पूर्व CBI अधिकारी की पत्नी से 2.58 करोड़ रुपये की साइबर ठगी का मामला सामने आया है, जिसमें फर्जी WhatsApp ग्रुप और नकली स्टॉक मार्केट ऐप के जरिए निवेश कराया गया। पुलिस ने FIR दर्ज कर डिजिटल ट्रेल और बैंक खातों की जांच शुरू कर दी है।
Cyber Fraud: डिजिटल निवेश प्लेटफॉर्म और मैसेजिंग ऐप्स के बढ़ते इस्तेमाल के साथ साइबर फ्रॉड के मामलों में तेजी देखी जा रही है। इसी सिलसिले में ऑनलाइन ठगी से जुड़ा एक नया मामला सामने आया है। हाल के वर्षों में हाई रिटर्न का वादा करने वाले फर्जी स्कीमों के जरिए लोगों को निशाना बनाया जा रहा है। ऐसे ही एक हाई-प्रोफाइल मामले में एक पूर्व CBI अधिकारी की पत्नी साइबर ठगी की शिकार हुई हैं। मामले में बताया जा रहा है कि फर्जी WhatsApp ग्रुप और नकली ट्रेडिंग ऐप के जरिये महिला से 2.58 करोड़ रुपये की राशि ठग ली गई।
एनडीटीवी की एक रिपोर्ट के अनुसार, नवंबर में महिला को व्हाट्सएप पर शेयर बाजार में भारी मुनाफे का दावा करने वाला संदेश मिला। इसके बाद उन्हें स्टॉक मार्केट गाइड एक्सचेंज 20 (Stock Market Profit Guide Exchange 20) नाम के ग्रुप में जोड़ा गया। ग्रुप में खुद को एक्सपर्ट बताने वाले एक व्यक्ति ने निवेश से जुड़े विश्लेषण, स्क्रीनशॉट और कथित सफल ट्रेड्स साझा किए। अन्य सदस्य भी बड़े मुनाफे के दावे करते दिखे, जिससे महिला को स्कीम पर भरोसा हो गया और निवेश की प्रक्रिया शुरू हुई।
ग्रुप में दिए गए निर्देशों पर महिला ने “MCKIEY CM” नाम की एक मोबाइल ऐप डाउनलोड की, जो देखने में प्रोफेशनल ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म जैसी थी। ऐप पर लगातार बढ़ता हुआ प्रॉफिट दिखाया जा रहा था। भरोसा बढ़ाने के लिए ठगों ने कथित सेबी रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट भी साझा किए। महिला को बताया गया कि सभी निवेश पूरी तरह वैध और रेगुलेटेड हैं। इसी दौरान उनसे IPO में निवेश के नाम पर बार-बार अतिरिक्त फंड डालने को कहा गया।
लगातार दबाव और बड़े मुनाफे के लालच में महिला ने करीब 12 दिनों में 19 ट्रांजेक्शन के जरिये 2.58 करोड़ रुपये ट्रांसफर कर दिए। रिपोर्ट में बताया गया कि इस रकम के लिए उन्होंने अपनी और पति की गोल्ड ज्वेलरी तक गिरवी रख दी। पैसे अलग-अलग बैंकों के खातों में भेजे गए, जो देश के विभिन्न राज्यों से जुड़े थे। यह पैटर्न सामान्य ब्रोकरेज गतिविधियों से अलग था, लेकिन निवेश के समय महिला ने इसे नजरअंदाज कर दिया।
कुछ समय बाद ऐप पर भारी मुनाफा दिखने लगा, लेकिन जब महिला ने पैसे निकालने की कोशिश की तो विदड्रॉल ऑप्शन बंद मिला। पूछताछ करने पर ग्रुप ने फंड “अनलॉक” करने के लिए और पैसे डालने का दबाव बनाया। तब महिला को ठगी का अहसास हुआ और उन्होंने तुरंत साइबर क्राइम पुलिस से संपर्क किया। पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है और तकनीकी जांच शुरू कर दी गई है।
प्रारंभिक जांच में पता चला है कि ठगी की रकम को कई “म्यूल” बैंक खातों में तेजी से ट्रांसफर किया गया ताकि पहचान छिपाई जा सके। फर्जी पहचान, नकली सर्टिफिकेट और सोशल इंजीनियरिंग के जरिये पूरे फ्रॉड को अंजाम दिया गया। पुलिस जुड़े खातों को फ्रीज कराने में और आरोपियों की पहचान में जुटी है।