बूंदी

अब दादा-दादी भी जाएंगे क्लास, राजस्थान में 35 लाख लोगों को साक्षर बनाने की तैयारी

राजस्थान में आने वाले दिनों में अब वृद्धजन भी पढ़ाई करते हुए नजर आएंगे। 15 वर्ष या इससे अधिक आयु वर्ग के 35 लाख असाक्षरों को साक्षर बनाने के लिए 'उल्लास नवभारत साक्षरता कार्यक्रम' शुरू किया जा रहा है।
2 min read
• •
May 15, 2026
Rajasthan Government Literacy Program
योजना की जानकारी देते लोक कलाकार (फोटो: पत्रिका)

Rajasthan News: राजस्थान में आने वाले दिनों में अब दादा-दादी की उम्र वाले लोग भी पढ़ाई करते हुए नजर आएंगे। 15 वर्ष या इससे अधिक आयु वर्ग के 35 लाख असाक्षरों को साक्षर बनाने के लिए ’उल्लास नवभारत साक्षरता कार्यक्रम’ शुरू किया जा रहा है। साक्षरता निदेशालय ने इस पहल के लिए राज्य के 33 जिलों को लक्ष्य आवंटित किया है। इनमें 8 लाख 75 हजार पुरुष और 26 लाख 25 हजार महिलाएं शामिल हैं, जिन्हें अक्षर ज्ञान सिखाया जाएगा।

असाक्षरों को पढ़ाई के बाद परीक्षा भी देनी होगी और उत्तीर्ण होने पर उन्हें प्रमाण पत्र भी मिलेंगे। इस संबंध में साक्षरता निदेशक महेंद्र कुमार खींची ने आदेश जारी किए हैं। कार्यक्रम का उद्देश्य औपचारिक शिक्षा से वंचित रहे बुजुर्गों को साक्षरता से जोडक़र आत्मनिर्भर बनाना और समाज में उनकी सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करना है।

इस मुहिम के तहत, घर-घर जाकर ऐसे लोगों की पहचान की जा रही है, जो किसी कारणवश औपचारिक शिक्षा प्राप्त नहीं कर पाए। सर्वे के आधार पर तैयार सूची के बाद असाक्षरों को साक्षरता से जोडऩे के लिए ठोस रणनीति बनाई जाएगी। प्रदेश में सर्वाधिक 3 लाख 99 हजार असाक्षरों को जयपुर में साक्षर किया जाएगा, जबकि सबसे कम 11 हजार 500 जैसलमेर में और बूंदी में 64 हजार 100 असाक्षरों को साक्षर बनाने का लक्ष्य है।

उल्लास में अब भी 33 जिले चल रहे

प्रदेश में 41 जिले होने के बावजूद अब भी उल्लास कार्यक्रम के तहत 33 जिलों में ही यह कार्यक्रम चल रहा है, इस वर्ष के लक्ष्य भी 33 जिलों के ही जारी किए गए है। ऐसे में शेष 8 जिले में अब तक यह कार्यक्रम शुरू नहीं हो पाया है।

वित्तीय साक्षरता आवश्यक

कार्य के दौरान बुजुर्ग न केवल पढऩा-लिखना सीखेंगे, बल्कि जीवनोपयोगी कौशल भी हासिल कर पाएंगे। इस कार्यक्रम के तहत स्थानीय युवाओं और शिक्षित नागरिकों को स्वयंसेवी शिक्षक के रूप में जोड़ा जा रहा है। ये स्वयंसेवी शिक्षार्थी बुनियादी शिक्षा के साथ-साथ वित्तीय साक्षरता और डिजिटल जागरूकता की जानकारी भी देंगे, ताकि वे आधुनिक समाज की मुख्यधारा से जुड़ सकें।

मोबाइल एप से डेटा संग्रह

अभियान के तहत गठित सर्वेक्षण दल में स्थानीय शिक्षक, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता शामिल किए गए है। जो घर-घर जाकर मोबाइल एप के माध्यम से लाभार्थियों का नाम, आयु और आधार विवरण दर्ज कर रहे हैं। साथ ही क्षेत्रवार साक्षरता केंद्रों के लिए उपयुक्त स्थानों का चयन भी किया जा रहा है।

साक्षरता दर में होगी वृद्धि

जिले में साक्षरता कार्यालय के सहायक परियोजना अधिकारी अंकित गौतम के अनुसार अभियान के दौरान कई बुजुर्ग महिलाएं और श्रमिक वर्ग के लोग भी साक्षर बनने की इच्छा जता रहे हैं। इसमें ऑफलाइन व ऑनलाइन दोनों माध्यमों से कक्षाएं संचालित की जाती है। प्रत्येक शिक्षार्थी के लिए 6 माह में 200 घंटे का शिक्षण निर्धारित किया गया है। कक्षाओं का समय शाम 5 से 8 बजे के बीच रखा जाता है, ताकि श्रमिक वर्ग भी आसानी से जुड़ सके।

नवभारत साक्षरता कार्यक्रम के अंतर्गत जिले को 64 हजार 100 असाक्षरों को साक्षर बनाने का लक्ष्य प्राप्त हुआ है। जिले के पांचों ब्लॉकों में लक्ष्य आवंटित करते हुए डिजिटल साक्षरता, विधिक साक्षरता सहित मोबाइल के माध्यम से सीखने जैसे उपक्रमों से जिले में साक्षरता के लक्ष्यों को हासिल करने हेतु प्रयासरत हैं।
योगेश कुमार शर्मा, जिला साक्षरता अधिकारी, बूंदी

Updated on:
15 May 2026 12:15 pm
Published on:
15 May 2026 12:14 pm