Bharti Airtel ने इंडस टावर में वोडाफोन की 4.7 फीसदी हिस्सेदारी खरीदने के लिए डील पक्की कर दी है। वोडाफोन को इस डील से जो भी रकम मिलेगी उसका इस्तेमाल वो कर्ज को चुकाने के लिए करेगी।
वोडाफोन की स्थिति भारत में ऐसी हो गई है कि उसे अपने कॉम्पिटीटर को ही अपने शेयर बेचने पड़ रहे हैं। आज भारती एयरटेल ने यूके के वोडाफोन ग्रुप पीएलसी से इंडस टावर्स में एक ब्लॉक डील के जरिए 4.7 फीसदी हिस्सेदारी खरीदने के लिए डील फाइनल कर ली है। एयरटेल से मिलने वाली राशि का इस्तेमाल वोडाफोन-आइडिया निवेश करने और मोबाईल टावर कंपनी का कर्ज चुकाने में करेगी।
सुनील मित्तल की अगुवाई वाली एयरटेल ने जानकारी देते हुए कहा कि "भारती एयरटेल ने इंडस टावर्स में 4.7% इक्विटी ब्याज खरीदने के लिए वोडाफोन के साथ एक समझौता किया है, इस मूल शर्त पर कि भुगतान की गई राशि वोडाफोन द्वारा वोडाफोन आइडिया (वीआई) में नई इक्विटी के रूप में शामिल की जाएगी और साथ ही इंडस टॉवर्स को बकाया चुकाया जाएगा।"
इस डील से इंडस में एयरटेल की हिस्सेदारी बढ़कर 46.4% हो जाएगी। एयरटेल-वोडाफोन डील की घोषणा तब सामने आई है जब ठीक एक दिन पहले वोडाफोन ग्रुप पीएलसी ने अज्ञात निवेशकों को एक ब्लॉक डील के जरिए इंडस टावर्स में 2.4% हिस्सेदारी बेचकर लगभग 1,443 करोड़ रुपये जुटाए थे।
शुक्रवार को बीएसई पर एयरटेल के शेयर 2.64% बढ़कर 688.45 रुपये पर बंद हुए हैं। शेयर बाजार के घंटों के बाद सौदे की घोषणा की गई।
बता दें किवोडाफोन आइडिया कर्ज में डूबी हैं और वो इंडस टावर्स के बकाया का भुगतान नहीं कर पा रही है। वीआईएल और प्रवर्तक वोडाफोन, दोनों ने 15 जुलाई तक बकाया चुकाने का समय मांगा था. इसके तहत हर महीने एक निश्चित राशि वोडाफोन आइडिया इंडस टावर्स को चुकाएगी।
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