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Indian Refineries Capacity : अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच जंग के चलते दुनिया में कहीं रिफाइनरियां खतरे में हैं तो कुछ बंद हो गई हैं इससे विश्व में तेल की उपलब्धता का संकट सामने आया है। सऊदी अरब के रास तनूरा (Ras Tanura), कतर के रास लाफ्फान (Ras Laffan) पर हुए भीषण हमलों और यूएई (UAE) की रुवैस (Ruwais) रिफाइनरी के बंद होने से वैश्विक ऊर्जा बाजार (Global Crude Oil Supply) में हड़कंप मच गया है। लेबनान में विनाशकारी स्थितियों ने इस भू-राजनीतिक संकट को और गहरा कर दिया है। इस वैश्विक तेल संकट के बीच, यह समझना जरूरी है कि खाड़ी देशों (Middle East Oil Crisis) के इन विशाल तेल ठिकानों की तुलना में भारत का रिफाइनिंग इंफ्रास्ट्रक्चर (जामनगर, मंगलौर और पचपदरा) कहां खड़ा है और हमारी ऊर्जा सुरक्षा कितनी मजबूत है। जानिए इस वैश्विक महाविनाश के बीच भारत की जामनगर, मंगलौर और पचपदरा रिफाइनरियां कैसे देश की ऊर्जा सुरक्षा की गारंटी बन रही हैं।
भारत की रिफाइनरियां केवल घरेलू मांग पूरी नहीं करतीं, बल्कि दुनिया की कुछ सबसे उन्नत (Complex) रिफाइनरियों में गिनी जाती हैं। यहां मध्य पूर्व की प्रभावित रिफाइनरियों और भारत की प्रमुख रिफाइनरियों की तुलना की गई है:
| रिफाइनरी का नाम | देश | मुख्य उत्पाद / विशेषता | अनुमानित क्षमता (प्रति दिन) |
| रास तनुरा (Ras Tanura) | सऊदी अरब | खाड़ी की सबसे पुरानी और बड़ी रिफाइनरी | ~550,000 बैरल |
| रास लाफ्फान (Ras Laffan) | कतर | प्राकृतिक गैस (LNG) और कंडेन्सेट रिफाइनिंग | ~300,000 बैरल |
| रुवैस (Ruwais) | यूएई (UAE) | दुनिया के सबसे बड़े इंटीग्रेटेड कॉम्प्लेक्स में से एक | ~837,000 बैरल |
| जामनगर (Jamnagar) | भारत (गुजरात) | दुनिया का सबसे बड़ा रिफाइनरी कॉम्प्लेक्स | ~1.24 मिलियन बैरल |
| मंगलौर (MRPL) | भारत (कर्नाटक) | पेट्रोकेमिकल और रणनीतिक भंडार के करीब | ~300,000 बैरल |
| पचपदरा (HRRL) | भारत (राजस्थान) | अत्याधुनिक पेट्रोकेमिकल और रिफाइनरी हब | ~180,000 बैरल |
यूएई की रुवैस रिफाइनरी मध्य पूर्व का एक अहम हिस्सा है, लेकिन रिलायंस इंडस्ट्रीज की जामनगर रिफाइनरी आकार और क्षमता में इससे कहीं आगे है। जामनगर दुनिया का सबसे बड़ा सिंगल-लोकेशन रिफाइनरी कॉम्प्लेक्स है। इसकी सबसे बड़ी खासियत इसका 'कॉम्प्लेक्सिटी इंडेक्स' है, जिसका अर्थ है कि यह सबसे खराब गुणवत्ता वाले (Heavy and Sour) कच्चे तेल को भी उच्च गुणवत्ता वाले ईंधन में बदल सकती है, जो इसे किसी भी अंतरराष्ट्रीय संकट में लचीलापन देता है।
सऊदी अरब की रास तनूरा एक विशाल निर्यात केंद्र है। दूसरी ओर, भारत की मंगलौर रिफाइनरी (MRPL) लगभग 15 MMTPA की क्षमता के साथ दक्षिण भारत की ऊर्जा रीढ़ है। मंगलौर का रणनीतिक महत्व इसलिए भी अधिक है, क्योंकि यह भारत के 'स्ट्रैटेजिक पेट्रोलियम रिज़र्व' (SPR) के करीब स्थित है, जो ऐसे ही मध्य पूर्व संकटों के समय भारत को आपातकालीन तेल आपूर्ति सुनिश्चित करता है।
कतर का रास लाफ्फान मुख्य रूप से लिक्विफाइड नेचुरल गैस (LNG) और कंडेन्सेट पर केंद्रित है। इसके विपरीत, राजस्थान का पचपदरा (HPCL राजस्थान रिफाइनरी लिमिटेड - HRRL) भारत की सबसे नई और आधुनिक परियोजनाओं में से एक है। यह 9 MMTPA क्षमता वाली रिफाइनरी मुख्य रूप से पेट्रोकेमिकल उत्पादों पर केंद्रित है। यह भारत को प्लास्टिक, पॉलीमर और अन्य रसायनों के आयात पर निर्भरता कम करने में मदद कर रही है।
बहरहाल, अरब और कतर के तेल ठिकानों पर हुए हमलों से वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला की कमजोरी उजागर हो गई है। हालांकि भारत अपनी कच्चे तेल की जरूरतों के लिए आयात पर निर्भर है, लेकिन जामनगर की विशालता, मंगलौर का रणनीतिक स्थान और पचपदरा जैसी नई पेट्रोकेमिकल रिफाइनरियां यह सुनिश्चित करती हैं कि 'रिफाइनिंग' के मामले में भारत एक वैश्विक महाशक्ति है।
(इनपुट: अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) रिपोर्ट,पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय व ओपेक (OPEC) डेटा)
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Updated on:
11 Mar 2026 08:46 pm
Published on:
11 Mar 2026 08:32 pm
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