
गुढ़ानाथावतान . हाड़ौती के जंगलों में बाघों का कुनबा बढ़ाने की कवायद अब दूसरे चरण में पहुंच गई है। मध्यप्रदेश के बाद अब महाराष्ट्र के ताड़ोबा-अंधारी और पेंच टाइगर रिजर्व से एक-एक बाघिन राजस्थान लाई जाएगी। इन्हें मुकुंदरा हिल्स और रामगढ़ विषधारी टाइगर रिजर्व में शिफ्ट करने की तैयारियां शुरू हो चुकी हैं। दोनों राज्यों के उच्च अधिकारियों की स्वीकृति मिलते ही बाघिनों को चिह्नित कर स्थानांतरण की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। वन विभाग को उम्मीद है कि दीपावली के बाद दोनों बाघिनें हाड़ौती के जंगलों में पहुंच सकती हैं। फिलहाल दोनों टाइगर रिजर्व में 15 बाघ-बाघिन हैं।
इस पहल से दोनों टाइगर रिजर्व में बाघों की आबादी बढऩे के साथ उनके आनुवंशिक आधार को मजबूत करने की उम्मीद है। पूर्व में मध्यप्रदेश के पेंच और बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व से लाई गई एक-एक बाघिन अब यहां के वातावरण में ढलकर अपनी टेरेटरी बना चुकी है। ऐसे में महाराष्ट्र से आने वाली बाघिनें इस संरक्षण अभियान को आगे बढ़ाएंगी।
राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण की स्वीकृति के बाद हाड़ौती के दोनों टाइगर रिजर्व में दूसरे राज्यों से पांच बाघिनें लाने की योजना पर काम चल रहा है। इसके तहत दो बाघिनें मध्यप्रदेश से लाई जा चुकी हैं। अब दूसरे चरण में महाराष्ट्र के ताड़ोबा-अंधारी और पेंच से एक-एक बाघिन लाई जाएगी। अंतिम चरण में मध्यप्रदेश के कान्हा टाइगर रिजर्व से एक और बाघिन रामगढ़ विषधारी में शिफ्ट करने की योजना है।
बाघिनों को सुरक्षित तरीके से बसाने के लिए दोनों टाइगर रिजर्व में सॉफ्ट रिलीज एनक्लोजर तैयार हैं। इनके गले में रेडियो कॉलर लगाए जाएंगे, ताकि जंगल में उनकी गतिविधियों, क्षेत्र विस्तार और अनुकूलन पर नजर रखी जा सके। स्थानांतरण के बाद बाघिनों को कुछ समय तक सॉफ्ट एनक्लोजर में रखा जाएगा। इसके बाद परिस्थितियों के अनुकूल होने पर खुले जंगल में छोड़ा जाएगा। पिछले चरण में मध्यप्रदेश से बाघिनों को अधिक दूरी के कारण हेलीकॉप्टर से लाया गया था। इस बार भी स्थानांतरण की प्रक्रिया संबंधित अधिकारियों की स्वीकृति और तय प्रोटोकॉल के अनुसार पूरी की जाएगी।
इस अंतरराज्यीय स्थानांतरण का उद्देश्य केवल बाघों की संख्या बढ़ाना नहीं, बल्कि उनकी आनुवंशिक विविधता को मजबूत करना भी है। अलग-अलग टाइगर रिजर्व से बाघिनें आने पर भविष्य में प्रजनन के जरिए जीन प्रवाह बढऩे की संभावना है। इससे राजस्थान के बाघों की नई पीढ़ी में आनुवंशिक विविधता को बढ़ावा मिल सकता है। बाघों के स्थानांतरण अभियान के साथ दोनों टाइगर रिजर्व में शिकार प्रजातियों की उपलब्धता बढ़ाने पर भी काम किया जा रहा है। इसके तहत दिल्ली के डियर पार्क से 400 चीतल (चित्तीदार हिरण) लाने की प्रक्रिया शुरू की गई है।
मध्यप्रदेश के बाद अब महाराष्ट्र के ताड़ोबा-अंधारी और पेंच टाइगर रिजर्व से एक-एक बाघिन राजस्थान के रामगढ़ विषधारी और मुकुंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व में लाने की तैयारी है। दोनों राज्यों के उच्च अधिकारियों की स्वीकृति मिलते ही बाघिनों को चिह्नित कर शिफ्ट किया जाएगा।
सुगनाराम जाट, फील्ड डायरेक्टर, रामगढ़ विषधारी टाइगर रिजर्व, कोटा