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US-Iran War Risk: अरब सागर में ‘युद्ध’ की आहट, भारत के 128 अरब डॉलर के व्यापार पर बड़ा खतरा

US-Iran Tension: अरब सागर (Arabian Sea) में अमेरिकी युद्धपोत ‘यूएसएस अब्राहम लिंकन’ द्वारा ईरानी ड्रोन को मार गिराए जाने की घटना ने नई दिल्ली की चिंता बढ़ा दी है। यह सिर्फ दो देशों की लड़ाई नहीं है; इसका भारत की रसोई, पेट्रोल की कीमतों (Oil Price Hike India) और अर्थव्यवस्था पर सीधा असर पड़ सकता […]

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Feb 04, 2026
अमेरिका और ईरान के बीच तनाव अपने चरम पर है। (फोटो: पत्रिका)

US-Iran Tension: अरब सागर (Arabian Sea) में अमेरिकी युद्धपोत 'यूएसएस अब्राहम लिंकन' द्वारा ईरानी ड्रोन को मार गिराए जाने की घटना ने नई दिल्ली की चिंता बढ़ा दी है। यह सिर्फ दो देशों की लड़ाई नहीं है; इसका भारत की रसोई, पेट्रोल की कीमतों (Oil Price Hike India) और अर्थव्यवस्था पर सीधा असर पड़ सकता है। आइए आंकड़ों के माध्यम से समझते हैं कि अगर यह तनाव युद्ध में बदलता है (Iran Tension Impact), तो भारत को कितना बड़ा नुकसान हो सकता है।

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अमेरिका: भारत का सबसे बड़ा 'व्यापारिक दोस्त' खतरे में (India US Trade Relations)

अमेरिका वर्तमान में भारत का सबसे बड़ा ट्रेडिंग पार्टनर (Trading Partner) है। अरब सागर का रास्ता बंद होने या बाधित होने का सीधा असर इस व्यापार पर पड़ेगा।

कुल व्यापार: भारत और अमेरिका के बीच सालाना द्विपक्षीय व्यापार लगभग 128.55 अरब डॉलर (2022-23 के आंकड़ों के अनुसार) का है।

भारत का निर्यात (Export): भारत अमेरिका को करीब 78-80 अरब डॉलर का सामान बेचता है। इसमें दवाएं, जेम्स-ज्वैलरी, टेक्सटाइल और आईटी सेवाएं शामिल हैं।

भारत का आयात (Import): वहां से हम करीब 50 अरब डॉलर का सामान खरीदते हैं, जिसमें कच्चा तेल, डिफेंस इक्विपमेंट और टेक्नोलॉजी शामिल है।

रिस्क: समुद्री रास्ता बाधित होने से भारतीय निर्यातक समय पर माल नहीं भेज पाएंगे, जिससे बीमा लागत बढ़ेगी और मुनाफा घटेगा।

ईरान: पुराना दोस्त, लेकिन सीमित व्यापार ईरान पर लगे अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण भारत-ईरान व्यापार कम जरूर हुआ है, लेकिन रणनीतिक रूप से यह बहुत महत्वपूर्ण है।

कुल व्यापार: भारत और ईरान के बीच व्यापार करीब 2.5 अरब डॉलर का है।

भारत का निर्यात: हम ईरान को चावल, चाय और चीनी भेजते हैं।

भारत का आयात: ईरान से मुख्य रूप से सूखे मेवे, केमिकल और कुछ मात्रा में पेट्रोलियम उत्पाद आते हैं।

रिस्क: ईरान का चाबहार पोर्ट (Chabahar Port) भारत के लिए मध्य एशिया का प्रवेश द्वार है। युद्ध हुआ तो यह प्रोजेक्ट ठप हो सकता है।

अपनों की चिंता: 50 लाख भारतीय कहां जाएंगे? युद्ध का सबसे भयावह पहलू मानवीय संकट होता है।

अमेरिका में भारतीय: अमेरिका में लगभग 45 से 50 लाख भारतीय रहते हैं। यह दुनिया में सबसे बड़े प्रवासी समूहों में से एक है। ये लोग हर साल अरबों डॉलर भारत भेजते हैं। तनाव बढ़ने पर इनकी सुरक्षा और रोजगार पर संकट आ सकता है।

ईरान में भारतीय: ईरान में भारतीय समुदाय छोटा है, जिसकी संख्या करीब 4,000 से 5,000 है। इनमें ज्यादातर छात्र, तीर्थयात्री और छोटे व्यापारी हैं। युद्ध की स्थिति में इन्हें सुरक्षित निकालना (Evacuation) भारत के लिए बड़ी चुनौती होगी।

महंगाई का 'ट्रिगर': भारत अपनी जरूरत का 85% कच्चा तेल आयात करता है। अरब सागर और होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से दुनिया का 20% तेल गुजरता है। अगर यह रास्ता ब्लॉक हुआ, तो कच्चा तेल 90-100 डॉलर प्रति बैरल जा सकता है। इसका सीधा मतलब है—भारत में पेट्रोल, डीजल, दूध और सब्जी सब महंगा हो जाएगा।

भारतीय एक्सपोर्टर्स के लिए लागत निकालना मुश्किल

फेडरेशन ऑफ इंडियन एक्सपोर्ट ऑर्गेनाइजेशन (FIEO) के महानिदेशक ने कहा, "फ्रेट चार्जेस (माल भाड़ा) पहले ही लाल सागर संकट के कारण बढ़े हुए हैं। अगर अरब सागर में भी ड्रोन हमले शुरू हो गए, तो भारतीय एक्सपोर्टर्स के लिए लागत निकालना मुश्किल हो जाएगा। सरकार को वैकल्पिक रूट्स पर काम करना चाहिए।"

भारतीय विदेश मंत्रालय घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए

भारतीय विदेश मंत्रालय (MEA) पूरे घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए है। सूत्रों के मुताबिक, भारत ने अमेरिका और ईरान दोनों से संयम बरतने की अपील की है। वहीं, भारतीय नौसेना ने अरब सागर में अपने सर्विलांस एयरक्राफ्ट (P-8I) और युद्धपोतों की गश्त बढ़ा दी है ताकि भारतीय मालवाहक जहाजों को सुरक्षा घेरा दिया जा सके।

कहीं 'चाबहार' का सपना टूट न जाए

भारत ने ईरान के चाबहार बंदरगाह में भारी निवेश किया है, ताकि पाकिस्तान को बायपास कर अफगानिस्तान और मध्य एशिया तक पहुंचा जा सके। अमेरिका-ईरान तनाव का सीधा असर इस पोर्ट के विकास पर पड़ेगा। अगर अमेरिका ने ईरान पर और कड़े प्रतिबंध लगाए या सैन्य कार्रवाई की, तो भारत का यह रणनीतिक निवेश फंस सकता है।

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