बूंदी

मंडी सडक़ की चपेट में सरकारी भवनों की भूमि

कुंवारती कृषि उपज मंडी के लिए बन रही सडक़ को लेकर एक ओर नया मोड़ आया है।
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Jun 24, 2018
Land of Government buildings in the grip of Mandi road
मंडी सडक़ की चपेट में सरकारी भवनों की भूमि

बूंदी. रामगंजबालाजी. कुंवारती कृषि उपज मंडी के लिए बन रही सडक़ को लेकर एक ओर नया मोड़ आया है। यहां सडक़ को राजकीय प्रयोजनार्थ छोड़ी गई जमीन पर ही बनाया जा रहा है। जबकि इन भवनों के लिए पट्टे तक जारी हो चुके हैं। आवंटित भूमि के सीमाज्ञान के लिए कई बार विभागीय कर्मचारियों ने राजस्व विभाग को लिखित में देने के बावजूद मंडी कमेटी आवंटित भूमि में जबरन सडक़ निर्माण कार्य करवा रहे है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार खसरा संख्या 9 में से वर्ष 2010 में दौलाड़ा उप स्वास्थ्य केन्द्र के लिए 60 गुणा 50 वर्ग फीट का ग्राम पंचायत ने पट्टा जारी किया था। वहीं दौलाड़ा आंगनबाड़ी केन्द्र द्वितीय के लिए 60 गुणा 40 वर्ग फीट का पट्टा पंचायत ने नि:शुल्क भवन निर्माण के लिए जारी किया हुआ है। आठ वर्ष से दोनों भवनों के निर्माण के लिए कर्मचारी पट्टाशुदा भूमि का सीमाज्ञान करवाने के लिए राजस्व विभाग को बार-बार प्रार्थना पत्र दे चुके है। उसके बावजूद विभाग की ओर से सीमाज्ञान नहीं कराया गया। अब इस पट्टे की जमीन पर मंडी समिति ने सडक़ का निर्माण शुरू करा दिया।
इसी प्रकार खसरा संख्या 9 के निकट ही पशु चिकित्सालय के लिए आवंटित एक बीघा भूमि पर भी सडक़ निर्माण के लिए ग्रेवल बिछा दी गई।

23 मई को भी दिया था प्रार्थना पत्र
दौलाड़ा में न्याय आपके द्वार शिविर में आंगनबाड़ी केन्द्र द्वितीय की पट्टाशुदा भूमि का सीमाज्ञान करवाने के लिए महिला पर्यवेक्षक ने शिविर में प्रार्थना पत्र दिया था। वहीं उपस्वास्थ्य केन्द्र की पट्टाशुदा भूमि के सीमाज्ञान के लिए स्वास्थ्य कार्यकर्ता ने प्रार्थना पत्र दिया था, लेकिन बीस दिन बाद भी राजस्व विभाग की ओर से सीमाज्ञान नहीं किया गया। अब मंडी कमेटी ने जबरन सडक़ का निर्माण शुरू करा दिया।


जमीन का ‘खेल’
मंडी के लिए सडक़ का निर्माण शुुरुआत से ही विवाद में रहा। लोगों की जमीनों को सडक़ पर लाने के लिए पहले ही कई घुमाव दे दिए। इससे सडक़ सर्पाकार हो गई। अब पट्टे की जमीन पर निर्माण कर यहां ग्रामीणों के अरमानों पर पानी फेरा जा रहा है।
आवंटित पट्टेशुदा भूमि में बिना सीमाज्ञान के सडक़ का बनाना जाना गंभीर है। शीघ ही मंडी सचिव से वार्ता करके आवंटित भूमि में सीमाज्ञान के बाद ही सडक़ बनाई जाएगी।
नरेश मालव, अतिरिक्त जिला कलक्टर (प्रशासन), बूंदी

Published on:
24 Jun 2018 01:29 pm