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Bundi news :फसलें बचाने के लिए नहर में अवरोध लगा रहे किसान

तालेड़ा उपखंड के सुवासा, लाडपुर, बाजड़, देहित, तीरथ, जमीतपुरा कस्बे सहित आसपास के ग्रामीण क्षेत्र में नहर में पर्याप्त पानी नहीं आने से खरीफ फसलों पर संकट गहराने लगा है। सिंचाई के लिए आवश्यक पानी नहीं मिलने से किसान परेशान हैं।
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सुवासा. क्षेत्र में नहरों में लगा रखे हैं किसानों ने थोड़े ओहड़े जिससे टेल के किसान चिंतित ।

सुवासा. तालेड़ा उपखंड के सुवासा, लाडपुर, बाजड़, देहित, तीरथ, जमीतपुरा कस्बे सहित आसपास के ग्रामीण क्षेत्र में नहर में पर्याप्त पानी नहीं आने से खरीफ फसलों पर संकट गहराने लगा है। सिंचाई के लिए आवश्यक पानी नहीं मिलने से किसान परेशान हैं। फसलों को बचाने के लिए किसान जगह-जगह नहर में अवरोध लगाकर अपने खेतों तक पानी पहुंचाने का प्रयास कर रहे हैं। वहीं कई किसानों ने डीजल पंपों के सहारे सिंचाई की जिससे अब तक लाखों रुपए का डीजल खर्च हो चुका है।

क्षेत्र के लगभग 27 हजार हेक्टेयर जमीन है, जिसमें किसानों को खरीफ फसलों की बुवाई करनी थी, लेकिन अब तक 16225 हेक्टेयर जमीन पर ही बुवाई हो पाई है। कृषि विभाग के अनुसार अब तक करीब 15 हजार हेक्टेयर में धान, 700 हेक्टेयर में मक्का, 300 हेक्टेयर में सोयाबीन, 200 हेक्टेयर में उड़द तथा 25 हेक्टेयर में मूंग की बुवाई हो चुकी है। 10775 हेक्टेयर जमीन में अभी तक बुवाई नहीं हो पाई है किसान अभी भी खेतों में फसल की बुवाई कर रहे हैं।

किसानों का कहना है कि इस समय धान सहित सभी खरीफ फसलों को पर्याप्त सिंचाई की आवश्यकता है, लेकिन नहर में पानी का प्रवाह कम होने से खेतों तक पर्याप्त पानी नहीं पहुंच पा रहा है। यदि जल्दी ही नहर में पानी की मात्रा नहीं बढ़ाई गई तो फसलों के सूखने का खतरा बढ़ जाएगा और किसानों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है।

किसान दुर्गा शंकर खेड़ीवाल ने बताया कि फसलों को बचाने के लिए उन्हें डीजल पंप चलाकर सिंचाई करनी पड़ रही है, जिससे लाखों रुपये का अतिरिक्त खर्च हो चुका है। इसके बावजूद सभी खेतों तक पानी नहीं पहुंच पा रहा है। ग्रामीण किसानों ने प्रशासन एवं सिंचाई विभाग से मांग की है कि नहर में तुरंत पर्याप्त पानी छोड़ा जाए। ताकि खरीफ फसलों को समय पर सिंचाई मिल सके और किसानों को नुकसान से बचाया जा सके। किसानों का कहना है कि यदि शीघ्र पानी की आपूर्ति नहीं बढ़ाई गई तो क्षेत्र में धान सहित अन्य खरीफ फसलों का उत्पादन प्रभावित होना तय है।

तालेड़ा उपखंड में अब तक 16225 हेक्टेयर में बुवाई हो चुकी है, जिसमें 15000 हेक्टेयर में धान, 700 हेक्टेयर में मक्का, 300 हेक्टेयर में सोयाबीन, 200 हेक्टेयर में उदंड, 25 हेक्टेयर में मूंग की बुवाई हो चुकी है। इस समय बारिश व नहर के पानी की अति आवश्यकता है
विष्णु मीणा, कृषि पर्यवेक्षक

अभी नहर शुरू हुई है इसलिए पानी का प्रवाह कम कर रखा है। जल्दी पानी की मात्रा ज्यादा बढ़ा दी जाएगी और नहर में लगे सभी अवरोध हटा दीजिए। पानी कम आने के कारण किसान नहर में अवरोध लगा रहे हैं। शीघ्र ही नहर में पानी बढ़ा दिया जाएगा।
विकास गोस्वामी, सीएडी, ऐईएन, तालेड़ा