बूंदी महोत्सव के तीसरे व अंतिम दिन सोमवार को विदेशी सैलानियों का दल जब पोटरी विलेज ठीकरदा पहुंचा, तो वे यहां की ग्रामीण संस्कृति और अपनेपन को देखकर अभिभूत हो गए। विलेज सफारी के तहत हुए इस दौरे का उद्देश्य उन्हें राजस्थान की जड़ों और भारत की प्राचीन सभ्यता से रूबरू कराना था।
बूंदी. बूंदी महोत्सव के तीसरे व अंतिम दिन सोमवार को विदेशी सैलानियों का दल जब पोटरी विलेज ठीकरदा पहुंचा, तो वे यहां की ग्रामीण संस्कृति और अपनेपन को देखकर अभिभूत हो गए। विलेज सफारी के तहत हुए इस दौरे का उद्देश्य उन्हें राजस्थान की जड़ों और भारत की प्राचीन सभ्यता से रूबरू कराना था। ठीकरदा की मिट्टी की महक, कच्चे मकानों की कलात्मक बनावट और प्राचीन मंदिरों की वास्तुकला ने विदेशी ’पावणों’ का मनमोह लिया। विलेज सफारी को पर्यटन कार्यालय से मुख्य कार्यकारी अधिकारी जिला परिषद रवि वर्मा ने झंडी दिखाकर रवाना किया। ठीकरदा गांव में प्रवेश करते ही सैलानियों का स्वागत ’अतिथि देवो भव:’ की परंपरा से किया गया। संग्रहालय सहायक जगदीश वर्मा की अगुवाई में ग्रामीण महिलाओं ने पर्यटकों के माथे पर तिलक लगाया और उन्हें पुष्प मालाएं पहनाई। इस आत्मीय स्वागत ने पर्यटकों और ग्रामीणों के बीच की भाषाई दूरी को पल भर में मिटा दिया। मशक बैंड की धुन और कच्छी घोड़ी के शानदार नृत्य के साथ उन्हें पूरे गांव का भ्रमण कराया गया। कार्यक्रम में बीकानेर से आए कलाकारों ने अपनी प्रस्तुतियों से समां बांध दिया। पर्यटक गाइड संदीप शर्मा ने सैलानियों को ग्रामीण सभ्यता की जानकारी से कराया रूबरू। संचालन राजकुमार दाधीच ने किया। पर्यटन अधिकारी प्रेमशंकर सैनी ने आभार जताया।
गांव के हुनर से रूबरू हुए सैलानी
भ्रमण के बाद सैलानी सीधे गांव के हुनर से रूबरू हुए। स्थानीय कुम्भकार हनुमान प्रजापत ने विदेशी पर्यटकों को चाक पर मिट्टी को आकार देने के गुर सिखाए। उन्होंने फ्लॉवर पॉट, दीपक और मटकी बनाना सिखाया। यह कला देखकर अमेरिका के एडम खुद को रोक नहीं पाए और चाक पर हाथ आजमाने बैठ गए। फ्लॉवर पॉट बनाकर एडम खुशी से झूम उठे।