Work-From-Home: होर्मुज़ स्ट्रेट में संकट और बढ़ते कच्चे तेल के दामों से एशिया के देश परेशान हैं। मलेशिया ने 15 अप्रैल से सरकारी कर्मचारियों के लिए वर्क फ्रॉम होम लागू किया है।
मिडिल ईस्ट की जंग का असर अब एशिया में घरों और दफ्तरों तक पहुंच गया है। मलेशिया के प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम ने ऐलान किया है कि 15 अप्रैल से सरकारी मंत्रालयों, एजेंसियों और सरकारी कंपनियों में वर्क फ्रॉम होम लागू होगा। वजह है तेल बचाना। यह कोई छोटा फैसला नहीं है। पूरे देश की सरकारी मशीनरी को घर से काम करने को कह दिया गया है। अनवर ने साफ कहा कि कैबिनेट ने यह फैसला इसलिए लिया ताकि ईंधन की खपत कम हो और ऊर्जा की आपूर्ति स्टेबल रहे।
मलेशिया सब्सिडी वाले तेल पर निर्भर है और होर्मुज स्ट्रेट के बंद रहने से सप्लाई पर सीधा असर पड़ा है। सरकार ने तेल की मासिक सब्सिडी सीमा भी 300 लीटर से घटाकर 200 लीटर कर दी है। मलेशिया की राष्ट्रीय ऊर्जा कंपनी Petronas के जहाज होर्मुज पार करने की मंजूरी का इंतजार कर रहे हैं।
चीन की बड़ी एयरलाइंस ने भी हाथ खड़े कर दिए। Air China, China Southern और Xiamen Airlines ने घरेलू उड़ानों पर फ्यूल सरचार्ज बढ़ा दिया है। छोटे रूट पर 60 युआन और लंबे रूट पर 120 युआन की बढ़ोतरी हुई है। बजट एयरलाइंस भी इसी राह पर चल पड़ी हैं। दरअसल जेट फ्यूल के दाम कच्चे तेल के साथ-साथ बढ़ रहे हैं। कच्चा तेल 100 डॉलर प्रति बैरल के पार जा चुका है। इसका असर अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के किराए पर भी जल्द दिखेगा।
हांगकांग की Cathay Pacific पहले ही फ्यूल सरचार्ज 34 फीसदी बढ़ा चुकी है। यूरोप, भारत और ऑस्ट्रेलिया की एयरलाइंस भी किराया बढ़ा रही हैं या अतिरिक्त शुल्क लगा रही हैं। कुछ एयरलाइंस ने मध्य-पूर्व के कुछ रूट बंद ही कर दिए हैं।
वियतनाम ने कंपनियों से कहा है कि जहां हो सके कर्मचारियों को घर से काम करने दें। पाकिस्तान ने चार दिन का वर्क वीक लागू किया है और कुछ क्षेत्रों में WFH शुरू हुआ है। थाईलैंड और फिलीपींस सरकारी विभागों में लचीला काम का समय अपना रहे हैं। म्यांमार ने तो वाहन चलाने के लिए अल्टरनेट डे की व्यवस्था कर दी है, यानी एक दिन सम नंबर वाली गाड़ियां, अगले दिन विषम नंबर वाली गाड़ियां चलेंगी।
भारत में पेट्रोल-डीजल के दाम सरकार ने अभी रोके हुए हैं, लेकिन हवाई किराए पहले से बढ़ चुके हैं। ट्रांसपोर्ट और लॉजिस्टिक्स पर भी दबाव बढ़ रहा है। हालांकि, सरकार का कहना है कि देश के पास 60 दिनों का क्रूड ऑयल रिजर्व मौजूद है और रिफाइनरियां फुल कैपेसिटी पर काम कर रही हैं। ऐसे में भारत में वर्क फ्रॉम होम जैसे कदम उठाए जाने की उम्मीद नहीं है।