IBM और ऑक्सफोर्ड इकोनॉमिक्स की नई स्टडी के मुताबिक, 2030 तक AI निवेश में 150% की भारी वृद्धि होगी। हालांकि, 79% कंपनियों को रेवेन्यू बढ़ने की उम्मीद तो है, पर सिर्फ 24% के पास इसके लिए स्पष्ट रणनीति है।
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) जल्द ही बिजनेस और जॉब फील्ड को बदलने वाला है। 79% कंपनियां मानती हैं कि 2030 तक एआई उनकी कंपनी के रेवेन्यू को बढ़ा देगा। वहीं, सिर्फ 24% के पास यह स्पष्ट योजना है कि वह रेवेन्यू कहां से आएगा। आईबीएम इंस्टीट्यूट फॉर बिजनेस वैल्यू और ऑक्सफोर्ड इकोनॉमिक्स की स्टडी में 33 देशों और 20 इंडस्ट्री के 2,007 टॉप अधिकारियों का सर्वे किया गया। रिपोर्ट में 2030 तक एआई के उज्ज्वल भविष्य की उम्मीद जताई, वहीं दूसरी ओर नकारात्मक पक्ष को लेकर कुछ चेतावनियां भी दी हैं।
74% अधिकारियों का मानना है कि एआई नेतृत्व भूमिकाओं की परिभाषा बदल देगा। 25% कंपनी बोर्ड में 2030 तक एआई सलाहकार होंगे। अभी में एआई खर्च का 47% दक्षता पर केंद्रित है, जो 2030 तक घटकर 38% रह जाएगा। वहीं इनोवेशन पर खर्च 62% तक पहुंच जाएगा। 67% अधिकारियों को उम्मीद है कि एआई उन स्किल की कमी को दूर करेगा जो आज संगठनों को रोकती है।
57% कंपनियां मानती हैं कि उनकी सफलता बेहतर एआई मॉडल पर निर्भर करेगी, लेकिन केवल 28% को पता है कि 2030 तक उन्हें कौन से मॉडल चाहिए। वहीं, 67% अधिकारियों का कहना है कि नौकरियों की अवधि घटी है और कर्मचारी जल्दी नौकरियां बदल रहे हैं। 2026 के अंत तक 56% कर्मचारियों को नए सिरे से प्रशिक्षित करना होगा क्योंकि एआई उनके हिस्से का काम संभाल लेगा।