
- अमृत योजना में रेणुका मंदिर पार्क डेढ़ करोड़ का पार्क
बुरहानपुर. प्रधानमंत्री आवास योजना के ई-गृह प्रवेशोत्सव में खासी धूम रही। जिन हितग्राहियों को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से बात करने का मौका देना था, उन्हें दूल्हा-दुल्हन की तरह सजाया गया। लेकिन मौका केवल आलमगंज की रुकमा बाई को मिला। जिसने पीएम से कहा कि मेरा मकान टीन टप्पर का था, आपने मेरे सपने को साकार कर दिया। यह बात होने के बाद सांसद नंदकुमारसिंह चौहान कई समस्याओं से घिर गए, कोई मकान की किस्त न मिलने की समस्या बता रहा था, तो किसी ने रोजगार की समस्या रखी।
शनिवार दोपहर गुर्जर भवन में ई-गृह प्रवेशोत्सव का आयोजन किया गया। १ बजे से कार्यक्रम की शुरुआत की गई। ३.१५ पर इंदौर आए प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने रिमोट दबाकर बुरहानपुर में मकानों का लोकार्पण किया और डेढ़ करोड़ से बनने वाले रेणुका पार्क का भूमिपूजन किया। इसके बाद प्रदेश के १८ जिलों में लाइव लोगों से बातचीत की। पहले नंबर पर छिंडवाड़ा के लोगों से बात करने के बाद दूसरे नंबर पर बुरहानपुर के हितग्राहियों से पीएम ने बात की।
और सब्जी बेचने वाला महापौर बन गया
राजनीति में एक नई क्रांति आई और चाय बेचने वाला एक इंसान देश का प्रधानमंत्री बन गया। इसके बाद देश की राजनीति ने करवट लिया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बनने के बाद यह भी एक इत्तेफाक की बात है कि चाय बेचने वाला प्रधानमंत्री बना, हल बख्खर चलाने वाला सीएम बन गया और बुरहानपुर में सब्जी बेचने वाला महापौर बन गया। आज इस शहर में इतिहास रचा जा रहा है कि झोपडिय़ों में रहने वाले गरीब, टप्पर में रहने वाले जिनके कच्चे घर थे, आज उन्हें पक्के मकान मिल गए। इस योजना का लाभ देने में कोई मजहब नहीं देखा, जात-पात नहीं देखी न ही कोई पार्टी देखी।
आज गरीबों को उनका हक मिला
महापौर अनिल भोसले ने कहा कि यह हमारा सौभाग्य है कि आज शहर में बने गरीबों के मकानों का गृह प्रवेश प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हाथों हो रहा है। वास्तव में आज गरीबों को उनका हक मिला है। निगम की ओर से लगातार गरीबों के मकान बनते जाएंगे, अभी यह शुरुआत है।
खुद की ब्रांडिंग करते दिखे नेता-अफसर
कार्यक्रम में सांसद नंदकुमारसिंह चौहान, अफसर खुद की ब्रांडिंग भी करते नजर आए। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से बात करने वाली महिला के पास आकर सांसद और महापौर आकर खड़े हो जबकि सांसद मंच पर बैठे हुए थे। पीएम से महिला की बात होने के बाद कार्यक्रम का पूरा रूप बदल गया। सांसद समस्याओं से घिर गए। इसके बाद दिव्यांगों को बेटरी से चलने वाले ट्राइसिकल दी गई।