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Bundi: साहब के आने से 15 मिनट पहले AC चालू…’ 1 महीने में 27000 रुपए का डीजल सिर्फ आने-जाने में हो रहा खर्च

Petrol-Diesel Consumption In Govt Vehicles: बूंदी में सरकारी अधिकारियों के कोटा से प्रतिदिन अप-डाउन करने और सरकारी वाहनों के बढ़ते डीजल खर्च को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं। एक ओर प्रधानमंत्री ईंधन बचत की अपील कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर लाखों रुपए का डीजल सिर्फ आने-जाने और वाहनों को ठंडा करने में खर्च हो रहा है।

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फोटो: AI

Petrol-Diesel Price Hike: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी देशवासियों से पेट्रोल-डीजल बचाने की लगातार अपील कर रहे हैं। वे तेल आयात पर निर्भरता घटाने और पर्यावरण बचाने की नसीहत दे रहे हैं। जिले में कई सरकारी अधिकारी इस अपील को नजरअंदाज कर रहे हैं। जिले में पदस्थ आधा दर्जन से ज्यादा विभागीय अधिकारी रोजाना कोटा से बूंदी अप-डाउन कर रहे हैं। एक तरफ की दूरी 40 किलोमीटर है, यानी रोज 80 किलोमीटर का सफर। सरकारी गाड़ियां हर दिन औसत 8-10 लीटर डीजल खर्च कर रही हैं।

माह में एक अधिकारी के वाहन से 240-300 लीटर डीजल सिर्फ आने-जाने में खर्च हो रहा है। इसकी कीमत करीब 27 हजार रुपए बैठती है, जो सरकारी खजाने से जा रही है। यदि प्रधानमंत्री की अपील को जमीन पर उतारना है तो जिम्मेदारों को मिसाल पेश करनी होगी। अन्यथा 'ऊर्जा बचाओ' का नारा सिर्फ कागजों तक सीमित रह जाएगा।

साहब के लिए ठंडी करते गाड़ी

पिछले कुछ समय से सरकारी कार्यालय परिसर में नजारे चौकाने वाले मिल रहे है। कई चालक साहब के बाहर आने से 15-20 मिनट पहले ही गाड़ी स्टार्ट कर एसी फुल स्पीड में चला देते हैं, ताकि अफसर को तपती गाड़ी में न बैठना पड़े। इस दौरान गाड़ी खड़ी-खड़ी 1.5 से 2 लीटर डीजल प्रति घंटा पी जाती है। एक अनुमान के मुताबिक सिर्फ एसी चलाकर गाड़ी ठंडी करने में हर महीने 1500 लीटर से ज्यादा ईंधन बर्बाद हो रहा है।

अफसरों का मुख्यालय पर नहीं निवास

नियमानुसार अधिकारियों को मुख्यालय पर ही निवास करना चाहिए लेकिन कई अधिकारी इस नियम का उल्लंघन कर रहे हैं। वे कोटा में परिवार रखकर प्रतिदिन मुख्यालय से अप-डाउन कर रहे हैं। कलक्ट्रेट के एक लिपिक ने बताया कि अधिकारी बच्चों की कोचिंग का बहाना बनाते हैं, लेकिन सरकारी गाड़ी और डीजल सरकार का खर्च कर रहे है।

जिला पुल अधिकारी ने बताया कि विभाग में 12 गाड़ियां हैं, जिनमें से फिलहाल 3 आरक्षित हैं। शेष गाड़ियां अधिकारियों के पास लगी हुई हैं। औसत के अनुसार, प्रति माह 125 लीटर से अधिक डीजल खर्च होता है। हर माह लॉगबुक भरा जाता है और वाहन 1500 से 2000 किलोमीटर तक चलते हैं। इसमें सर्वाधिक उपयोग उपखंड अधिकारी और तहसीलदार के वाहनों का होता है।

कांस्टेबल साइकिल से पहुंचा दफ्तर

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ईंधन बचत और पर्यावरण संरक्षण की अपील का यहां पुलिस अधीक्षक कार्यालय में देखने को मिला। जब पुलिस अधीक्षक कार्यालय में तैनात कांस्टेबल रामचंद्र गुर्जर शुक्रवार को साइकिल से ऑफिस पहुंचा। कांस्टेबल द्वारा किए गए इस प्रयास की सभी ने सराहना की। कांस्टेबल ने बताया कि प्रधानमंत्री की अपील के बाद उन्होंने नई साइकिल खरीदी और अब वे हर रोज इससे दफ्तर आएंगे और कोशिश यही रहेगी कि जरूरी कार्य साइकिल से निपटा लिए जाए।

ईंधन की करनी होगी बचत

पश्चिम एशिया में चल रहे वैश्विक संकट के मध्य प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ईंधन बचत की अपील का असर अब राजनेताओं और अधिकारियों पर दिख रहा है। राज्यपाल, प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री और मंत्रियों के काफिले में वाहनों की संख्या कम करके ईंधन बचत को प्रोत्साहित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि सरकारी अधिकारियों के घर से कार्यालय और कार्यालय से घर आने-जाने के समय आधा घंटे पहले गाड़ी स्टार्ट करने से काफी ईंधन खर्च होता है। यदि अधिकारी वर्ग के बाहर निकलते समय ही गाड़ी स्टार्ट की जाए तो अधिक ईंधन की बचत होगी। इसके साथ ही, विभागध्यक्ष सप्ताह में एक दिन 'नो व्हीकल डे' घोषित करके भी इस मुहिम को और अधिक तत्परता से आगे बढ़ा सकते हैं।
डॉ.एन.के.जेतवाल,सेवानिवृत प्राचार्य, कॉलेज शिक्षा