाल है।
कई बार करवाया अवगत
बीते तीन दशक में सर्किट में रहे प्रबंधकों ने कई बार जिला प्रशासन एवं सबंधित विभाग के अधिकारियों को स्टोर में रखी शेर की खाल के बारे में कई बार अवगत कराया, लेकिन किसी ने सुध नहीं ली। ऐसे में गत रामगढ़ विषधारी अभयारण्य टाइगर रिजर्व क्षेत्र को लेकर सर्किट हाउस प्रबंधक ने वनपाल की मौजूदगी में उसका यथास्थिति पंचनामा भी करवाया है।पंचनामा रिपोर्ट में भी शेर की खाल जीर्ण शीर्ण होकर कट जाने की पुष्टि की गई है।
जीर्ण शीर्ण हो चुकी शेर की खाल के बारे में रामगढ़ विषधारी अभयारण्य टाइगर रिजर्व सहित अन्य अधिकारियों को अवगत करा रखा है। खाल का निस्तारण किया जाना आवश्यक है।
श्रवण सैनी, प्रबंधक, सर्किट हाउस, बूंदी
सर्किट हाउस के स्टोर में शेर की खाल होने की जानकारी है। इसके निस्तारण के लिए विभाग के उच्चाधिकारियों से कमेटी बनाई जाने का अनुरोध किया जा चुका है। पूर्व में इसका पंचनामा करवाया जा चुका है।
संजीव शर्मा, उप वन संरक्षण, रामगढ, विषधारी अभयारण्य टाइगर रिजर्व क्षेत्र