शहर में बुधवार को दूसरे दिन निकली कजली तीज माता की सवारी में लोक संस्कृति के नजारे देखने को मिले। दूसरे दिन बुधवार को सवारी में पहले दिन से दो गुणा ज्यादा दर्शक उमड़े रहे। मार्ग में सड$कों से लेकर छतें तक दर्शकों से अटी रही।
नैनवां . शहर में बुधवार को दूसरे दिन निकली कजली तीज माता की सवारी में लोक संस्कृति के नजारे देखने को मिले। दूसरे दिन बुधवार को सवारी में पहले दिन से दो गुणा ज्यादा दर्शक उमड़े रहे। मार्ग में सडकों से लेकर छतें तक दर्शकों से अटी रही।विभिन्न नजारों से सजी झांकियां तो ढोल की थाप पर लोकगीतों के साथ चकरी नृत्य, घोड़ी नृत्य, लोकगीतों के स्वर पर ठुमके लगाकर नृत्य करते चल रहे ग्रामीण लोक कलाकारों की टोलियां कजली तीज माता की सवारी का आकर्षण बने रहे। शिक्षण संस्थाओं द्वारा प्रस्तुत विभिन्न विधाओं की झांकियां भी प्रमुख आकर्षण बनी रही। बाहर से आए लोक कलाकारो के विभिन्न स्वांग भी अलग ही ²श्य बने रहे। एक दर्जन बैंड भजनो व लोकगीतो की धुनें बरसाते चल रहे थे।
कनकसागर पर किया वन विहार
कजली तीज माता को एक महिला सिर पर रखकर चल रही थी। पालिकाध्यक्ष सरिता नागर, कार्यवाहक अधिशासी अधिकारी जयप्रकाश शर्मा, पार्षद भूपेंद्र साहू, जितेंद्र बैरवा, सलीम मोहम्मद, दिनेश पांडेय, अमृतराज मीणा, राजू चौधरी सहित कस्बे के प्रमुख लोग साथ चल रहे थे। नगरपालिका कार्यालय से सवारी प्रारम्भ होकर देइपोल चुंगी नाका, बूंदी रोड, भगतङ्क्षसह सर्किल होती हुई रात को सवारी कनकसागर तालाब की पाल पर पहुंची तो पाळ और गढपोल दरवाजे की छत व परकोटा लोगों से अटे रहे। तीज माता की वन विहार व पूजन की रस्म अदा की गई। उसके बाद इसी मार्ग से होती हुई वापस नगरपालिका कार्यालय पर पहुंची जहां पर दो दिवसीय कजली तीज महोत्सव का समापन हुआ।
पहली बार परकोटे के बाहर निकली सवारी
शहर में जब से तीज की सवारी निकालने की परम्परा शुरू हुई तो दूसरे दिन भी परकोटे के अंदर ही निकाली जाती रही है। पहली बार दशकों से चली आ रही परम्परा टूटी है। नालियों का पानी नींव में जाने से सदर बाजार में दुकानें जर्जर होने से नगरपालिका को दूसरे दिन निकलने वाली तीज की सवारी के प्रारम्भ होने के साथ ही सवारी का मार्ग भी बदलना पड़ गया। जब से नैनवां में तीज की सवारी निकालने की परम्परा शुरू हुई तब से दूसरे दिन सवारी गढ़ चौक से प्रारम्भ होकर परकोटे के अंदर ही सदर बाजार, चारभुजा मन्दिर, दपोला, गढपोल दरवाजा से होती हुई कनकसागर तालाब पहुंचती रही है।