
सुवासा. आदर्श प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर मरीजों का इलाज करते कंपाउंडर भोलू लाल मेघवाल। (पत्रिका फोटो)
सुवासा. तालेड़ा उपखंड के सुवासा आदर्श प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर पर तेज गर्मी होने के बावजूद तीन माह से चिकित्सा प्रभारी व 4 वर्ष से आयुष चिकित्सक सहित पैरामेडिकल स्टाफ के पद रिक्त होने से मरीज को स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा है। समय पर चिकित्सक नहीं मिलने से गर्भवती महिलाएं काफी परेशान है। केंद्र पर पर 3 माह से चिकित्सक नहीं होने के कारण ग्रामीण को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
अस्पताल में डॉक्टर के पद रिक्त होने से मरीजों का उपचार कंपाउंडर के भरोसे किया जा रहा है। अस्पताल में छत का प्लास्टर गिर रहा है, जो कभी भी हादसे को न्योता दे सकता है। ग्रामीणों का कहना है कि अस्पताल में प्रतिदिन काफी संख्या में मरीज इलाज के लिए पहुंचते हैं, लेकिन डॉक्टर नहीं होने से उन्हें उचित चिकित्सा सुविधा नहीं मिल पा रही है। गंभीर मरीजों को मजबूरी में जिला अस्पताल या निजी चिकित्सालय का रुख करना पड़ रहा है। जिससे समय और आर्थिक नुकसान दोनों उठाने पड़ रहे हैं। स्थानीय लोगों ने बताया कि अस्पताल में केवल कंपाउंडर के द्वारा प्राथमिक उपचार दिया जा रहा है। जबकि कई बार आपातकालीन स्थिति में मरीजों की जान जोखिम में पड़ जाती है।
अस्पताल में कार्यरत चिकित्सा प्रभारी डॉ. श्रुति परिहार का 3 माह पहले पीजी करने जम्मू-कश्मीर चली जाने से उनका पद रिक्त हो गया। आयुष चिकित्सक डॉ. हेमंत सोनी का 4 वर्ष पहले स्थानांतरण अन्य जगहों पर हो जाने के कारण दोनों ही चिकित्सक के पद रिक्त हो गये है,
तीन माह से प्रथम श्रेणी कंपाउंडर भोलू लाल मेघवाल, फार्मासिस्ट जोधराज नागर, एएनएम इंदिरा रानी के भरोसे चल रहा है। कई बार फार्मासिस्ट छुट्टी में चले जाने के बाद कंपाउंड को दवा वितरण केंद्र पर बैठकर अकेले ही मरीज का इलाज करना पड़ रहा है। कई बार तो अस्पताल में मरीजों को इंजेक्शन लगाने व मरहम पट्टी बीपी चेक करने के लिए भी काफी समय बैठना पड़ रहा है। रात्रि के समय चिकित्सा सेवा नहीं मिलने से अधिकांश प्रसव तालेड़ा, केशवरायपाटन, बूंदी, कोटा रेफर कर दिए जाते हैं।
सुवासा प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर प्रतिवर्ष 5 से 7 डिलीवरी होती है और अस्पताल की ओपीडी 29000 से अधिक है। अस्पताल के अधीनस्थ लाडपुर, बाजड, देहित, देलूंदा, सीनता, मेहराणा, तीरथ, भवानीपुर, गामछ उप स्वास्थ्य केंद्र आते हैं, जिनकी जनसंख्या 36532 के लगभग है। यहां लोग भी उपचार के लिए सुवासा अस्पताल पर निर्भर है। ऐसे में चिकित्सक नहीं मिलने से मरीज को मजबूरन कंपाउंडर से इलाज करवाना पड़ रहा है। समय पर चिकित्सा सेवा नहीं मिलने से गर्भवती महिलाओं को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
Updated on:
16 May 2026 12:04 pm
Published on:
16 May 2026 12:03 pm
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