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ईरान-इजरायल जंग ने पाकिस्तान को किया बर्बाद! पेट्रोल-डीजल की कीमतों में जबरदस्त उछाल, जनता में मचा हाहाकार

Pakistan Petrol Price Hike: पाकिस्तानी मीडिया की एक रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान युद्ध शुरू होने के बाद पाकिस्तान में पेट्रोल और डीजल की कीमतें लगभग 55 रुपये प्रति लीटर बढ़ गई हैं।

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shahbaz sharif

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ (IANS)

Pakistan Petrol Price Hike: ईरान-इजराइल जंग ने पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था को गहरा झटका दिया है। मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव और ईरान युद्ध के कारण वैश्विक तेल की कीमतों में भारी उछाल आया है, जिसका सीधा असर पाकिस्तान पर पड़ा है। पेट्रोल और डीजल की कीमतों में रिकॉर्ड वृद्धि की घोषणा की, जिसमें दोनों की कीमतें 55 पाकिस्तानी रुपये प्रति लीटर बढ़ाई गईं। यह पाकिस्तान के इतिहास में सबसे बड़ी एकल वृद्धि है, जो लगभग 20% की बढ़ोतरी दर्शाती है।

पाकिस्तान में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में लगी आग

पेट्रोल की नई एक्स-डिपो कीमत 321.17 रुपये प्रति लीटर हो गई है (पहले 266.17 रुपये थी), जबकि हाई-स्पीड डीजल (HSD) की कीमत 335.86 रुपये प्रति लीटर तय की गई है (पहले 280.86 रुपये थी)। पेट्रोलियम मंत्री अली परवेज मलिक ने टेलीविजन संदेश में कहा कि वैश्विक तेल की कीमतें तेजी से बढ़ी हैं-पेट्रोल 78 डॉलर प्रति बैरल से 106.80 डॉलर और डीजल 88 डॉलर से 150 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गईं। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में व्यवधान और युद्ध प्रीमियम के कारण शिपिंग लागत भी बढ़ी है, जिससे पाकिस्तान को उपभोक्ताओं पर बोझ डालना पड़ा। मंत्री ने कहा कि यह फैसला मजबूरी में लिया गया, और स्टॉक पर्याप्त हैं लेकिन संकट लंबा चला तो और कदम उठाए जाएंगे।

तेल के लिए तरसा पाकिस्तान

यह वृद्धि केवल शुरुआत हो सकती है। अगर संघर्ष जारी रहा तो परिवहन लागत, खाद्य कीमतें, मुद्रास्फीति और व्यापार लागत में और इजाफा होगा। बिजनेस रिकॉर्डर और डॉन जैसे मीडिया रिपोर्ट्स में कहा गया है कि पाकिस्तान की ऊर्जा नीति में संरचनात्मक कमी है-देश आयातित ईंधनों पर निर्भर हो गया, जबकि उसके पास प्रचुर स्वदेशी संसाधन हैं। थार कोल रिजर्व दुनिया के सबसे बड़े लिग्नाइट डिपॉजिट में से एक है, जो 100,000 मेगावाट से अधिक बिजली एक सदी से ज्यादा समय तक उत्पन्न कर सकता है, और लागत आयातित ईंधन से काफी कम होगी।

पाकिस्तान की कमजोर आर्थिक स्थिति

हाइड्रोपावर की क्षमता 60,000 मेगावाट से अधिक है, ज्यादातर अनुपयोगी। सिंध और बलूचिस्तान में सोलर और विंड एनर्जी के लिए अनुकूल क्षेत्र हैं। पिछले दो दशकों में विशेषज्ञों ने बार-बार ऊर्जा सुरक्षा पर जोर दिया कि आयात कम कर स्वदेशी संसाधनों पर फोकस किया जाए। अगर थार कोल और हाइड्रो को बड़े पैमाने पर विकसित किया जाता, तो आज पाकिस्तान की आर्थिक स्थिति अलग होती। लेकिन नीतिगत विफलता के कारण आयातित तेल, एलएनजी और कोल पर निर्भरता बनी रही, जिससे विदेशी मुद्रा संकट और भू-राजनीतिक झटकों से अर्थव्यवस्था कमजोर हुई।