बूंदी

राजस्थान के इस गांव में लड़की की शादी करने से कतराते हैं लोग, वजह जान रह जाएंगे हैरान

राजस्थान में एक ऐसा गांव भी हैं, जहां आजादी के वर्षों बाद भी लोग नदी का गंदा पानी पीने को मजबूर है। हालत यह है कि यहां विवाह के लिए आने वाले लोग पेयजल समस्या देख कर वापस लौट जाते है।
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Apr 14, 2024
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बूंदी। राजस्थान में एक ऐसा गांव भी हैं, जहां आजादी के वर्षों बाद भी लोग नदी का गंदा पानी पीने को मजबूर है। इतना ही नहीं, पानी की चक्कर में इस गांव में लड़की की शादी करने से भी लोग कतराते हैं। बूंदी जिले के पचीपला गांव के लोग दिन की शुरुआत के साथ ही प्लास्टिक की जरीकेन को चेन से बाइक पर बांधकर नदी पर पहुंचते हैं और परिवार के लिए पानी का इंतजाम करते हैं। घर ले जाकर इस पानी को छानकर पिने के काम लेते हैं।

हालत यह है कि यहां विवाह के लिए आने वाले लोग पेयजल समस्या देख कर वापस लौट जाते है। सुविधा सम्पन्न परिवारों के तो फिर भी विवाह आसानी से हो जाते है, गरीब घरों में रिश्ते तक होने में पेयजल संकट बाधा बन जाता है। रैबारपुरा ग्राम पंचायत के पचीपला गांव में वैसे तो सालभर ही पानी की समस्या रहती है। इस गांव में पीने लायक पानी नहीं होने के कारण यहां के लोगों को गांव से करीब एक किमी दूरी पर निकल रही मेज नदी का पानी लाना मजबूरी बनी हुई है।

गांव में लगे हैण्डपम्पों का पानी फ्लोराइड युक्त है, जो पीने लायक नहीं है। चाय बनाते हैं तो पानी डालने पर दूध फट जाता है। कपड़े पर साबुन में झाग नहीं आता है। इस वजह से नहाने के लिए नदी पर जाना पड़ता है तथा पीने के लिए वहां से पानी लाना पड़ता है। ग्रामीण वर्षों से इस समस्या के समाधान की मांग करते आ रहे हैं लेकिन आश्वासन ही मिला पाता है, समाधान नहीं।

पचीपला गांव के निकट बनी मेज नदी की पुलिया पर आमतौर पर रोजाना सुबह शाम पानी भरने व नहाने धोने वालों का जमघट लगा नजर आता है। कोई बाइक पर प्लास्टिक की जरीकेन बांधकर तो कोई सिर पर बर्तन रखकर पानी ले जाते हुए नजर आता हैं। ग्रामीण भंवर सिंह हाड़ा ने बताया की गांव में एक कुएं पर सरकारी ट्यूबवेल से पानी की सप्लाई तो होती है, लेकिन खारा होने के चलते उसे पीने में काम नहीं ले सकते। कई बार तो गांव में किसी की सगाई करने मेहमान आ जाए और उनको पानी की इस समस्या का पता चल जाए तो दोबारा वापस नहीं आते हैं।

Published on:
14 Apr 2024 10:48 am