शहर में इलेक्ट्रिक स्कूटरों की बढ़ती संख्या के साथ यातायात नियमों की अनदेखी चिंता का विषय बनती जा रही है। डीजल-पेट्रोल की बढ़ती कीमतों के बीच लोगों का रुझान ई-वाहनों की ओर बढ़ा है, लेकिन बिना नियमों के संचालन से सडक़ पर खतरा मंडरा रहा है।
बूंदी. शहर में इलेक्ट्रिक स्कूटरों की बढ़ती संख्या के साथ यातायात नियमों की अनदेखी चिंता का विषय बनती जा रही है। डीजल-पेट्रोल की बढ़ती कीमतों के बीच लोगों का रुझान ई-वाहनों की ओर बढ़ा है, लेकिन बिना नियमों के संचालन से सडक़ पर खतरा मंडरा रहा है। सुबह-शाम शहर की सडक़ों पर दौड़ रहे इलेक्ट्रिक स्कूटर अब सुविधा से ज्यादा परेशानी का कारण बनने लगे हैं।
शहर में बड़ी संख्या में नाबालिग बच्चे बिना ड्राइङ्क्षवग लाइसेंस और वैध दस्तावेजों के इलेक्ट्रिक स्कूटर चलाते नजर आ रहे हैं। कई अभिभावक और वाहन मालिक ‘‘नॉन आरटीओ रजिस्ट्रेशन’’ की आड़ में बच्चों को वाहन थमा रहे हैं। हीरो इलेक्ट्रिक फ्लैश और ओकिनावा लाइट जैसे लो-स्पीड ई-स्कूटर बिना आरटीओ पंजीकरण के चलाए जा सकते हैं, लेकिन नाबालिगों की ओर से इनका संचालन नियमों के खिलाफ माना जाता है। एक तरफ हेलमेट नहीं पहनने और ओवरस्पीङ पर ऑनलाइन चालान किए जा रहे हैं, वहीं बिना रजिस्ट्रेशन वाले वाहनों और नाबालिग चालकों पर प्रभावी कार्रवाई नजर नहीं आ रही। इससे सडक़ सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
दुर्घटना होने पर पहचान कैसे
सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि ऐसे किसी बिना नंबर वाले वाहन से दुर्घटना हो जाए तो उसकी पहचान कैसे होगी। बिना पंजीकरण और नंबर प्लेट वाले वाहन का पता लगाना मुश्किल हो जाता है। यातायात विशेषज्ञों और सामाजिक संगठनों का कहना है कि इससे दुर्घटना पीडि़तों को न्याय मिलने में परेशानी हो सकती है और कानून व्यवस्था के सामने भी चुनौती खड़ी होती है।
लो-स्पीड की आड़ में तेज रफ्तार
सडक़ परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के अनुसार जिन इलेक्ट्रिक स्कूटरों की अधिकतम गति 25 किलोमीटर प्रति घंटा और मोटर क्षमता 250 वॉट तक होती है, उन्हें मोटर वाहन श्रेणी में शामिल नहीं किया जाता। ऐसे वाहनों के लिए ड्राइविंग लाइसेंस, रजिस्ट्रेशन और बीमा अनिवार्य नहीं होता। हालांकि बाजार में कई ऐसे ई-स्कूटर भी उपलब्ध हैं जो निर्धारित सीमा से अधिक गति से चलते हैं, लेकिन लो-स्पीड श्रेणी का लाभ लेकर बिना लाइसेंस और पंजीकरण के सडक़ों पर दौड़ रहे हैं। इससे दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ रहा है।
मासूमों की जिंदगी से खिलवाड़
अभिभावक कम गति सीमा का हवाला देकर इन वाहनों को सुरक्षित मान लेते हैं, लेकिन बिना प्रशिक्षण और सुरक्षा के बच्चे व्यस्त बाजारों और सडक़ों पर वाहन चला रहे हैं। स्कूल समय और शाम के वक्त नाबालिगों का इलेक्ट्रिक स्कूटर चलाना आम नजारा बन चुका है। लोगों ने प्रशासन से सख्त कार्रवाई की मांग की है ताकि बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।
अगर बिना रजिस्ट्रेशन के इलेक्ट्रिक वाहन सडक़ों पर चल रहे हैं तो उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। साथ ही संबंधित डीलर्स पर भी नियमानुसार कदम उठाए जाएंगे।
धर्मपाल सिंह, परिवहन निरीक्षक, बूंदी
यदि नाबालिग वाहन चलाते पाए गए तो उनके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। साथ ही यातायात नियमों के प्रति जागरूकता अभियान भी चलाया जाएगा।
बहादुर सिंह गौड़, यातायात प्रभारी, बूंदी