बुरहानपुर के बर्तन कारोबारी आकाश माहेशव्री के पास 1300 ई. से लेकर ब्रिटिश और मुगलकालीन सिक्कों का कलेक्शन मौजूद है। इनमें 800 साल पुराने सिक्के तक इनमें शामिल।
बुरहानपुर. मध्य प्रदेश के बुरहानपुर में रहने वाले बर्तन कारोबारी आकाश माहेश्वरी प्राचीन काल के नायाब सिक्कों का खास कलेक्शन रखते हैं। बता दें कि, उनका ये शौक विरासती तौर पर उन्हें मिला हुआ है। उनके दादा मदनलाल और पिता विजय माहेश्वरी भी प्राचीन सिक्के, नोट और एंटीक्स का कलेक्शन रखने के शौकीन थे। आकाश भी उन्हीं से विरासत में मिले ये प्राचीन सिक्के और एंटीक्स संभालकर रखे हुए हैं। अपने दादा और पिता से विरासत में मिली चीजों के साथ साथ आकाश का भी इन एंटीक्स का खास कलेक्शन हैं। बता दें कि, आकाश के पास डब्बू पैसे से लेकर कुशान के साथ साथ औरंगजेब काल तक में चलने वाले सिक्के भी मौजूद हैं।
बता दें कि, मुख्य रूप से आकाश के पास मुगलकालीन, ब्रिटिशकालीन, जाॅर्ज क्वाइन समेत वर्तमान में चलने वाले नए नोटों का खास कलेक्शन है। मौजूदा समय तो 10 रुपए के नए नोट की गड्डी बैंकों के पास तक नहीं मिलती, लेकिन आकाश के पास इसका भी कलेक्शन है।
आकाश के पास प्राचीन काल के सिक्के
आकाश के अनुसार, उन्होंने 1300 ईसवीं से लेकर अबतक के सिक्कों का संग्रहण कर रखा है। कुछ सिक्के ब्रिटिशकाल और मुगलकाल से भी पहले के हैं। उनके पास ऐसे करीब एक लाख सिक्के हैं। इसमें चांदी, तांबे, पीतल और राम दरबार के टोकन के अलावा संत करतारदास के टोकन भी मौजूद हैं।
बुरहानपुर में ही क्यों है यह नायाब संग्रहण
आपको ये भी बता दें कि, चौदह से लेकर अठारहवीं शताब्दी के बीच बुरहानपुर में टकसाल हुआ करती थी। इसमें सोने, चांदी, तांबा, पीतल आदि धातुओं के कई तरह के सिक्के ढाले जाते थे। ऐसा कहा जाता है कि, इन सिक्कों को खास मौकों पर जनता में बांटा जाता था। यहां की टकसाल में ढाले गए सोने के सिक्कों की शुद्धता देशभर में मशहूर थी। इस टकसाल में कई मुगल बादशाहों और शासकों द्वारा जन्मदिन, शादी की सालगिरह, नगर में प्रथम प्रवेश, किसी युद्ध में विजय के बाद शौर्य अवसर के साथ साथ अन्य खास मौकों पर सिक्के ढलवाए जाते थे। उन्हीं सिक्कों को आकाश ने आज भी सहेजकर रखा हुआ है।
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