कारोबार

कॉरपोरेट जॉब छोड़ चले गए पहाड़, हॉस्टल्स में 3 साल वॉलंटियरिंग की फिर खोल लिया कैफे, अब मजे से जी रहे जिंदगी

Success Story: दिल्ली की ठीक-ठाक कॉरपोरेट जॉब छोड़कर मुकुल और तूबा ने पहाड़ों में जाकर कैफे खोला है। इससे पहले उन्होंने पहाड़ों में तीन साल हॉस्टल्स में वॉलंटियरिंग भी की।

3 min read
Nov 25, 2025
पहाड़ों पर कैफे की प्रतिकात्मक तस्वीर (PC: Gemini)

मुकुल और तूबा ने वो कर दिखाया, जिसके बारे में लगभग हर नौकरी करने वाला इंसान अपने जीवन में कम से कम एक बार तो सोचता ही है। दोनों ने अपनी बोरिंग कॉरपोरेट जॉब छोड़ी और पहाड़ों में जाकर एक कैफे खोल लिया। मगर यह सब इतना आसान नहीं था, क्योंकि कैफे खोलने और उसे चलाने को लेकर उनके पास पहले से कोई अनुभव नहीं था, लेकिन मन में सिर्फ एक इच्छा थी।

HT में छपी खबर के मुताबिक, मुकुल और तूबा की मुलाकात साल 2021 में दिल्ली में हुई थी। मुकुल विजुअल मर्चेंडाइजर और मार्केटिंग में काम करते थे। जबकि तूबा एक साइबर सिक्योरिटी कंपनी में जॉब करती थी। दोनों ही अपने काम से नाखुश थे। अक्टूबर 2021 में जब दोनों जिभी घूमने गए, तो तूबा को एक हॉस्टल में वॉलंटियर बनने का मौका मिला।

ये भी पढ़ें

New Labour Codes Explained: नए श्रम कानूनों से क्या घट जाएगा आपका वेतन? समझिए ‘टेक होम सैलरी’ का पूरा कैलकुलेशन

मुकुल बताते हैं कि मैं भी कुछ ऐसा ही करना चाहता था, लेकिन समझ नहीं आ रहा था कि कैसे शुरू करूं। बस संयोग से मैं एक हॉस्टल में बैठा था और मैनेजर ने कहा कि वॉलंटियर की जगह खाली है। बस फिर क्या था, मैंने उसी वक्त सोच लिया था कि मैं ये नौकरी नहीं करुंगा। वैसे भी मैं नौकरी से काफी परेशान हो चुका था। पहाड़ों में हम चार साल से हैं, जिसकी शुरुआत उसी ट्रिप से हुई।

हालांकि, तूबा ने अपनी रिमोट जॉब को करना जारी रखा और साथ में वॉलंटियरिंग भी करती रही। अगले तीन साल तक दोनों ने पहाड़ों में अलग-अलग हॉस्टल्स में काम किया, कमरा साफ करने से लेकर सोशल मीडिया मैनेज करने, बेड बनाने, फ्रंट डेस्क, यहां तक कि मेहमानों को ट्रेकिंग पर ले जाने तक हर तरह का काम सीखा।

कम सैलरी पर काम चलाना पड़ा

एक वॉलंटियर के तौर पर उन्हें हर महीने 5 से 10 हजार रुपये स्टाइपेंड मिलता था, जो कि उनकी दिल्ली वाली नौकरी से काफी कम था। मुकुल बताते हैं कि अपनी कॉरपोरेट जॉब में वो करीब 65,000 रुपये और तूबा 35,000 रुपये महीना कमाते थे।

मुकुल बताते हैं कि उनके माता-पिता पहले हैरान थे, 'उन्हें लगा कि अब ये 10,000 रुपये कमा रहा है, ये आखिर कर क्या रहा है, लेकिन बाद में वे समझ गए और अब पूरा सपोर्ट करते हैं।'
तूबा अपनी नौकरी करती रहीं और मुकुल फ्रीलांसिंग करते रहे, साथ ही हॉस्टलों में काम करके बिजनेस के बारे में सीखते रहे।

जिभी में कैफे खोलने का सफर

अब मुकुल और तूबा जिभी में एक कैफे चलाते हैं, जिसका नाम है ब्लीब्लू (Bleeblu Cafe)। वो यहीं नहीं रुके, Bleeblu Stays नाम से 9 कमरों वाला हॉस्टल भी खोल रहे हैं। उन्हें जिभी में एक ऐसी प्रॉपर्टी मिली जो उनके हिसाब से परफेक्ट थी। हालांकि, हिमाचल में राज्य से बाहरी लोगों के लिए जमीन खरीदना मुश्किल होता है, इसलिए उन्होंने 15 साल की लीज पर प्रॉपर्टी ली, जिसके लिए वो सालाना 2.5 लाख रुपये देते हैं। दोनों ने कैफे ब्लीब्लू को अप्रैल 2024 में खोला था, तूबा ने कैफे खुलने से एक महीने पहले अपनी नौकरी छोड़ दी।

मुकुल बताते हैं, 'हमारी पहली ही रील वायरल हो गयी थी। यहां तक कि कैफे खुलने से पहले ही एक मेहमान हमारे कैफे में आ गए थे। हम पेंट कर रहे थे और वो कॉफी पूछने आ गए!' कुछ ही महीनों में कैफे की कमाई से उन्होंने सारे खर्च निकाल लिए। अब जो भी पैसा आता है, वो अपने बिजनेस को बढ़ाने में लगाते हैं।

कमाई घटी, लेकिन खुशी बढ़ी

जॉब छोड़कर कैफे शुरू करने का फैसला आसान नहीं था। 2021 में दोनों मिलकर महीने का तकरीबन 1 लाख रुपये कमाते थे। मुकुल ने तो 80% कमाई छोड़कर पहाड़ों का रास्ता चुना, लेकिन उन्हें कोई पछतावा नहीं। वो कहते हैं, 'पैसे कम मिले, लेकिन खुद के लिए काम करने का जो मजा है, वो अलग ही होता है। यह फैसला बिल्कुल सही था।' तूबा कहती हैं 'ये मेरे लिए सिर्फ कैफे नहीं, हमारा घर है। हम यहीं रहते हैं, यहीं काम करते हैं। यह हमारा सपना था'।

ये भी पढ़ें

Wife के साथ Post Office की इस स्कीम में करें निवेश, हर 3 महीने में अकाउंट में आएंगे 45,100 रुपये

Published on:
25 Nov 2025 01:14 pm
Also Read
View All

अगली खबर