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SIP फेल हो गई? बैंक चुपचाप काट लेता है जुर्माना और आपको पता भी नहीं चलता, इन बातों का ध्यान रखें निवेशक

SIP Bounce Charges: एसआईपी फेल होने पर बैंक 250 रुपये से 750 रुपये तक जुर्माना वसूलते हैं, ऊपर से 18% GST अलग। एक दिन में पांच SIP फेल हों तो 2,950 रुपये तक का नुकसान हो सकता है।

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भारत

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Pawan Jayaswal

Apr 11, 2026

SIP Bounce Charges

एसआईपी फेल होने पर चार्ज कटता है। (PC: AI)

SIP Failed Penalty: हर महीने तनख्वाह आती है, SIP कटती है और आप सोचते हैं कि भविष्य संवर रहा है। लेकिन अगर उस दिन खाते में पैसे कम पड़ गए तो? बैंक चुपचाप जुर्माना काट लेता है और यह जुर्माना कभी-कभी उस SIP की किस्त से भी ज़्यादा होता है। यह कोई काल्पनिक बात नहीं है। यह हर महीने हज़ारों निवेशकों के साथ होता है।

एक दिन में 5 SIP फेल हुईं तो समझिए क्या होगा

म्यूचुअल फंड ऑब्जर्वर बाला गोराडे एक सीधा हिसाब देते हैं। अगर बैंक 500 रुपये प्रति फेल डेबिट चार्ज करता है और एक ही दिन पांच SIP फेल हो जाएं तो जुर्माना बनता है 2,500 रुपये। इसमें 18% GST जोड़ें तो कुल 2,950 की चपत लग जाती है। अब सोचिए 1,000 रुपये की एक SIP किस्त पर आपको 590 रुपये तक जुर्माना भरना पड़ सकता है। यानी निवेश की जगह आपने जेब से पैसे उड़ रहे हैं। बैंक यह चार्ज प्रति ट्रांजेक्शन लगाते हैं। यह बात बहुत से निवेशक नहीं जानते और यही उनकी सबसे बड़ी भूल बन जाती है।

NACH मैंडेट क्या होता है, थोड़ा समझ लीजिए

भारत में ज़्यादातर SIP NACH यानी National Automated Clearing House के जरिए चलती हैं। यह NPCI यानी नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया का सिस्टम है। इसके तहत म्यूचुअल फंड कंपनी यानी AMC आपके बैंक खाते से तय तारीख पर अपने आप पैसे काट लेती है। एक बार मैंडेट रजिस्टर हो गया तो बार-बार अनुमति लेने की ज़रूरत नहीं। हर मैंडेट को एक UMRN यानी यूनीक मैंडेट रजिस्ट्रेशन नंबर मिलता है और यह कई साल तक वैध रहता है।

दो तरह के मैंडेट होते हैं। e-NACH जो नेट बैंकिंग या डेबिट कार्ड से कागज़ात के बिना हो जाता है। और फिजिकल मैंडेट जिसमें दस्तखत वाला फॉर्म भरना पड़ता है और थोड़ा वक्त लगता है। OTM यानी वन-टाइम मैंडेट और भी सुविधाजनक है क्योंकि इसमें एक बार की मंजूरी से कई SIP चल सकती हैं। सुविधा है, लेकिन खतरा भी छुपा है। तय तारीख पर खाते में पैसे नहीं हुए तो ट्रांजेक्शन फेल और जुर्माना तुरंत लग जाता है।

सिर्फ जुर्माना नहीं, कंपाउंडिंग भी टूटती है

पैसे की चपत तो एक नुकसान है, लेकिन असली नुकसान कहीं और है। SIP की ताकत उसकी निरंतरता में है। खासतौर पर इक्विटी म्यूचुअल फंड में जहाँ हर किस्त बाज़ार के उतार-चढ़ाव को औसत करती है। जब कोई किस्त छूट जाती है तो कंपाउंडिंग की ज़ंजीर टूटती है। बरसों बाद यह टूटी हुई कड़ी लाखों रुपये के फर्क में बदल सकती है। इसके अलावा बार-बार फेल होने वाले मैंडेट से बैंक के साथ रिश्ते भी खराब होते हैं और भविष्य में लोन या दूसरी सुविधाओं पर असर पड़ सकता है।

क्या करें कि SIP कभी फेल न हो?

कुछ आसान आदतें अपना लें, झंझट हमेशा के लिए खत्म हो जाएगी। पहली बात, SIP वाले खाते में हमेशा थोड़ा बफर बैलेंस रखें। बस इतना कि किसी महीने अगर हिसाब थोड़ा गड़बड़ाए तो SIP अपने आप कट जाए। दूसरी बात, अगर आपकी कई SIP हैं, तो सबको एक ही तारीख पर मत रखिए। अलग-अलग तारीखें चुनिए। एक दिन में सब फेल होने का खतरा खत्म। तीसरी बात, डेबिट तारीख से दो-तीन दिन पहले फोन में रिमाइंडर लगाइए। यह छोटी सी आदत बड़ा नुकसान बचा सकती है। चौथी और अक्सर भुला दी जाने वाली बात, मैंडेट की लिमिट हमेशा अपनी मौजूदा SIP से थोड़ी ज़्यादा रखें। इससे भविष्य में SIP बढ़ाने पर नया मैंडेट नहीं बनाना पड़ेगा।