
अगर आपके पास 10 लाख रुपये हैं और आप अगले 3 साल के लिए निवेश करना चाहते हैं, तो बैंक FD और डेट म्यूचुअल फंड में से किसे चुनना बेहतर होगा? इसका जवाब सिर्फ ब्याज दर या टैक्स देखकर नहीं दिया जा सकता। आपको यह भी देखना होगा कि कितना रिटर्न मिल सकता है, निवेश में कितना जोखिम है और जरूरत पड़ने पर पैसा कितनी आसानी से निकाल पाएंगे। बैंक एफडी में निवेश करते समय ब्याज दर पहले से तय रहती है।
वहीं, डेट म्यूचुअल फंड का पैसा मुख्य रूप से सरकारी और कंपनियों के बॉन्ड जैसे इंस्ट्रूमेंट्स में लगाया जाता है। इससे रिटर्न मिलने की संभावना रहती है, लेकिन इसकी कोई गारंटी नहीं होती। एक समय था जब डेट म्यूचुअल फंड को टैक्स के लिहाज से एफडी से बेहतर माना जाता था। लेकिन नए निवेश पर टैक्स के नियम बदलने के बाद यह फायदा पहले जैसा नहीं रहा। ऐसे में दोनों विकल्पों की तुलना करना जरूरी है।
मान लीजिए आपके पास निवेश के लिए 10 लाख रुपये हैं। आपको बैंक एफडी पर सालाना 7% ब्याज मिलता है। जबकि एक डेट म्यूचुअल फंड से सालाना 8% रिटर्न मिलने का अनुमान है। आइए जानते हैं कि 3 साल बाद कहां ज्यादा रिटर्न मिलेगा।
| विवरण | बैंक FD | डेट म्यूचुअल फंड |
|---|---|---|
| शुरुआती निवेश | ₹10,00,000 | ₹10,00,000 |
| सालाना ब्याज या अनुमानित रिटर्न | 7% | 8% |
| 3 साल बाद अनुमानित रकम | ₹12,31,000 | ₹12,60,000 |
| अनुमानित कमाई | ₹2,31,000 | ₹2,60,000 |
| 30% टैक्स के हिसाब से अनुमानित टैक्स | ₹69,000 | ₹78,000 |
| टैक्स के बाद अनुमानित रकम | ₹11,62,000 | ₹11,82,000 |
यह केवल समझने के लिए लिया गया उदाहरण है। डेट फंड का वास्तविक रिटर्न कम या ज्यादा हो सकता है। FD की गणना तिमाही चक्रवृद्धि ब्याज के आधार पर है। टैक्स की गणना में उपकर (सेस), सरचार्ज और अन्य लागू नियम शामिल नहीं हैं।
इस उदाहरण में डेट फंड से टैक्स के बाद करीब 20,000 रुपये ज्यादा मिलते हैं। लेकिन ध्यान देने वाली बात यह है कि यहां डेट फंड का अनुमानित रिटर्न 8% और एफडी का ब्याज 7% माना गया है। ज्यादा रकम मिलने की मुख्य वजह रिटर्न का अंतर है।
बैंक एफडी से होने वाली ब्याज आय आपकी टैक्सेबल इनकम में जुड़ती है। यहां आप पर लागू इनकम टैक्स स्लैब के हिसाब से टैक्स लगता है। उदाहरण के लिए, अगर आप 30% टैक्स स्लैब में आते हैं, तो एफडी के ब्याज का बड़ा हिस्सा टैक्स में जा सकता है। वहीं, 10% या 20% टैक्स स्लैब वाले व्यक्ति पर तुलनात्मक रूप से कम टैक्स लग सकता है। इसलिए एफडी चुनते समय सिर्फ ब्याज दर न देखें। यह भी समझें कि टैक्स चुकाने के बाद आपके हाथ में कितनी रकम बचेगी।
अप्रैल 2023 से डेट म्यूचुअल फंड के टैक्स नियमों में बड़ा बदलाव हुआ। इनकम टैक्स एक्ट के सेक्शन 50AA के तहत आने वाले नए निवेश पर होने वाले लाभ को शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन माना जाता है, भले ही निवेशक ने फंड को कितने भी समय तक रखा हो। इस लाभ पर निवेशक की लागू टैक्स स्लैब के अनुसार टैक्स लगता है। मोटे तौर पर, ऐसे निर्दिष्ट म्यूचुअल फंड में वे योजनाएं शामिल हैं जो अपनी रकम का 65% से ज्यादा हिस्सा डेट और मनी मार्केट इंस्ट्रूमेंट में लगाती हैं। इसका मतलब है कि डेट फंड को कई साल तक रखने से पुराने नियमों वाला लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन टैक्स लाभ और इंडेक्सेशन का फायदा नहीं मिलता। इसलिए नए निवेशकों के लिए यह मानकर चलना सही नहीं होगा कि डेट फंड में लंबे समय तक पैसा रखने से टैक्स अपने आप कम हो जाएगा।
यह सबसे अहम सवाल है। मान लीजिए एफडी और डेट फंड दोनों से एक जैसी प्री-टैक्स कमाई होती है। ऐसी स्थिति में नए निवेश पर एक ही टैक्स स्लैब वाले व्यक्ति के लिए दोनों के टैक्स में बहुत बड़ा अंतर होना जरूरी नहीं है। हालांकि, दोनों में एक व्यावहारिक अंतर है। FD में ब्याज पर लागू नियमों के अनुसार टैक्स उसकी कमाई के साथ जुड़ता है, भले ही ब्याज तुरंत निकाला न गया हो। वहीं, डेट फंड में ग्रोथ विकल्प में आम तौर पर यूनिट बेचने या रिडीम करने पर कैपिटल गेन टैक्स देय होता है। इससे टैक्स भुगतान कुछ समय के लिए टल सकता है। लेकिन टैक्स भुगतान टलने का मतलब यह नहीं है कि टैक्स माफ हो गया। फंड बेचते समय लागू नियमों के अनुसार टैक्स देना पड़ सकता है।
डेट फंड की वैल्यू में उतार-चढ़ाव हो सकता है। ब्याज दरों में बदलाव से बॉन्ड की कीमत प्रभावित होती है। फंड ने जिन बॉन्ड में पैसा लगाया है, उनकी क्वालिटी और जारी करने वाली कंपनी की रीपेमेंट कैपेसिटी भी जोखिम पैदा कर सकती है।
FD में भी समय से पहले पैसा निकालने पर जुर्माना या ब्याज में कटौती जैसी शर्तें हो सकती हैं। इसलिए निवेश से पहले बैंक की शर्तें जरूर देखें।
डेट फंड में पैसा निकालने की सुविधा योजना के नियमों के अनुसार होती है। कुछ फंड में निकासी पर शुल्क या अन्य शर्तें भी हो सकती हैं।
(डिस्क्लेमर: यह आर्टिकल सिर्फ जानकारी मात्र है। यह निवेश की सलाह नहीं है। शेयर मार्केट/म्यूचुअल फंड में निवेश जोखिम भरा होता है। कहीं भी पैसा लगाने से पहले अपने निवेश सलाहकार से परामर्श लें।)