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Cyber Alert: 16 दिन में लुट गए 13 करोड़, जानिए 6 संकेत जो बताते हैं कि आप ठगे जा रहे हैं

digital arrest scam India: भारतीय कानून में डिजिटल अरेस्ट जैसा कुछ नहीं है। यह बात दिल्ली के एक पूर्व जज संजीव जैन जी बता रहे हैं। लेकिन साइबर ठग कम जानकारी रखने वाले लोगों को लगातार निशाना बना रहे हैं।

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Apr 03, 2026
फोन पर न पुलिस गिरफ्तार कर सकती है, न जज। फोटो: एआइ

Money Laundering Scam: दिल्ली की 77 साल की एक रिटायर्ड महिला 16 दिनों तक अपने घर में ही कैद रही न कोई सलाख, न कोई ताला, फिर भी वो बाहर नहीं निकल पाई। व्हाट्सएप पर एक वीडियो कॉल आई और दूसरी तरफ नकली पुलिस अधिकारी और जज थे। ठगों ने महिला को "डिजिटल अरेस्ट" कर लिया। वॉल स्ट्रीट जर्नल के हालिया लेख के अनुसार, इस तरह के घोटाले पूरे देश में बढ़ रहे हैं। ठग मुख्य रूप से बुजुर्ग, आर्थिक रूप से सक्षम और कम जानकारी रखने वाले नागरिकों को निशाना बनाते हैं।

ठगों ने महिला से कहा कि आप मनी लॉन्ड्रिंग केस में फंसी हैं। इस एक झूठ ने उस बुजुर्ग महिला की जिंदगी की 13 करोड़ की जमापूंजी लूट ली। इस तरह के केस अब भारत में तेजी से फैल रहे हैं, जिनसे बचना जरूरी है। उससे भी ज्यादा जरूरी है, ठगी के 6 ऐसे संकेत जानना जो बताते है कि यह फ्रॉड है।

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इस तरह की लापरवाही न करें

16 दिन की अवधि में बुजुर्ग महिला को मानसिक रूर से आघात पहुंचाकर ठग लगातार ठगी करते रहे। जब आंकड़ों को ध्यान से देखें तो यह ठगी और भी भयावह लगती है। 16 दिन में एक बुजुर्ग महिला से हर रोज औसतन 81 लाख रुपये की रकम ठगी गई। ठगों ने कई बैंक खातों से वेरिफिकेशन और ऑडिटिंग के नाम पर पैसे ट्रांसफर करवाए। लेकिन इस तरह के मामलों में सबसे गंभीर लापरवाही यह होती है कि पीड़ित व्यक्ति कभी किसी को जानकारी नहीं देता, न परिवार को न ही दोस्तों को। इसके अलावा 16 दिनों तक इतने बड़े ट्राजैक्शन पर किसी बैंक का अलर्ट सिस्टम काम नहीं किया।

जो कानून में है ही नहीं, उससे डरा दिया

साइबर ठगी के मामलों कि सबसे बड़ी सच्चाई यह है कि "डिजिटल अरेस्ट" नाम की कोई चीज भारतीय कानून में कहीं नहीं लिखी। दिल्ली के पूर्व प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश संजीव जैन, साफ कहते हैं कि भारतीय कानून में 'डिजिटल अरेस्ट' का कोई प्रावधान नहीं है। सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक DK बासु बनाम पश्चिम बंगाल राज्य (1997) फैसले के अनुसार किसी भी गिरफ्तारी के लिए उचित पहचान, दस्तावेज और कानूनी सलाह का अधिकार अनिवार्य है। फोन या वीडियो कॉल पर कोई भी गिरफ्तारी न तो संभव है, न कानूनी। ठग बस आपके डर और अधिकार के भ्रम का फायदा उठाते हैं।

6 संकेत जो बताते हैं कि आप ठगे जा रहे हैं

याद रखें: "डिजिटल अरेस्ट" भारतीय कानून में कहीं नहीं है। पुलिस या जज कभी वीडियो कॉल पर गिरफ्तार नहीं करते।
  • सबसे बड़ी खतरे की निशानी है अनजान वीडियो कॉल। अगर व्हाट्सएप या किसी भी ऐप पर वर्दीधारी अधिकारी या जज का कॉल आए तो तुरंत काट दें और स्वतंत्र रूप से नंबर वेरिफाई करें।
  • फोन पर तत्काल पैसे की मांग की जाए तो समझ लीजिए यह 100 फीसदी स्कैम है। क्योंकि कोई भी अधिकारी किसी नागरिक से ऑनलाइन, व्यक्तिगत रूप से या किसी अन्य माध्यम से तत्काल भुगतान करने का दबाव नहीं बनाता।
  • ठगों की सबसे बड़ी पहचान ये है कि वे परिवार से दूर रखते है। अगर कोई कहे किसी को मत बताना तो यह ठगी का सबसे बड़ा हथियार है, ऐसे में तुरंत अपने परिजन को बताएं।
  • ठग केस को असली दिखाने के लिए नकली वर्दी पहनकर और कोर्टरूम जैसा महौल बनाकर डराते हैं। मोबाइल स्क्रीन पर दिखने वाला थाना, झंडे, वर्दी और कोर्ट आसानी से बनाए जा सकते हैं, यह सब दिखावा है।
  • कोई भी बैंकिग अधिकारी या कर्मचारी आपके मोबाइल पर आने वाले OTP, CVV, ATM PIN या नेट बैंकिंग पासवर्ड कभी नहीं मांगता। अगर ठग आपसे ये मांगे तो समझ जाइए कि खतरा है। यह गोपनीय जानकारी किसी को न दें।
  • साइबर फ्रॉड आपको जल्दबाजी करने और डराने वाली भाषा में बात करेगा। ठग आपको जल्दी से बिना किसी कानूनी कार्रवाई के मामले को रफादफा करने के नाम पर पैसे ट्रांसफर करवाएगा। इस तरह के संकेत साफ बताते है कि आप के साथ साइबर ठगी की जाएगी।

इन सबके बाद भी अगर आप किसी स्कैम का शिकार हों या संदेह हो तो साइबर क्राइम हेल्पलाइन 1930 पर तुरंत कॉल करें या cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज करें, यही सबसे बड़ा बचाव है।

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Published on:
03 Apr 2026 12:43 pm
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