नवसृजित ग्राम पंचायत अमरत्या में प्रशासक और ग्राम विकास अधिकारी की नियुक्ति तो कर दी गई, लेकिन आवश्यक स्टाफ और वित्तीय अधिकार नहीं मिलने से पंचायत क्षेत्र के लोगों में भारी आक्रोश व्याप्त है। ग्रामीणों का कहना है कि डेढ़ वर्ष से छोटे-छोटे कामों के लिए भी उन्हें दर-दर भटकना पड़ रहा है, लेकिन समस्या के समाधान की ओर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा। जानकारी के अनुसार ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग की ओर से अमरत्या, बालोला और कांस की आंतरी तीनों राजस्व गांवों को मिलाकर अमरत्या को नवगठित ग्राम पंचायत का दर्जा दिया गया।
हिण्डोली. नवसृजित ग्राम पंचायत अमरत्या में प्रशासक और ग्राम विकास अधिकारी की नियुक्ति तो कर दी गई, लेकिन आवश्यक स्टाफ और वित्तीय अधिकार नहीं मिलने से पंचायत क्षेत्र के लोगों में भारी आक्रोश व्याप्त है। ग्रामीणों का कहना है कि डेढ़ वर्ष से छोटे-छोटे कामों के लिए भी उन्हें दर-दर भटकना पड़ रहा है, लेकिन समस्या के समाधान की ओर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा।
जानकारी के अनुसार ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग की ओर से अमरत्या, बालोला और कांस की आंतरी तीनों राजस्व गांवों को मिलाकर अमरत्या को नवगठित ग्राम पंचायत का दर्जा दिया गया। इसके बाद पंचायत समिति हिण्डोली की ओर से ईश्वरलाल सैनी को प्रशासक का चार्ज दिया गया तथा ललित कुमार रेगर को ग्राम विकास अधिकारी के रूप में पदस्थापित किया गया।
प्रशासक ईश्वरलाल सैनी ने बताया कि जब उन्होंने विकास अधिकारी से अधिकार और संसाधनों की मांग की तो उन्हें जवाब मिला कि ‘‘हस्ताक्षर करो, पावर कुछ नहीं है।’’ इस पर उन्होंने आपत्ति जताते हुए कहा कि यदि अधिकार ही नहीं दिए गए तो पद देने का क्या मतलब है। पंचायत क्षेत्र में साफ-सफाई, बिजली व्यवस्था और अन्य जरूरी कार्य आखिर कौन करवाएगा। उन्होंने बताया कि बाद में वे इस समस्या को लेकर पूर्व कृषि मंत्री प्रभुलाल सैनी से भी मिले, जिन्होंने मुख्य कार्यकारी अधिकारी और सचिव से मामले को गंभीरता से लेने को कहा।
विकास अधिकारी संजय मोदी ने उच्च अधिकारियों को पत्र लिखकर नवसृजित ग्राम पंचायत अमरत्या के प्रशासक को वित्तीय अधिकार देने के संबंध में मार्गदर्शन मांगा है, ताकि पंचायत स्तर पर जरूरी कार्य शुरू हो सकें और लोगों को राहत मिल सके।
विकास अधिकारी ने जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी और सचिव को भेजे पत्र में बताया कि नवसृजित ग्राम पंचायत अमरत्या में पंचायत भवन, बैठक व्यवस्था, वित्तीय संसाधन और बिजली जैसी मूलभूत सुविधाएं तक उपलब्ध नहीं हैं। इसके चलते पंचायत क्षेत्र के लोगों के जरूरी काम समय पर नहीं हो पा रहे हैं।
ग्राम पंचायत क्षेत्र में जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र, जाति-मूल निवास प्रमाण पत्र, राशन, रोजगार और आवास योजनाओं से जुड़े कार्य लंबित पड़े हैं। ग्रामीणों को बार-बार चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। समस्या बढऩे के कारण राजस्थान संपर्क पोर्टल पर भी शिकायतें दर्ज करवाई जा रही हैं, जिनमें कई शिकायतें 61 से 70 दिनों से लंबित चल रही हैं।