
Burhanpur Blood Bank. . जिला अस्पताल के सरकारी ब्लड बैंक में ब्लड का संकट खड़ा हो गया। ब्लड बैंक में 40 यूनिट ब्लड की स्टॉक में शेष बचा है। ऐसे में एनीमिया पीडि़त गर्भवति महिलाओं के साथ थैलेसीमिया पीडि़त बच्चों और दुर्घटना के समय घायलों को लगने वाला ब्लड समय पर नहीं मिलने से जान को खतरा बढ़ गया। ब्लड बैंक में डिमांड आने पर स्वैच्छिक रक्ताओं से संपर्क कर इमरजेंसी में ब्लड की व्यवस्था की जा रही है।
ब्लड बैंक में हर माह एक हजार यूनिट से अधिक ब्लडकी खपत हो रही है।जबकि डोनर नहीं मिलने से ब्लड की कमी अधिक हो गई।जिसका मुख्य कारण एक माह से रक्तदान शिविर आयोजित नहीं हुए। जबकि गर्भवति महिलाओं के साथ थैलेसीमिया पीडि़त बच्चों की संख्या और ब्लड अधिक लगने से स्टॉक खत्म हो रहा है।जिससे ब्लड की आपूर्ति न होने से जरूरतमंदों लोगों को परेशान होना पड़ रहा। आलम यह है कि सोशल मीडिया पर मैसेज और डिमांड फॉर्म वायर कर युवाओं के साथ सामाजिक संस्थाओं को रक्तदान के लिए बुलाया जा रहा है।ब्लड बैंक में ए पॉजिटिव, बी पॉजिटिव के साथ एबी पॉजिटिव और ओ पॉजिटिव, निगेटिब ब्लड की मांग अधिक है।
जिला अस्पताल में ग्रामीण औश्र आदिवासी क्षेत्रों से डिलीवरी के लिए पहुंच रही महिलाओं के शरीर में खून की कमी अधिक देखन को मिल रही है।एक से दो यूनिट शरीर में ब्लड होने पर सिजेरियन एवं नॉर्मल डिलीवरी के लिए एक महिला को तीन से चार यूनिट ब्लड लग रहा है। जबकि यह हालात प्रतिदिन प्रसूव के लिए पहुंच रही महिलाओं के सामने बन रहे है। एनीमिक होने और प्रसव के बाद ब्लीडिंग ज्यादा होने पर तत्काल रक्त की जरूरत पड़ती है। इसके अलावा दुर्घटना में घायल हुए लोगों को भी खून की आवश्यकता होती है। गांव से आए लेागों के पास डोनर साथ नहीं होने से जिंदगी बचाने के लिए स्टॉक में रखा ब्लड देना पड़ता है। शहर में 18 थैलेसीमिया पीडि़तों को भी हर माह ब्लड देना पड़ रहा है।
ब्लड की कमी होने के साथ डोनर नहीं मिलने पर अब सामजिक संगठन एवं जिला अस्पताल के माध्यम से लोगों को ब्लड के लिए जागरुक कर डिमांड फार्म सोशल मीडिया पर वायरल कर लोगों के नंबर भी शेयर किए जा रहे है।जिससे जानकारी मिलने पर डोनर सीधे अस्पताल पहुंचकर रक्तदानक र रहे है।शहर के कई युवा ऐसे हैं जो चौबीस घंटे रक्तदान के लिए उपलब्ध रहते हैं।
ब्लड बैंक में ब्लड की कमी को दूर करने के लिए पूर्व में कलेक्टर द्वारा विभागीय स्तर पर शिविरों का आयोजन कर अफसर, कर्मचारियों को भी रक्तदान करने के लिए कहा गया था। जिससे काफी हद तक ब्लड की कमी दूर होने के साथ सामाजिक संगठन के लोग भी सामने आए थे। जबकि निजी अस्पताल में भर्ती मरीजों के लिए भी ब्लड की व्यवस्था सरकारी अस्पताल से होने से ब्लड बैंक पर दोगुना दबाव बढ़ गया है।