Oil Prices: पश्चिम एशिया और होर्मुज जलडमरूमध्य में जारी तनाव के कारण भारत में तेल की कीमतों पर सीधा असर पड़ सकता है। रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने जर्मनी में इस संकट और इससे निपटने के लिए भारत की तैयारियों पर बड़ा बयान दिया है।
Energy Security: तेल सुरक्षा को लेकर भारत सरकार पूरी तरह से सतर्क है। अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच पश्चिम एशिया में चल रहा विवाद अब सिर्फ एक क्षेत्रीय मुद्दा नहीं रह गया है। इसका पूरी दुनिया पर सीधा असर पड़ रहा है। देश के रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने अपनी तीन दिवसीय जर्मनी यात्रा के दौरान साफ किया है कि होर्मुज जलडमरूमध्य में होने वाली किसी भी हलचल का भारत पर सीधा प्रभाव पड़ेगा।
राजनाथ सिंह ने जर्मन सांसदों को संबोधित करते हुए कहा कि भारत जैसा विकासशील देश अपनी ऊर्जा जरूरतों 'पेट्रोल और डीजल' के लिए बहुत हद तक पश्चिम एशिया पर निर्भर है। ऐसे में होर्मुज संकट कोई दूर की घटना नहीं है। यह सीधे तौर पर हमारी आर्थिक स्थिरता और सुरक्षा को चुनौती दे सकता है। अगर वहां तनाव बढ़ता है, तो पूरी दुनिया में तेल आपूर्ति प्रभावित हो सकती है, जिससे भारत में भी तेल के दाम बढ़ने की आशंका है।
जनता को घबराने की जरूरत नहीं है, क्योंकि सरकार इस संकट से निपटने के लिए पहले से कदम उठा रही है। रक्षामंत्री ने बताया कि पश्चिम एशिया के हालात पर नजर रखने के लिए एक 'ग्रुप ऑफ मिनिस्टर्स' लगातार काम कर रहा है। यह समूह जरूरी चीजों की सप्लाई चेन बनाए रखने और महंगाई को नियंत्रण में रखने के लिए समय-समय पर कड़े कदम उठा रहा है। सरकार का मुख्य लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि किसी भी वैश्विक संकट के बावजूद भारत की औद्योगिक स्थिरता और कमोडिटी की उपलब्धता पर कोई आंच न आए।
आर्थिक और रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि राजनाथ सिंह का यह बयान बहुत संतुलित है। यह एक तरफ वैश्विक मंच पर भारत की चिंताओं को मजबूती से रखता है, वहीं दूसरी तरफ देश के आम नागरिकों को यह भरोसा दिलाता है कि सरकार किसी भी तरह के आर्थिक झटके से निपटने के लिए पूरी तरह मुस्तैद है।
बहरहाल, इस घटनाक्रम के बाद अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें तेजी से बढ़ती हैं, तो क्या केंद्र सरकार एक्साइज ड्यूटी में कटौती कर आम जनता को राहत देगी? इस पर सरकार के अगले आर्थिक कदमों पर सबकी नजर रहेगी। इस दौरे का एक अन्य महत्वपूर्ण पहलू भारत और जर्मनी के बीच रक्षा सौदे हैं। भारत 'प्रोजेक्ट 75I' के तहत जर्मनी के साथ मिल कर 70,000 करोड़ रुपये की लागत से 6 अत्याधुनिक पनडुब्बियों का निर्माण करने जा रहा है। इसके अलावा साइबर सुरक्षा और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस में भी दोनों देश बड़े समझौते कर रहे हैं।