शहर के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में आने वाले रोगियों की संख्या और शहरवासियों की पुरानी मांग को देखते हुए राज्य सरकार द्वारा बीते वर्ष बजट घोषणा में अस्पताल को क्रमोन्नत कर तीस से पचास बेड का किया था।
कापरेन. शहर के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में आने वाले रोगियों की संख्या और शहरवासियों की पुरानी मांग को देखते हुए राज्य सरकार द्वारा बीते वर्ष बजट घोषणा में अस्पताल को क्रमोन्नत कर तीस से पचास बेड का किया था। शहरवासियों सहित क्षेत्र के लोगों को अस्पताल में सुविधाएं मिलने की उम्मीद थी, लेकिन बजट घोषणा के करीब आठ माह बाद भी अस्पताल में स्टाफ और सुविधाएं नहीं बढऩे से लोगों में मायूसी है।
अस्पताल में रोजाना आने रोगियों की संख्या छह सौ से एक हजार तक रहती है, वहीं इनडोर रोगियों की संख्या भी मौसमी बीमारियों के दौरान तीस से एक सौ रोगी प्रतिदिन रहती है। कापरेन सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र शहर सहित आसपास के करीब डेढ़ सौ गांवों के लोग उपचार के लिए पहुंचते है। वहीं मेगा हाइवे से जुड़ाव होने से अस्पताल में आए दिन दुर्घटनाग्रस्त रोगी आते हैं।
शहर में रेफरल अस्पताल बनने के बाद क्रमोन्नत होकर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बना था। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में क्रमोन्नत होने पर यहां तीस बेड की सुविधाएं उपलब्ध करवाई गई और तब से तीस बेड का अस्पताल ही संचालित हो रहा है। शहरवासियों की लंबी मांग के चलते राज्य सरकार द्वारा करीब चार दशक अस्पताल को क्रमोन्नत किया जाकर पचास बेड का किए जाने की घोषणा की गई, लेकिन आठ माह बाद भी अस्पताल में बेड नहीं बढऩे से आमजन को राहत नहीं मिल पाई है।
भर्ती रोगियों को करना पड़ता है इंतजार
वर्तमान में अस्पताल में तीस बेड है, जिसमे दस बेड महिला रोगी वार्ड में और दस बेड पुरुष रोगी वार्ड में है। वहीं दस बेड प्रसूता वार्ड में है। अस्पताल में बेड कम होने से भर्ती होने वाले रोगियों को ड्रिप लगाने और उपचार के लिए बेड खाली होने का इंतजार करना पड़ता है। शहरवासियों का कहना है कि मौसमी बीमारियों के दौरान अस्पताल में रोगियों की संख्या बढ़ जाती है और बेड खाली नहीं होने से कई बार रोगियों को देर तक इंतजार करना पड़ता है।
बनी रहती है स्टाफ की कमी
अस्पताल तीस बेड का होने से यहां नर्सिंग स्टाफ और चिकित्सकों की कमी रहती है, जिसके चलते चिकित्सक कक्ष के सामने रोगियों की लंबी कतार लगी रहती है। उपचार के दौरान इंतजार करना पड़ता है। वहीं नर्सिंग स्टाफ की कमी होने से इलाज में भी देरी होती है। स्टाफ और बेड बढऩे से रोगियों को राहत मिलने की उम्मीद है।
एक्सरे नहीं हुआ शुरू
अस्पताल में लाखों की लागत से लगी एक्सरे मशीन बीते दिनों अतिवृष्टि के दौरान अस्पताल भवन में पानी भरने से बन्द हो गई थी। अतिवृष्टि के बाद एक्सरे मशीन वापस शुरू करवाने के लिए तकनीकी इंजीनियर द्वारा निरीक्षण किया गया। एक्सरे मशीन ठीक भी हो गई है, लेकिन सीआर मशीन अब तक ठीक नहीं होने से एक्सरे चालू नहीं हो पाया है, जिससे अस्पताल में आने वाले रोगियों को करीब तीन माह से एक्सरे की सुविधा नहीं मिल रही है।
प्रस्ताव बना कर भेजा
मुख्य जिला चिकित्सा अधिकारी बूंदी डॉ. ओ पी सामर ने बताया कि कापरेन अस्पताल में बेड बढऩे की घोषणा के बाद यहां से प्रस्ताव बना कर भेजा जा चुका है। जल्द ही स्टाफ बढऩे की उम्मीद है। नए अस्पताल भवन के लिए जगह आवंटित हो चुकी है और नए अस्पताल भवन निर्माण भी जल्द शुरू होगा। जिला चिकित्सा अधिकारी ने बताया कि एक्सरे का एस्टीमेट बना कर भेजा जा चुका है। जल्दी एक्सरे की सुविधा उपलब्ध होगी।