बूंदी

जिले के सबसे बड़े अस्पताल की ऑक्सीजन भिवाड़ी पर निर्भर, तीनों प्लांट बंद

प्रदेश में कोरोना ने फिर से दस्तक दे दी है। जिले के समीपवर्ती जिलों में भी कोरोना के केस सामने आए है, लेकिन बूंदी का जिला अस्पताल अभी बीमारी से जंग लडने के लिए तैयार नहीं है।

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Jun 14, 2025
बूंदी जिला अस्पताल परिसर स्थित ऑक्सिजन प्लांट।

बूंदी. प्रदेश में कोरोना ने फिर से दस्तक दे दी है। जिले के समीपवर्ती जिलों में भी कोरोना के केस सामने आए है, लेकिन बूंदी का जिला अस्पताल अभी बीमारी से जंग लडने के लिए तैयार नहीं है। केंद्र और राज्य सरकार की ओर से अस्पताल परिसर में बनवाए गए अलग-अलग तीन ऑक्सीजन प्लांट काफी समय से बंद पड़े हैं। जबकि पूर्व में कोरोना के दौरान ऑक्सीजन की किल्लत से चिकित्सा प्रशासन को जुझना पड़ा था।

इस संबंध में उच्चाधिकारियों को समय समय पर अवगत भी कराया जा रहा है, लेकिन अभी तक किसी ने इनकी सुध नहीं ली है। जिला अस्पताल में तीन ऑक्सीजन जनरेशन प्लांट लगे हुए है, जिसमें 330 एलपीएम (लीटर पर मिनट), 160 एलपीएम और 1000 एलपीएम के है। इनमें से एक हजार एलपीएम वाला प्लांट दो साल से, 330 एलपीएम वाला प्लांट साढ़े तीन माह से एवं 160 एलपीएम वाला प्लांट एक साल से बंद है।

हर बार सवा लाख खर्च
अस्पताल परिसर में एक स्थान पर 3 और जनाना अस्पताल में एक लिक्विड मेडिकल ऑक्सीजन प्लांट (1000 एलएमओ) बनाया हुआ है। इसमें फिलहाल भिवाड़ी से ऑक्सीजन मंगवाई जा रही है, जिसमें एक बार में करीब सवा लाख रुपए का खर्चा आता है। इस प्लांट से चिकित्सालय के विभिन्न वार्डों में बेड तक ऑक्सीजन सप्लाई की जाती है। इस प्लांट को एक बार भरने के बाद करीब डेढ़ माह तक आपूर्ति हो जाती है।

कोटा से छोटे सिलेण्डर मंगवाए
तीनों प्लांट के बंद होने पर बूंदी जिला अस्पताल कोटा पर निर्भर हो गया है। यहां मरीजों को आपातकालीन स्थिति में छोटे ऑक्सीजन गैस सिलेण्डर की आवश्यकता पड़ती है। फिलहाल इनको कोटा से भर कर मंगवाया जा रहा है। आगामी समय के लिए टोंक से मंगवाए जाने के टेण्डर किए गए है।

सरकार को भेजा हुआ है पत्र
अस्पताल अधीक्षक डॉ. प्रभाकर विजय ने बताया कि यह बात सही है कि पूरे देश में कोविड के मरीज बढ़ रहे है। प्रदेश में भी मामले सामने आए हैं. इसे मद्देनजर रखते हुए कोविड की बंद पड़ी प्लांट को फिर शुरू करवाने के लिए सरकार को पत्र भेजा हुआ है. हमारी मशीनरी ऑटोफिशियल लैब सुसज्जित है। कोरोना की सैंपलिंग के लिए रिजेंट चाहिए होते हैं, वह मौजूद नहीं हैं. इसके लिए भी सरकार को लिखा है. जहां तक बंद पड़े तीन ऑक्सीजन प्लांट की है तो दो तो काफी समय से बंद पड़े हैं, जबकि एक अभी 4 से 5 माह पूर्व ही बंद हुआ है. हमने इससे संबंधित एजेंसी को पत्र भेजा हुआ है. मामला जोन डायरेक्टर के भी संज्ञान में है. जल्द बंद पड़े ऑक्सीजन प्लांट को शुरू करवाने के प्रयास हैं, इसमें लापरवाही जैसी कोई बात नहीं है।

हर माह हो रही मॉकड्रिल
अस्पताल में तीनों प्लांट बंद होने के बाद भी हर माह इनकी मॉकड्रिल की जाती है। तथा मॉकड्रिल में परखा जाता है कि इसमें देखा जाता है कि प्लांट चालू है या नहीं। चिकित्सा अधिकारियों को पता होने के बाद भी हर माह मॉकड्रिल की खानापूर्ति की जा रही है।

Updated on:
14 Jun 2025 05:11 pm
Published on:
14 Jun 2025 05:10 pm
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