राजकीय आयुर्वेदिक अस्पताल सुवासा का भवन पूरी तरह जर्जर हो गया है। भवन की एक पट्टी टूट चुकी है। जिसे लकड़ी का सहारा लगा कर रोका हुआ है।
टूटी पट्टी को लकड़ी का दे रहे सहारा, जर्जर हो रहा आयुर्वेदिक अस्पताल
सुवासा. राजकीय आयुर्वेदिक अस्पताल सुवासा का भवन पूरी तरह जर्जर हो गया है। भवन की एक पट्टी टूट चुकी है। जिसे लकड़ी का सहारा लगा कर रोका हुआ है। बरसात होते ही छत से झरने की तरह पानी टपकना लगता है। डॉक्टर और चिकित्सा कर्मी जान हथेली में रखकर मरीजों का उपचार कर रहे हैं। तेज आंधी व बरसात में जर्जर भवन के ढहने की संभावना बनी हुई है। लाखों रुपए खर्च कर कई अस्पतालों के भवन का निर्माण किया जा रहा है, लेकिन आयुर्वेदिक अस्पताल की ओर सरकार का कोई ध्यान नहीं है। चिकित्सा प्रभारी डॉ मोहम्मद मकसूद ने बताया कि जर्जर भवन में जगह जगह दीवारों पर दरारें आने लग गई है। यहां रोजाना 20 से 40 रोगी इलाज कराने आते हैं। कई बार उच्चाधिकारियों को स्थिति बताई, लेकिन कुछ नहीं हो पाया है। डॉ हेमंत शर्मा उपनिदेशक आयुर्वेदिक विभाग बूंदी ने बताया कि वर्तमान में बजट का अभाव है। हमने नई बिल्डिंग बनाने का प्रस्ताव आयुष मंत्रालय के पास भेजा हुआ है। दो-तीन महीने के बाद नई बिल्डिंग बनाने की स्वीकृति आ जाएगी तो काम चालू करवा दे जाएगा। प्रियंका पुरी सरपंच सुवासा ने बताया कि आयुर्वेदिक भवन पूर्णतया जर्जर हो चुका है। नई बिल्डिंग बनना जरूरी है।