8th Pay Commission Latest News: FNPO ने 8वें वेतन आयोग को मेमोरेंडम सौंपकर डाकिए की बेसिक सैलरी 25,500 से बढ़ाकर 1.12 लाख, फिटमेंट फैक्टर 3.83, सालाना इन्क्रीमेंट 6 फीसदी और पांच प्रमोशन करने की मांग की है।
8th Pay Commission Latest News: एक डाकिया जो रोज धूप में साइकिल चलाकर आपके दरवाजे तक चिट्ठी पहुंचाता है, उसकी बेसिक सैलरी अभी सिर्फ 25,500 रुपये है। फेडरेशन ऑफ नेशनल पोस्टल ऑर्गनाइजेशन यानी FNPO ने 8वें केंद्रीय वेतन आयोग के सामने मांग रखी है कि इसे बढ़ाकर 1,12,000 रुपये किया जाए। सीधे चार गुने से भी ज्यादा। 20 अप्रैल 2026 को FNPO ने अपना मेमोरेंडम आयोग को सौंपा और अब 28 से 30 अप्रैल को नई दिल्ली में आयोग यूनियनों से बात करने वाला है।
7वें वेतन आयोग में फिटमेंट फैक्टर 2.57 था। FNPO ने मांग की है कि इसे 3.83 किया जाए। आसान भाषा में कहें तो यह वो गुणांक है, जिससे पुरानी बेसिक सैलरी को गुणा करके नई तनख्वाह निकाली जाती है। 3.83 का मतलब है कि जो अभी 18,000 रुपये पाता है उसे 69,000 से ज्यादा मिलेंगे। सबसे निचले स्तर यानी लेवल 1 के मल्टी-टास्किंग स्टाफ के लिए न्यूनतम बेसिक पे 69,000 रुपये रखने की मांग की गई है।
यह मांग बरसों की पीड़ा से उठी है। छठे वेतन आयोग से लेकर अब तक सालाना इन्क्रीमेंट 3 फीसदी पर ही अटका है। FNPO का तर्क है कि शहरों में मकान का किराया, इलाज का खर्च और बच्चों की पढ़ाई की फीस जिस रफ्तार से बढ़ रही है, उसके सामने 3 फीसदी इन्क्रीमेंट ऊंट के मुंह में जीरे के बराबर है। महंगाई भत्ता भी इस कमी को पूरा नहीं कर पाता। इसलिए सालाना इन्क्रीमेंट 6 फीसदी करने की मांग की गई है।
नौकरी में तरक्की न हो तो आदमी का हौसला टूट जाता है। FNPO ने MACP स्कीम के तहत मांग की है कि हर डाक कर्मचारी को सेवा काल में कम से कम पांच प्रमोशन मिलने चाहिए। अभी जो व्यवस्था है उसमें तरक्की के मौके बेहद कम हैं और वेतन वृद्धि रुकी रहती है। संगठन का कहना है कि आज के जमाने में डाक विभाग का काम कोई साधारण काम नहीं रहा, कर्मचारी कई तरह के कौशल से काम करते हैं, तो प्रमोशन भी उसी हिसाब से मिलना चाहिए।
घर का किराया भत्ता यानी HRA को लेकर भी FNPO ने ठोस मांग रखी है। X श्रेणी के शहरों में यह बेसिक पे का 40 फीसदी, Y श्रेणी में 35 फीसदी और Z श्रेणी में 30 फीसदी होना चाहिए। अभी यह क्रमशः 27, 18 और 9 फीसदी है। इतना ही नहीं, संगठन ने यह भी कहा है कि जब-जब महंगाई भत्ता बढ़े, HRA भी उसी अनुपात में बढ़ना चाहिए, ताकि असल में जीवनयापन की लागत पूरी हो सके।
यह मांग काफी अहम है। ग्रामीण डाक सेवक यानी GDS को अब तक वेतन आयोग के दायरे से बाहर रखा जाता रहा है। FNPO ने मांग की है कि उन्हें भी 8वें वेतन आयोग में शामिल किया जाए। गांव-गांव तक डाक सेवा पहुंचाने वाले इन कर्मचारियों की अनदेखी कब तक होती रहेगी, यह सवाल संगठन ने जोरदार तरीके से उठाया है।
FNPO ने महिला कर्मचारियों के लिए भी कई जरूरी सुझाव दिए हैं। हर महीने एक यानी साल में 12 मेंस्ट्रुअल लीव, बेहतर चाइल्ड केयर लीव, कार्यस्थल पर क्रेच की सुविधा और महिला संवेदी तैनाती की मांग की गई है। ये छुट्टियां मेडिकल सर्टिफिकेट के साथ मिलनी चाहिए और ये आगे नहीं जुड़ेंगी।
सभी डाक कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को यूनिवर्सल कैशलेस CGHS इलाज मिले, यह भी एक बड़ी मांग है। FNPO ने सुझाव दिया है कि जहां भी एक हजार से ज्यादा केंद्रीय सरकार के कर्मचारी और पेंशनर रहते हों, वहां जिला मुख्यालय स्तर पर CGHS की सुविधा दी जाए। साथ ही CGHS की दरों को हर साल मेडिकल महंगाई के आधार पर संशोधित किया जाए।
एक तकनीकी लेकिन बेहद जरूरी मांग यह है कि डाक विभाग के कर्मचारियों की पेंशन की देनदारी विभागीय खर्च से अलग करके उसे भारत के समेकित कोष पर डाला जाए। FNPO का कहना है कि अभी पेंशन का बोझ विभाग पर डालने से कागजों पर घाटा दिखता है जो असल में विभाग की नाकामी नहीं, बल्कि हिसाब-किताब की गड़बड़ी है। इससे दूसरे विभागों के मुकाबले डाक विभाग के साथ नाइंसाफी होती है जहां यह खर्च केंद्र सरकार उठाती है।
8वां वेतन आयोग 28 से 30 अप्रैल 2026 तक नई दिल्ली में तमाम यूनियनों और संगठनों से मुलाकात करेगा। आयोग ने खुद बताया है कि उसे बहुत ज्यादा आवेदन मिले हैं, इसलिए सभी की बात इन तीन दिनों में नहीं हो पाएगी। जो लोग दिल्ली से बाहर हैं उन्हें अपने राज्य या नजदीकी राज्य में होने वाली बैठकों का इंतजार करना होगा, जिसकी जानकारी आयोग अपनी वेबसाइट पर डालता रहेगा।