
वेदांता ग्रुप की चार कंपनियों के शेयर सोमवार को लिस्ट होंगे। (PC: AI)
Vedanta के निवेशकों के लिए सोमवार का दिन बेहद अहम रहने वाला है। 15 जून को ग्रुप के चार कारोबार शेयर बाजार में अलग-अलग कंपनियों के रूप में लिस्ट होंगे। इसके बाद निवेशकों को पहली बार इन कारोबारों की वास्तविक बाजार कीमत का अंदाजा लग सकेगा। सोमवार को जिन कंपनियों की बाजार में एंट्री होगी उनमें Vedanta Aluminium Metal, Vedanta Power, Vedanta Oil & Gas और Vedanta Iron & Steel शामिल हैं।
खास बात यह है कि लिस्टिंग ऐसे समय में हो रही है, जब बाजार में भारी खरीदारी देखी जा रही है। बीते शुक्रवार सेंसेक्स 2.30 फीसदी या 1695 अंक बढ़कर बंद हुआ था। इस हफ्ते के लिए भी सेंटीमेंट पॉजिटिव बना रह सकता है। जिसका फायदा वेदांता के लिस्ट होने वाले नए शेयरों में भी दिख सकता है। आइए जानते हैं कि एक्सपर्ट्स क्या कह रहे हैं।
अनिल अग्रवाल ग्रुप की यह डीमर्जर प्रक्रिया देश के मेटल और माइनिंग सेक्टर की सबसे बड़ी कॉर्पोरेट कवायदों में गिनी जा रही है। डिमर्जर के तहत वेदांता के योग्य शेयरधारकों को प्रत्येक वेदांता शेयर के बदले चार नई कंपनियों का एक-एक शेयर अलॉट हुआ है। शुरुआती कारोबार में इन शेयरों को ट्रेड-टू-ट्रेड सेगमेंट में रखा जाएगा, जहां हर सौदे में अनिवार्य डिलीवरी होती है।
एक्सपर्ट की राय में फिलहाल सबसे ज्यादा चर्चा वेदांता एल्यूमिनियम मेटल को लेकर है। एल्युमीनियम की बढ़ती मांग और उत्पादन क्षमता विस्तार की योजनाएं इसे निवेशकों के लिए आकर्षक बना सकती हैं। वेल्थमिल्स सिक्योरिटीज के इक्विटी रणनीति निदेशक क्रांति बाठिनी का मानना है कि एल्युमीनियम कारोबार आने वाले समय में निवेशकों का ध्यान खींच सकता है। इसकी एक वजह अंतरराष्ट्रीय बाजार में एल्युमीनियम की मजबूत कीमतें भी हैं। ब्रोकरेज हाउस एमके ग्लोबल भी वेदांता एल्युमिनियम और वेदांता पावर को लेकर सकारात्मक नजरिया रखता है।
आईसीआईसीआई सिक्योरिटीज ने तो एल्युमीनियम कारोबार को समूह का नया "क्राउन ज्वेल" बताया है। ब्रोकरेज का मानना है कि वैश्विक हालात और सप्लाई की चुनौतियों के चलते एल्युमीनियम की मांग मजबूत रह सकती है। यदि सप्लाई पर दबाव बढ़ा तो इस धातु की कीमतों को और सहारा मिल सकता है। विश्लेषकों का कहना है कि एल्युमीनियम कारोबार भविष्य में वेदांता समूह के लिए सबसे बड़ा वैल्यू क्रिएटर बन सकता है। यही वजह है कि सोमवार की लिस्टिंग में निवेशकों की नजर सबसे पहले इसी कंपनी पर रहने की उम्मीद है।
मास्टरट्रस्ट में चीफ रिसर्च ऑफिसर डॉ रवि सिंह ने पत्रिका डॉट कॉम को बताया कि वेदांता ग्रुप की डीमर्जर प्रक्रिया को बाजार काफी सकारात्मक नजरिए से देख रहा है। उन्होंने कहा कि इस पूरे कदम को बाजार “वैल्यू अनलॉकिंग” के रूप में देख रहा है, क्योंकि अब तक वेदांता के अलग-अलग बिजनेस एक ही कंपनी के अंदर होने की वजह से उनकी वास्तविक वैल्यू पूरी तरह सामने नहीं आ पा रही थी।
डॉ रवि ने कहा, 'अब एल्यूमिनियम, पावर, ऑयल एंड गैस, स्टील और अन्य बिजनेस अलग-अलग इकाइयों के रूप में बाजार में ज्यादा स्पष्ट तरीके से दिखेंगे। इससे संस्थागत निवेशकों की रुचि बढ़ सकती है, क्योंकि वे अपनी पसंद के बिजनेस में सीधे निवेश कर पाएंगे।' साथ ही समूह के लिए फंड जुटाना, विस्तार करना और बिजनेस चलाना पहले से ज्यादा आसान हो सकता है।
डॉ रवि ने कहा कि कंपनी पर कर्ज अभी भी एक अहम चिंता बनी हुई है। नई कंपनियों की लिस्टिंग के बाद भी बाजार की नजर कैश फ्लो और कर्ज कम करने पर रहेगी। लेकिन अगर कमोडिटी सेक्टर मजबूत रहता है और भारत में इंफ्रास्ट्रक्चर व मैन्युफैक्चरिंग ग्रोथ जारी रहती है, तो आने वाले समय में यह डीमर्जर वेदांता समूह के लिए बड़ा गेम चेंजर साबित हो सकता है।
अब तक वेदांता का पूरा कारोबार एक ही कंपनी के भीतर समाहित था। डिमर्जर के बाद निवेशक यह तय कर सकेंगे कि उन्हें पावर बिजनेस पसंद है, एल्युमीनियम कारोबार में संभावना दिखती है या फिर ऑयल एंड गैस में दांव लगाना है।
Updated on:
14 Jun 2026 03:42 pm
Published on:
14 Jun 2026 03:39 pm
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