रामगढ़ विषधारी टाइगर रिजर्व के कालदां बफर जोन को बाघों के अनुकूल बनाने की दिशा में वन विभाग ने वैज्ञानिक पद्धति से काम शुरू करदिया है।
गुढ़ानाथावतान. रामगढ़ विषधारी टाइगर रिजर्व के कालदां बफर जोन को बाघों के अनुकूल बनाने की दिशा में वन विभाग ने वैज्ञानिक पद्धति से काम शुरू करदिया है।
शहर से भीमलत महादेव तक के करीब 250 वर्ग किलोमीटर के जंगलों में शाकाहारी व मांसाहारी वन्यजीवों की वास्तविक संख्या का पता लगाने के लिए वन विभाग ने इस क्षेत्र में पहली बार ट्रेप कैमरे लगाने की शुरुआत कर दी है। जंगल की पगडियों पर हर एक किलोमीटर पर एक कैमरा लगाया जाएगा।
इसके लिए गुरुवार को टाइगर रिजर्व के उपवन संरक्षक (कोर) अरुण कुमार डी ने जैतसागर किनारे डिवीजन कार्यालय में वनकर्मियों को कैमरे लगाने व डाटा प्राप्त करने का प्रशिक्षण दिया।
प्रशिक्षण में टाइगर रिजर्व के फील्ड बायलॉजिस्ट नयन उपाध्याय ने कैमरों को लगाने की तकनीकी जानकारी दी। इस पूरे कार्यक्रम की मॉनिटङ्क्षरग कोर एवं टेरिटोरियल के दोनों उपवन संरक्षक कर रहे हैं। प्रशिक्षण के दौरान टेरिटोरियल डिवीजन के कालदां बफर जोन से जुड़े वनकर्मी भी शामिल हुए। इस क्षेत्र के सथूर गेट (बूंदी शहर), सथूर, डाटूंदा, बसोली, खीण्या व गुढ़ानाथावतान वन नाका क्षेत्र के जंगलों को सर्वे के लिए शामिल किया गया है।