
बुरहानपुर. कोरोना वायरस पूरी दुनिया के लिए मुसीबत बनकर आया है। इसके बावजूद कोरोनाजनित यह संकट कई संदेश भी दिया है। इसमें सबसे महत्वपूर्ण संदेश पर्यावरण को लेकर है। दो महीने से अधिक समय तक लगे लॉकडाउन के दौरान तमाम समस्याएं सामने आई हैं, उस दौरान पर्यावरण सुधार के सुखद संदेश भी आए हैं। पहले जहां प्रदूषण बोर्ड की रिपोर्ट में पर्यावरण बिगडऩे के मामले में बुरहानपुर टॉप फाइव में रहता था, अब बुरहानपुर में हरियाली और जल समस्या नहीं दिखी। हालांकि ताजा रिपोर्ट के आंकड़े अभी जारी नहीं हुए हैं, लेकिन मौजूदा हालात पर्यावरण सुधार के दिखे हैं।
लॉकडाउन ने हमें पर्यावरण सुधार की राह दिखाई है और हमें उससे सीखकर आगे के लिए पर्यावरण सुधार की कार्य योजना बनानी होगी। दो माह तक लगातार जहां बुरहानपुर में न फैक्ट्रियों का धुआं निकला न वाहनों की गाड़ी से निकलने वाला धुआं हवा में घुला। पानी की उपयोगगिता भी घटी है। इससे साफ नजर आया कि इस साल गर्मी में ताप्ती नदी और झील भी नहीं सूखी। यहां तक पेड़-पौधों पर भी हरियाली नजर आई।
पहले ऐसे थे हालात
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड हर तीन माह की रिपोर्ट जारी करता है। 2018 में 51 जिलों की अप्रैल माह की वायू प्रदूषण की रिपोर्ट में बिगड़े प्रदूषण में तीसरे स्थान पर था। शहर में वायू प्रदूषण का स्तर 130.24 एक्यूआई (एयर क्वॉलिटी इंडेक्स) से बढ़कर 146.90 पर आ गया था, जो बोर्ड के मापदंडों के अनुरूप प्रदूषित की श्रेणी में आता है। शहर की हवा प्रदेश के अन्य बड़े शहरों की तुलना में खराब पाई गई। 2019 में और ज्यादा हालत बिगड़े, हालाकि इस साल लॉकडाउन के कारण बोर्ड मार्च-अप्रैल का पर्यावरण का आंकलन नहीं कर सका जिस कारण बुरहानपुर का उल्लेख नहीं है।
यह होता है एक्यूआई
एयर क्वॉलिटी इंडेक्स (एक्यूआई) में हवा की गुणवत्ता की 6 श्रेणियां है। इसे अच्छी, संतोषजनक, थोड़ा प्रदूषित, खराब, बहुत खराब और गंभीर में बांटा गया है। एक्यूआई निकालने के लिए विभाग पीएम 10 (हवा में धूल के कण), पीएम 2.5 नाइट्रोआक्साइड, सल्फर आक्साइड, ग्राउंड लेवल ओजोन सहित तीन अन्य तत्वों की मानीटरिंग करता है।
वापस शुरू हो गया प्रदूषण
वायु प्रदूषण काफी हद तक घट गया था, लेकिन लॉकडाउन में मिली छूट ने स्थितियों को फिर से खराब करना शुरू कर दिया है। इस पर्यावरण दिवस पर कोरोना से सबक लेते हुए पर्यावरण सहेजने की पहल करनी होगी। जल, वायु व धरती का संरक्षण करना होगा।