अवैध खनन की निगरानी, और वन/वन्यजीवों की सुरक्षा को बेहतर बनाने के लिए जिला वन मंडल एवं रामगढ़ विषधारी टाइगर रिजर्व क्षेत्र में भेजी गई मोटरसाइकिल डेढ़ माह से धूल फांक रही है। इनका अब तक उपयोग नहीं हो पाया है।
बूंदी. अवैध खनन की निगरानी, और वन/वन्यजीवों की सुरक्षा को बेहतर बनाने के लिए जिला वन मंडल एवं रामगढ़ विषधारी टाइगर रिजर्व क्षेत्र में भेजी गई मोटरसाइकिल डेढ़ माह से धूल फांक रही है। इनका अब तक उपयोग नहीं हो पाया है।
राज्य सरकार की ओर से विश्व वानिकी दिवस पर वन विभाग के फील्ड स्टाफ को गश्त और वन्यजीव सुरक्षा को मजबूत करने के लिए 460 नई मोटरसाइकिलें प्रदेश के विभिन्न जिलों में सौंपी गई थी। जयपुर में आयोजित राज्य स्तरीय कार्यक्रम में वन मंत्री संजय शर्मा ने बाइक को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया था। यह वितरण कैम्पा योजना के तहत किया गया है। इन बाइक को फील्ड में कार्यरत वन रक्षक को दिया जाना था। योजना के तहत जिला वन मंडल में सात एवं रामगढ़ विषधारी टाइगर रिजर्व क्षेत्र में 11 मोटर साइकिलें भेजी गई थी। दोनों विभागों के अनुसार मोटर साइकिल तो मिल गई, लेकिन इनकी आरसी अब तक नहीं मिली है। इसके चलते इनको ना तो वन रक्षकों को सौंपा जा रहा है और ना ही उनका उपयोग किया जा रहा है। इसके विभाग को इन मोटर साइकिलों की सुरक्षा और करना पड़ रही है। जबकि कई बार वन रक्षक आवंटित हुई मोटर साइकिलों को दिए जाने की मांग भी कर चुके है।
कई बार भेजा पत्र
जिला वन मंडल एवं रामगढ़ विषधारी टाइगर रिजर्व क्षेत्र अधिकारियों इन मोटर साइकिलों की आरसी भिजवाने के लिए कई बार विभाग के अरण्य भवन कार्यालय को पत्र भी भेज रखे है, लेकिन वहां से अब तक कोई भी संतुष्टिपूर्ण जवाब नहीं आया है।
ताले में बंद
रामगढ़ विषधारी टाइगर रिजर्व के अधिकारियों ने सुरक्षा की ²ष्टि से बाइक को ताले में बंद कर रखा है। जैतसागर के पास स्थित कार्यालय सुनसान क्षेत्र में होने के कारण अधिकारियों को चोरी का भय बना रहता है। ऐसे में इन्हें ताले में बंद कर रखा है।
रामगढ़ विषधारी टाइगर रिजर्व क्षेत्र में गश्त के लिए 11 मोटर साइकिल मिली है। उनकी आरसी भिजवाने के लिए अरण्य भवन से सम्पर्क किया जा रहा है। आरसी मिलते ही वन रक्षकों को बाइक सौंप
दी जाएगी।
अरुण कुमार डी, उप वन संरक्षक, रामगढ़ विषधारी टाइगर रिजर्व क्षेत्र
कैम्पा योजना में मिली मोटर साइकिलों की आरसी अब तक नहीं मिली है। ऐसे में उनका उपयोग नहीं किया जा रहा है। इस मामले में उच्चाधिकारियों को अवगत कराया जाएगा।
आलोक गुप्ता, उप वन संरक्षक, जिला उप वन सरंक्षक, बूंदी