—एक पौधे से 40 किलो पपीते का अनुमान बूंदी जिले के नोताडा धरावन गांव निवासी महावीर गोस्वामी के बाग में पपीते की बहार आई हुई है। उन्हें एक पौधे से चालीस से पचास किलो पपीते की उम्मीद है।
डेढ़ सौ रुपए प्रति पौध
किसान ने सालभर पहले खेत को समतल किया । बारिश के मौसम में नर्सरी से पौध लाकर उन्हें यहां रोपा। इसकी लागत 150 रुपए प्रति पौध आई। सालभर में इन पौधों में फल लदने लगे हैं।
डेढ़ बीघा में 150 पौधे
किसान ने डेढ़ बीघा में पपीते के 150 पौधे लगाए हैं। ये सालभर के हो चुके हैं और फलों से लकदक हैं। अब इनके पकने का इंतजार है। किसान ने सब्जी में फायदा न होते देख फलों की ओर रुख किया। इसमें अधिक मुनाफे की उम्मीद है।
जैविक तरीकों को अपनाया
किसान का कहना है कि पपीते को जैविक तरीके से उत्पादित किया गया है। इससे रासायनिक खाद व कीटनाशकों पर व्यय नहीं हुआ। समय—समय पर पानी दिया। इसके अलावा देसी खाद डाली है। लू और पाला दोनों पपीते की फसल को काफी नुकसान पहुंचाता है। इसकी खेती के लिए 6.5-7.5 पीएच मान वाली हल्की दोमट या दोमट मिट्टी पर की जाती है।
मनीष बैरागी — नोताडा