शहर में भीषण गर्मी का प्रकोप जारी है। सुबह नौ बजे के बाद ही सूर्य की तपिश बढ़ जाती है और पारा 44 डिग्री सेल्सियस को पार कर चुका है। इस भीषण गर्मी से जनजीवन प्रभावित है। जहां आमजन घरों में रहने को विवश हैं, वहीं शहर के व्यस्त चौराहों और तिराहों पर यातायात कर्मी अपनी ड्यूटी पर अडिग खड़े हैं। वे तपती सड़कों पर भी कर्तव्यनिष्ठ होकर यातायात व्यवस्था संभाल रहे हैं। यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि दूसरों की राह आसान करने वाले इन कर्मियों की सेहत के प्रति संवेदनशीलता नहीं दिख रही है।
बूंदी. शहर में भीषण गर्मी का प्रकोप जारी है। सुबह नौ बजे के बाद ही सूर्य की तपिश बढ़ जाती है और पारा 44 डिग्री सेल्सियस को पार कर चुका है। इस भीषण गर्मी से जनजीवन प्रभावित है। जहां आमजन घरों में रहने को विवश हैं, वहीं शहर के व्यस्त चौराहों और तिराहों पर यातायात कर्मी अपनी ड्यूटी पर अडिग खड़े हैं। वे तपती सड़कों पर भी कर्तव्यनिष्ठ होकर यातायात व्यवस्था संभाल रहे हैं। यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि दूसरों की राह आसान करने वाले इन कर्मियों की सेहत के प्रति संवेदनशीलता नहीं दिख रही है। शहर में ऐसे 18 यातायात कर्मी इस भीषण गर्मी में तैनात हैं। पत्रिका ने विभिन्न स्थानों पर पहुंचकर इन कर्मियों की सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लिया।
12 घंटे ड्यूटी को मजबूर
जिला मुख्यालय पर चौराहों पर तैनात यातायात कर्मी भीषण गर्मी में बिना पर्याप्त सुविधाओं के 12 घंटे ड्यूटी करने को विवश हैं। गर्मी से बचाव के लिए उनके पास केवल एक टोपी और ग्लव्स हैं, जो इस तपिश में नाकाफी साबित हो रहे हैं। अधिकतर ड्यूटी पॉइंट पर न तो छतरी की व्यवस्था है और न ही कोई स्थायी छांव। हालांकि कुछ स्थानों पर पुलिस का केबिन उपलब्ध है, लेकिन उसमें बैठने की उचित व्यवस्था नहीं है और वह भी गर्मी से तपा रहता है। ड्यूटी के दौरान पीने के पानी की कोई सरकारी व्यवस्था नहीं है, जिससे इन कर्मियों को होटलों या राहगीरों पर निर्भर रहना पड़ता है। यह समस्या केवल जिला मुख्यालय तक सीमित नहीं है, बल्कि प्रत्येक थाना क्षेत्र और कस्बों में भी यातायात कर्मी अंगारों जैसी गर्मी में राहत के बिना काम करने को मजबूर हैं।
बढ़ते दबाव में नफरी कम
जिले में यातायात व्यवस्था सीमित कार्मिकों के भरोसे चल रही है। वर्षों पहले स्वीकृत पद ही वर्तमान में संचालित हो रहे हैं। यातायात पुलिस के लिए केवल 18 पद स्वीकृत हैं। यद्यपि ये पद भरे हुए हैं, पर कांस्टेबलों की कमी है। बढ़ते यातायात दबाव के चलते यह नफरी नाकाफी है। यातायात बेड़े में 35 से 40 पुलिसकर्मी होने पर ही व्यवस्था में सुधार संभव है। अभी 12 यातायात प्वाइंट चल रहे हैं, लेकिन उनमें से केवल 6 या 7 प्वाइंट पर ही जवान तैनात रहते हैं। नफरी कम होने के कारण पुलिसकर्मियों को अक्सर 12-12 घंटे तक लगातार ड्यूटी करनी पड़ती है और उन्हें लगातार भागदौड़ करनी पड़ती है। होमगार्ड भी व्यवस्था संभालते है।
पानी पीए, सिर पर गीला कपड़ा रखे
वरिष्ठ चिकित्सक डॉ.पवन भारद्धाज के अनुसार हीट वेब ज्यादा है। इस तेज तपन में सुरक्षा कर्मी पूरे बाहे की शर्ट पहने,खूब पानी पीए। सिर पर गीला कपड़ा रखना चाहिए और ओआरएस या नींबू पानी का सेवन करना चाहिए, ताकि डिहाइड्रेशन और हीट स्ट्रोक से बचा जा सके। लगातार 8 से 12 घंटे धूप में खड़े रहने से शरीर का तापमान अनियंत्रित हो सकता है। ऐसे में धूप में सेहत का ध्यान रखना बेहद जरुरी है।
वर्दी पसीने से तर बतर
एएसआई त्रिलोक पालीवाल व साथी होमगार्ड बायपास रोड पर धूप में वाहन चालकों को समझाइश करते हुए दिखे। पत्रिका टीम दोपहर 12 बजे पहुंची तो जवान की खाकी वर्दी पसीने से तर, आंखों में जलन और होट सूखे दिखे। उन्होंने बताया कि प्रतिदिन 20 चालान के साथ 100 से अधिक लोगों का जागरूक कर रहे है। वो बताते कि सुबह हल्का नाश्ता करके निकलते और साथ में पानी की बोतल लेकर आते है।
समझाइश की
दोपहर 12.30 रेल्वे तिराहे पहुंचे, यहां हेडकांस्टेबल रमेशचंद मीणा व होमगार्ड हेंमत कुमार नजर आए। वे एक दुपहिया वाहन चालक जिसमें बच्चा आगे बैठा हुआ तो समझाइश करते हुए दिखे। वे दिनभर में चार लीटर पानी पी जाते है। गर्मी इतनी है कि बार-बार गला सूख जाता है। चालान बनाते हुए दिखे दोपहर के एक बजकर 15 मिनट पर चितौड़ रोड पहुंचे,यहां कांस्टेबल ताराचंद व होमगार्ड का जवान भागीरथ खड़ा था। वे एमवी एक्ट के तहत चालान बनाता हुआ दिखा। ताराचंद ने बताया कि वो दिनभर में चार से पांच लीटर पानी पी जाते है। सुबह घर से हल्ला नाश्ता करके आते है फिर दोपहर में जैसे समय मिलता है भोजन करने चले जाते है फिर ड्य़ूटी पर डट जाते है।
यातायात पुलिस में नफरी की कमी है। यह सही है भीषण गर्मी है। जवान गर्मी में मुस्तैदी से डटे है। यातायात पुलिसकर्मियों को गर्मी से राहत दिलाने के लिए उचित व्यवस्था करने का प्रयास किया जाएगा।
बहादुर सिंह गौड़, यातायात प्रभारी, बूंदी