
यूएई के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान के भारत दौरे के दौरान कार में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ। (फोटो: X handle/ @ narendramodi)
Strategic Engagement:संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान (Sheikh Mohamed bin Zayed) की सोमवार को हुई भारत यात्रा से कूटनीतिक हलकों में हलचल मच गई है। यह दौरा अपनी संक्षिप्त अवधि के कारण खास चर्चा में है। दुनिया के सबसे अमीर और शक्तिशाली नेताओं में शामिल किए गए शेख मोहम्मद बिन जायद मात्र ढाई घंटे के लिए भारत आए, लेकिन इस छोटी सी मुलाकात के मायने बहुत बड़े हैं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कूटनीति के सबब शेख मोहम्मद बिन जायद का यह दौरा मुख्य रूप से 'पर्सनल डिप्लोमेसी' और 'स्ट्रैटेजिक अलाइनमेंट' का हिस्सा था। ढाई घंटे की इस संक्षिप्त यात्रा के पीछे तीन प्रमुख कारण माने जा रहे हैं:
डोनाल्ड ट्रंप की ओर से प्रस्तावित 'बोर्ड ऑफ पीस' को लेकर भारत और यूएई के बीच समन्वय बहुत जरूरी है। यूएई इस बोर्ड का अहम हिस्सा है और भारत को भी इसमें शामिल होने का न्योता मिला है। दोनों नेताओं ने पश्चिम एशिया में स्थिरता लाने के लिए इस रोडमैप पर सीधी चर्चा की।
यूएई भारत के 'स्ट्रेटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व' कार्यक्रम में बड़ा भागीदार है। ढाई घंटे की इस 'पॉवर मीटिंग' में भविष्य के निवेश और रिन्यूएबल एनर्जी प्रोजेक्ट्स पर मुहर लगाई गई।
शेख मोहम्मद बिन जायद की गिनती उन नेताओं में होती है, जिनके पास समय की बहुत कमी रहती है। उनकी कुल संपत्ति और प्रभाव का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उनके पास 8 निजी विमान और 700 से अधिक कारों का काफिला है। इतने बड़े कद के नेता का महज कुछ घंटों के लिए आना भी भारत की बढ़ती वैश्विक साख का प्रमाण है।
भारत और यूएई के बीच रिश्ते अब सिर्फ तेल खरीदने और मजदूर भेजने तक सीमित नहीं रहे हैं। पिछले कुछ बरसों के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और शेख मोहम्मद बिन जायद के बीच, जो कैमिस्ट्री दिखी है, उसने दोनों देशों को 'व्यापक रणनीतिक भागीदार' (Comprehensive Strategic Partners) बना दिया है।
सांस्कृतिक जुड़ाव: यूएई में बना विशाल हिंदू मंदिर और वहां रहने वाले करीब 35 लाख भारतीय दोनों देशों के बीच एक मजबूत सेतु का काम करते हैं।
सुरक्षा और रक्षा: दोनों देश अब आतंकवाद के खिलाफ और समुद्री सुरक्षा में भी एक-दूसरे का सहयोग कर रहे हैं।
संयुक्त अरब अमीरात (UAE) में भारतीयों की संख्या को लेकर ताजा आंकड़े काफी चौंकाने वाले हैं। वर्तमान डेटा के अनुसार:
खास बात: यूएई में रहने वाले भारतीयों में सबसे बड़ी संख्या केरल (लगभग 50%) के लोगों की है, जिसके बाद तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश और उत्तर प्रदेश/बिहार का स्थान आता है।
व्यापार के मामले में यूएई भारत का तीसरा सबसे बड़ा व्यापारिक भागीदार है। 'कंप्रिहेंसिव इकोनॉमिक पार्टनरशिप एग्रीमेंट' (CEPA) लागू होने के बाद व्यापार में अभूतपूर्व उछाल आया है:
द्विपक्षीय व्यापार: वर्तमान में दोनों देशों के बीच व्यापार 85 बिलियन डॉलर के पार पहुंच चुका है। लक्ष्य इसे जल्द ही 100 बिलियन डॉलर तक ले जाने का है।
निवेश: यूएई भारत में चौथा सबसे बड़ा निवेशक है। यूएई का 'सॉवरेन वेल्थ फंड' भारत के बुनियादी ढांचे, बंदरगाहों और डिजिटल अर्थव्यवस्था में अरबों डॉलर लगा रहा है।
रेमिटेंस: यूएई में रहने वाले भारतीय हर साल करीब 20 बिलियन डॉलर भारत भेजते हैं, जो देश की अर्थव्यवस्था को मजबूती देता है।
बहरहाल,शेख मोहम्मद बिन जायद की यह ढाई घंटे की यात्रा यह संदेश देने के लिए काफी थी कि वैश्विक राजनीति के बदलते समीकरणों में भारत और यूएई एक-दूसरे के लिए कितने अनिवार्य हैं। चाहे वह ट्रंप का शांति प्रस्ताव हो या फिर कॉरिडोर प्रोजेक्ट्स, दोनों देश अब साथ मिल कर वैश्विक एजेंडा तय कर रहे हैं।
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Published on:
19 Jan 2026 07:55 pm
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