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Gold ETF अब फिजिकल गोल्ड ही नहीं पेपर गोल्ड में भी कर सकेंगे इन्वेस्ट, जानिए निवेशकों के लिए क्या बदल जाएगा

Gold ETF Investment: सेबी ने गोल्ड ईटीएफ में बड़ा बदलाव किया है। अब फंड हाउस फिजिकल गोल्ड के साथ गोल्ड फ्यूचर्स में भी निवेश कर सकेंगे। इससे फंड मैनेजमेंट में लचीलापन बढ़ेगा, लेकिन निवेशकों के लिए कुछ नए जोखिम भी जुड़ेंगे।

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भारत

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Pawan Jayaswal

Apr 07, 2026

Gold ETF Investment

सेबी ने गोल्ड ईटीएफ को नई सुविधा दी है। (PC:AI)

Gold ETF Investment: सेबी ने गोल्ड ईटीएफ को नई सुविधा दी है कि फंड हाउस अब पोर्टफोलियो का एक हिस्सा गोल्ड डेरिवेटिव्स (गोल्ड फ्यूचर्स जैसे वित्तीय कॉन्ट्रैक्ट्स) में भी निवेश कर सकते हैं। पहले गोल्ड ईटीएफ का पूरा पैसा फिजिकल सोने (बुलियन) में लगाया जाता था, जिससे निवेशकों को भरोसा रहता था कि निवेश सीधे सोने की कीमत से जुड़ा है। निवेश में अब फिजिकल गोल्ड और पेपर गोल्ड का मिश्रण होगा। हालांकि, गोल्ड ईटीएफ को अपने कुल निवेश का 95 फीसदी हिस्सा गोल्ड या गोल्ड से जुड़े इंस्ट्रूमेंट्स में ही रखना होगा। फर्क यह है कि अब इसमें फ्यूचर्स कॉन्ट्रैक्ट्स भी शामिल होंगे।

निवेशकों के लिए क्या मतलब है?

  1. अब आपका पूरा पैसा सिर्फ फिजिकल गोल्ड में ही नहीं लगा होगा। फंड का एक छोटा हिस्सा फ्यूचर्स कॉन्ट्रैक्ट्स जैसे वित्तीय साधनों में भी निवेश किया जा सकता है। ये असली सोने की जगह कागजी सौदे होते हैं।
  2. इस बदलाव का मतलब यह नहीं है कि रिटर्न तुरंत बदल जाएगा, लेकिन निवेश करते समय सिर्फ रिटर्न नहीं, यह भी देखना जरूरी होगा कि फंड असली सोने में निवेश कर रहा हैया फ्यूचर्स के जरिए इन्वेस्ट कर रहा है।
  3. रिटर्न में थोड़ा फर्क आ सकता है। इनमें डेरिवेटिव शामिल होने से बाजार में ज्यादा उतार-चढ़ाव के समय गोल्ड ईटीएफ का प्रदर्शन स्पॉट गोल्ड से थोड़ा अलग हो सकता है।
  4. इसमें कुछ नए तरह के जोखिम भी जुड़ेंगे। जैसे काउंटरपार्टी रिस्क, कॉन्ट्रैक्ट रोलओवर की लागत और कीमत में असमानता। जब तेज उतार-चढ़ाव होता है, तब फ्यूचर्स व फिजिकल गोल्ड के रिटर्न में अंतर दिख सकती है।

सेबी इसलिए दे रहा इजाजत

  1. इस बदलाव के पीछे मकसद हैं गोल्ड ईटीएफ को और ज्यादा लचीला और तेज बनाना। फ्यूचर्स का इस्तेमाल करने से फंड मैनेजर को कई फायदे मिलते हैं।
  2. इससे अचानक ज्यादा निवेश आने या निकलने पर फंड को संभालना आसान हो जाता है। सोना खरीदने सुरक्षित रखने की लागत कम हो जाती है।

एचडीएफसी कर रहा इसकी शुरुआत

एचडीएफसी एएमसी सबसे पहले 22 अप्रेल 2026 से अपने गोल्ड ईटीएफ में यह नया स्ट्रक्चर लागू करने जा रही है। गोल्ड ईटीएफ की कीमत अब भी सोने के दाम से जुड़ी रहेगी, लेकिन ट्रैकिंग का तरीका बदल सकता है। डेरिवेटिव्स के इस्तेमाल से फंड मैनेजर को ज्यादा लचीलापन मिलेगा। हालांकि, इसमें अतिरिक्त जोखिम और जटिलता भी जुड़ सकती है। गोल्ड फ्यूचर्स में फंड असली सोना नहीं खरीदता, बल्कि एक कॉन्ट्रैक्ट लेता है। यह कॉन्ट्रैक्ट तय करता है कि भविष्य में किसी खास तारीख पर एक निश्चित कीमत पर सोना खरीदा या बेचा जाएगा।