
भारत में बचत और सुरक्षित निवेश के लिए सबसे ज्यादा लोकप्रिय विकल्प दो है। एक फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) और दुसरा पब्लिक प्रोविडेंट फंड (PPF)। निवेश में इन दोनों की अपनी-अपनी भूमिका होती है। दोनों योजनाएं सुरक्षित मानी जाती हैं, लेकिन इनकी अवधि, ब्याज दर, टैक्स लाभ और निकासी के नियम अलग-अलग हैं। निवेश से पहले इन दोनों विकल्पों के बीच अंतर समझना जरूरी होता है, ताकि निवेशक अपनी जरूरत और लक्ष्य के अनुसार सही योजना चुन सके।
फिक्स्ड डिपॉजिट आपको एक निश्चित अवधि के लिए और निश्चित ब्याज दर पर किसी बैंक में एकमुश्त राशि जमा करने की सुविधा देता है। इसकी खास विशेषता यह है कि इसमें मिलने वाली ब्याज दर, बचत खाते में मिलने वाली ब्याज दर से ज्यादा होती है। इसके साथ ही यह एक सुरक्षित विकल्प है, लेकिन लोन सुविधा इसमे नहीं है।
वहीं पब्लिक प्रोविडेंट फंड भारत सरकार द्वारा 1986 में शुरू की गई एक बचत योजना है, जिसमें आम तौर पर उच्च ब्याज दर और टैक्स फ्री ब्याज भुगतान होता है। यह लंबी अवधि में धन बनाने का एक प्रभावी साधन बन जाता है। इसकी सबसे खास बात यह है कि पहले वर्ष के बाद बैलेंस का लगभग 25 प्रतिशत तक ऋण लिया जा सकता है।
| फैक्टर | सावधि जमा (एफडी) | सार्वजनिक भविष्य निधि (पीपीएफ) |
|---|---|---|
| अवधि | 10 साल तक | 20 वर्ष, जिसमें 5 वर्ष का विस्तार भी शामिल है। |
| रिस्क | कम जोखिम और स्टेबल रिटर्न प्रदान करते हैं | जोखिम-मुक्त, निश्चित ब्याज दर के अनुसार गारंटीकृत रिटर्न |
| टैक्स छूट | धारा 80सी के तहत 1.5 लाख रुपये तक की छूट | धारा 80सी के तहत 1.5 लाख रुपये तक की छूट |
| न्यूनतम निवेश | ₹1,000–10,000 | ₹100–500 |
| कहां करना होगा निवेश | सभी बैंक | सभी सार्वजनिक बैंक और डाकघर, कुछ निजी बैंक |
| लोन की सुविधा | लोन नहीं मिलता | 1 वर्ष बाद स्वीकृत (बकाया राशि का 25% तक) |
| ब्याज दर | वार्षिक ब्याज दर 5.5–7.75%, बैंकों के अनुसार भिन्न हो सकती है | 7.1% निश्चित (प्रत्येक तिमाही में समीक्षा की जाती है) |
| कौन अप्लाई कर सकता है | नाबालिगों सहित इंडिविजुअल और जॉइंट अकाउंट | नाबालिगों सहित इंडिविजुअल और जॉइंट अकाउंट |
| निकासी | कुछ बैंक 0.5–1% तक चार्ज ले सकते हैं | 5 साल बाद आंशिक निकासी, 15 साल बाद पूरी निकासी |
एफडी कुछ विशेष लक्ष्य को ध्यान में रखकर की जाती है। बच्चों की शिक्षा के लिए, किसी यात्रा और शादी जैसे बड़े नियोजित खर्चों के लिए रखी गई निधि को जमा करके जब जरूरत हो तब एकमुश्त प्राप्त किया जा सकता है।
पीपीएफ एक सरकारी सहायता प्राप्त बचत योजना है, जिसमें निवेश, परिपक्वता राशि और अर्जित ब्याज पर गारंटीकृत कर छूट मिलती है। यह भारत में सेवानिवृत्ति और कर नियोजन के लिए सबसे सुरक्षित निवेश विकल्पों में से एक है।
कई बैंक एफडी में कम अवधि की तुलना में मध्यम अवधि के लिए जमा की गई राशि में अधिक ब्याज दर देते हैं। आमतौर पर तीन साल से अधिक की अवधि पर एफडी में ब्याज दरों को धीरे-धीरे कम कर दिया जाता है।
निकासी नियमों में भी दोनों योजनाओं में अंतर है। एफडी में कुछ बैंक समय से पहले पैसा निकालने पर 0.5 से 1 प्रतिशत तक का चार्ज लगा सकते हैं। वहीं पीपीएफ में 5 साल बाद आंशिक निकासी की अनुमति होती है और पूरी राशि 15 साल बाद निकाली जा सकती है।
इस तरह एफडी और पीपीएफ दोनों ही सुरक्षित निवेश विकल्प हैं, लेकिन एफडी कम अवधि के निवेश के लिए बेहतर माना जाता है, जबकि पीपीएफ लंबी अवधि की बचत और टैक्स लाभ के लिए अधिक उपयुक्त विकल्प साबित हो सकता है।
Published on:
11 Mar 2026 04:57 pm
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