प्रदेश में अब मनमर्जी से सोनोग्राफी मशीन बेचना मुश्किल होगा।
बूंदी. प्रदेश में अब मनमर्जी से सोनोग्राफी मशीन बेचना मुश्किल होगा। पूरे नियम-कायदों की पालना करने वाली कंपनी ही सोनोग्राफी बेच सकेगी। इसके लिए हाल ही में राज्य पीसीपीएनडीटी सेल ने सोनोग्राफी बेचने वाली कंपनियों पर शिकंजा कस दिया है। अब सोनोग्राफी बेचने वाली कम्पनियों को स्वास्थ्य विभाग की पीसीपीएनडीटी सेल में पंजीयन करवाना अनिवार्य होगा। जबकि पूर्व में सिर्फ सोनोग्राफी सेंटर का ही पंजीयन होता था।
गत दिनों हुई राज्य सुपरवाइजर बोर्ड की बैठक में यह निर्णय किया गया। जिसमें तय हुआ कि कोई भी व्यक्ति या कंपनी बिना पंजीयन के सोनोग्राफी मशीन नहीं बेच सकेगा। फिलहाल राजस्थान में करीब १३ कंपनियों के अल्ट्रासाउंड सोनोग्राफी मशीनें बेची जा रही है। इन कंपनियों के प्रतिनिधियों के साथ पीसीपीएनडीटी सेल के राज्य समुचित प्राधिकारी नवीन जैन ने बैठक लेकर दिशा निर्देश दिए हैं। जिसमें सोनोग्राफी मशीन बनाने वाली कंपनी को एक लाख रुपए देकर पंजीयन करवाना होगा।
कराना होगा पंजीयन
डिस्ट्रीब्यूटर, डीलर व रीटेलर को पचास हजार रुपए देकर पंजीयन करवाना होगा। पंजीयन की अवधि पांच वर्ष होगी। बिना पंजीयन कोई भी मशीन नहीं बेच सकेगा। यदि किसी सोनोग्राफी सेंटर के पास पुरानी मशीन है और वह किसी कंपनी, डिस्ट्रीब्यूटर, डीलर, रीटेलर, को वापस बेचता है तो भी राज्य पीसीपीएनडीटी सेल को सूचना देना जरूरी होगा।
सब कुछ बताना पड़ेगा
जिस कंपनी के पास राज्य पीसीपीएनडीटी सेल में पंजीयन नहीं होगा, वह कंपनी किसी पुरानी मशीन को बदलने या खरीदने का कार्य नहीं कर सकेगी। प्रदेश में सोनोग्राफी मशीन बचेने वाली कंपनी को कार्यालय का पता, गोदाम, स्वयं के डीलरों की सूची सहित बेचने वाली मशीनों की पूर्ण जानकारी देनी होगी।
प्रत्येक पंजीयन करवाने वाली कंपनी को त्रेमासिक रिपोर्ट भी देनी होगी। जिसमें कितनी मशीनों को कंपनी ने कौन से सोनोग्राफी सेंटर को बेचने के बारे में बताना होगा।
जिला पीसीपीएनडीटी समन्वयक राजीव लोचन गौतम ने बताया कि सोनोग्राफी मशीन बेचने वाली कंपनियों को पंजीयन करवाना होगा। बिना पंजीयन कोई भी मशीन नहीं बेच सकेगा। इससे बिना नियम व मनमर्जी मशीन बेचने पर पाबंदी लगेगी। पीसीपीएनडीटी सेल ने गत दिनों हुई बैठक में दिशा निर्देश जारी किए हैं।