
शेयर बाजार में इस हफ्ते अच्छी तेजी आई है। (PC: AI)
Stock Market Outlook: निफ्टी 50 इस हफ्ते 22,713 से उछलकर 24,050 पर पहुंच गया। 1,337 अंक की बढ़त। अमेरिका और ईरान के बीच दो हफ्ते के युद्धविराम की खबर ने बाजार में जान फूंक दी। 23,200 और 23,800 जैसे बड़े अवरोध टूट गए। लेकिन बाजार के जानकार एक सुर में कह रहे हैं कि 25,000 का दरवाजा खटखटाना इतना आसान नहीं होगा।
Livelong Wealth के संस्थापक हरिप्रसाद के. साफ कहते हैं कि अमेरिका-ईरान युद्धविराम से माहौल जरूर सुधरा है, लेकिन यह सोचना कि इससे निफ्टी 25,000 के पार निकल जाएगा, थोड़ा ज़्यादा उम्मीद करना है। अभी जो हो रहा है वह राहत की रैली है, कोई बड़ा बदलाव नहीं।
SMC Global Securities की सीनियर रिसर्च एनालिस्ट सीमा श्रीवास्तव भी मानती हैं कि बाजार में एक तरफ उम्मीद है तो दूसरी तरफ सतर्कता भी। उनके मुताबिक विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली के चलते भारत दूसरे उभरते बाज़ारों से पिछड़ता रहा है और टिकाऊ तेजी के लिए जो कारण चाहिए, वो अभी भी नहीं बने हैं।
युद्धविराम हुआ है, युद्ध खत्म नहीं हुआ। इस्लामाबाद में बातचीत जारी है और कोई ठोस समझौता अभी तक नहीं बना है। होर्मुज स्ट्रेट अभी भी बंद है और तेल की सप्लाई चेन प्रभावित है। जब तक यह रास्ता नहीं खुलता, तनाव बना रहेगा।
SEBI रजिस्टर्ड मार्केट एक्सपर्ट अनुज गुप्ता कहते हैं कि मध्य-पूर्व के तेल उत्पादक देशों ने अपने प्लांट बंद कर दिए हैं। इन्हें दोबारा शुरू करने में 25 से 30 दिन लगेंगे। यानी इस्लामाबाद में कोई समझौता हो भी जाए तो तेल की माँग और आपूर्ति का फासला फौरन नहीं पटेगा। तेल के दाम हाल के ऊँचे स्तरों से भले थोड़े घटे हैं, लेकिन युद्ध से पहले के स्तर पर आना अभी दूर की बात है।
Livelong Wealth के हरिप्रसाद कहते हैं कि अगर तेल 70 से 75 डॉलर के दायरे में आ गया तो भारत के लिए यह बड़ी राहत होगी। महंगाई घटेगी, कंपनियों का मार्जिन बढ़ेगा और RBI के पास ब्याज दरें नरम रखने की गुंजाइश बनेगी।
Basav Capital के को-फाउंडर संदीप पांडेय कहते हैं कि तेल महंगा रहा तो महंगाई का डर दुनियाभर के केंद्रीय बैंकों को सताता रहेगा। ब्याज दर में कटौती की उम्मीद कम होगी। बाजार में नकदी तंग रहेगी और जब तक नकदी नहीं बढ़ती, निफ्टी के लिए 25,000 पार करना मुश्किल है।
PACE 360 के चीफ ग्लोबल स्ट्रैटेजिस्ट अमित गोयल एक अहम बात की तरफ ध्यान दिलाते हैं। ईरान ने जो 10 सूत्री फॉर्मूला पेश किया है, जिसे डोनाल्ड ट्रंप ने भी व्यावहारिक माना, उसमें युद्धविराम के बाद होर्मुज स्ट्रेट पर ईरान का पूरा नियंत्रण शामिल है। यह पहले कभी नहीं था, यह इलाका पहले मुक्त क्षेत्र था। अब अगर ईरान इस रास्ते का मालिक बन जाता है तो यह उसकी कमाई का जरिया तो बनेगा ही, साथ ही दुनिया में ईरान समर्थक और ईरान विरोधी दो खेमे बन जाएंगे। यह नया विवाद भू-राजनीति को और उलझा सकता है।
हरिप्रसाद इसे सबसे बड़ी खतरे की घंटी मानते हैं। FII यानी विदेशी संस्थागत निवेशक अच्छी खबरों के बावजूद बिकवाली जारी रखे हुए हैं। इसका मतलब है कि वैश्विक निवेशकों को इस युद्धविराम पर अभी भरोसा नहीं है। बाज़ार नई ऊंचाई पर तब जाता है जब FII खरीदते हैं। घरेलू निवेशक बाज़ार को थामे रख सकते हैं, लेकिन इतना बड़ा ब्रेकआउट अकेले नहीं दे सकते।
तीन चीजें एक साथ होनी चाहिए। क्रूड में ठोस गिरावट, FII की वापसी और वित्तीय क्षेत्र की अगुवाई में कमाई में तेजी। जब तक ये तीनों नहीं मिलते, बाज़ार राहत की अवस्था में है, ब्रेकआउट की अवस्था में नहीं। डेरिवेटिव बाज़ार में 25,000 पर भारी कॉल राइटिंग दिख रही है, जो बताता है कि बड़े प्लेयर्स इस स्तर पर निफ्टी को रोकने की तैयारी में हैं।
Religare Broking के SVP रिसर्च अजित मिश्रा कहते हैं कि निफ्टी धीरे-धीरे 24,300 से 24,700 के दायरे की तरफ बढ़ सकता है। India VIX यानी बाजार का डर का पैमाना घटकर 19 पर आ गया है, जो अच्छा संकेत है। लेकिन 23,500 यानी 200-DEMA के ऊपर टिके रहना ज़रूरी है।
Published on:
11 Apr 2026 04:46 pm
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