
- नर्मदा परिक्रमा और चारों धाम की यात्रा चार साल में पूरी की
- स्वामी नारायण भगवान ने 7 साल में की थी यात्रा
बुरहानपुर. भगवान स्वामी नारायण ने ११ साल की उम्र में ग्रहस्थ जीवन त्याग कर वन विचरण के लिए निकल गए थे, जिन्होंने ७ साल तक पद यात्रा करते हुए २१ हजार किमी की यात्रा पूरी की। इनकी एतिहासिक यात्रा के २२० साल बाद फिर दो संतों ने भगवान के पदचिन्ह पर चलने का बीड़ा उठाया और चार साल में पद यात्रा पूरी की। इसमें एक साल नर्मदा परिक्रमा और तीन साल में चारो धाम की यात्रा पूरी की। यह संत है गुजरात वड़ताल के स्वामी सूर्यप्रकाशदास गुरु कृष्णप्रकाशदास और स्वामी मोहनप्रकाशदास।
४० साल की उम्र में दोनों संतों ने २००७ में यह यात्रा शुरू कर २०१० में इसे पूरा किया। यह यात्रा करने वाले स्वामी सूर्यप्रकाशदास महाराज का पुरुषोत्तम मास के लिए बुरहानपुर के स्वामीनारायण मंदिर में उनका आगमन हुआ। जहां उन्होंने अपनी यात्रा के बारे में सुनाया तो मौजूद भक्त भाव विभोर हो गए। किसी कष्ट और संकट में उन्होंने यह यात्राएं पूरी की।
चार-चार दिन रहे भूखे
स्वामी सूर्यप्रकाशदास ने कहा कि भगवान स्वामी नारायण की यह यात्रा इतनी आसान नहीं थी, जितनी आसानी से हम कह देते हैं कि सात साल उन्होंने पद यात्रा की। यह अनुभव उनके द्वारा यात्रा करने पर पता चला। जिन्हें उस समय २१ हजार किमी की पद यात्रा करने में ७ साल लग गए। आज के समय में हमें यह यात्रा करने में ४ साल लगे, क्योंकि पहले में और अब की परिस्थिति में काफी अंतर आया है। बीच में बड़ा संकट का दौर भी आया जब जंगल ही जंगल चलते-चलते चार-चार दिन भूखे भी रहे।
छपिया से शुरू की थी यात्रा
संतों ने बताया कि उनकी यात्रा भगवान स्वामी नारायण की जन्मस्थली श्रीराम जन्मभूमि अयोध्या के पास स्थित ग्राम छपिया से की गई थी, जहां से भगवान ने पद यात्रा शुरू की थी, वहीं पर उन्होंने भी इसे विराम दिया। यह यात्रा उनके जीवन की यादगार यात्रा रही। उन्होंने इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य विश्व शांति के लिए बताया।