
बैंक लोन अप्रूव करते समय कई सारी चीजें देखते हैं। (फोटो: Freepik)
Personal Loan: कई बार ऐसा देखने को मिलता है कि दो लोगों की मंथली सैलरी बराबर है, लेकिन फिर भी एक व्यक्ति को कम रकम का लोन तो दूसरे को ज्यादा रकम का लोन अप्रूव हो जाता है। ऐसे में आपके लिए यह समझना जरूरी है कि ऐसा क्यों होता है और किन आदतों की वजह से आप बैंक से ज्यादा से ज्यादा राशि का लोन अप्रूव करवा सकते हो।
सबसे पहले यह समझना जरूरी है कि बैंक सिर्फ आपकी सैलरी को देखकर लोन नहीं देता, बल्कि वह आपकी पूरी फाइनेंशियल कंडीशन देखता है। इसमें पहले से चल रहे लोन, पुराने रिपेमेंट का रिकॉर्ड, नौकरी की स्थिरता, क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल और जरूरी दस्तावेजों की जांच शामिल होती है। इसी वजह से एक जैसी सैलरी वाले दो लोगों को अलग-अलग लोन मंजूर हो सकता है।
मान लीजिए दो लोगों की सैलरी बराबर है। इनमें से एक व्यक्ति पहले से कार लोन चुका रहा है और उसके क्रेडिट कार्ड पर भी बिल बकाया है। वहीं, दूसरे व्यक्ति पर कोई बड़ा कर्ज नहीं है। ऐसे में बैंक दूसरे व्यक्ति को कम जोखिम वाला मान सकता है, क्योंकि उसकी इनकम का बड़ा हिस्सा नए लोन की किस्त चुकाने के लिए उपलब्ध रहेगा।
हर लोन और हर क्रेडिट कार्ड का एक रिकॉर्ड बनता है। बैंक यह देखते हैं कि आपने पहले की ईएमआई और क्रेडिट कार्ड बिल समय पर भरे हैं या नहीं। अगर कभी एक-दो बार भुगतान में देरी हुई है तो उसका असर बहुत ज्यादा नहीं पड़ सकता। लेकिन अगर बार-बार किस्त या बिल देर से जमा किए गए हैं या भुगतान नहीं किया गया है, तो बैंक सतर्क हो जाते हैं। वहीं, समय पर भुगतान का अच्छा रिकॉर्ड आपकी क्रेडिबिलिटी बढ़ाता है।
सैलरी के साथ-साथ यह भी मायने रखता है कि आपकी इनकम रेगुलर है या नहीं। लॉन्ग टर्म तक एक ही कंपनी में काम करने वालों को बैंक स्थिर मानता है और ज्यादा लोन अप्रूव करता है। वहीं, बार-बार नौकरी बदलने वाले को बैंक कम राशि का लोन दे सकता है। सेल्फ इंप्लायमेंट के मामले में बैंक इनकम टैक्स रिटर्न और कारोबार से जुड़े रिकॉर्ड देखकर फैसला लेता है।
आपके क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल बैंक को लोन राशि तय करने में मदद करता है। अगर कोई व्यक्ति बार-बार पूरी क्रेडिट लिमिट इस्तेमाल करता है या हर महीने बकाया राशि छोड़ देता है, तो बैंक सतर्क हो जाता है। वहीं, क्रेडिट कार्ड को जिम्मेदारी से इस्तेमाल करने और समय पर भुगतान करने वाले को ज्यादा रकम का लोन मिलने के चांस होते हैं।
कई बार लोन मंजूर होने में देरी का कारण सैलरी या क्रेडिट स्कोर नहीं, बल्कि अधूरे दस्तावेज होते हैं। अगर आपकी बताई गई इनकम और बैंक खाते में आने वाली रकम में अंतर हो या टैक्स से जुड़े जरूरी दस्तावेज पूरे न हों, तो बैंक जांच कर सकता है। इससे आवेदन खारिज नहीं होता, लेकिन लोन मिलने में समय जरूर लग सकता है।
Published on:
12 Jul 2026 10:00 am
