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मार्केट में करोड़ों रुपये गंवाने के बाद निवेशकों की खुली आंख, यह काम पहले कर लेते तो नहीं होता नुकसान

US Iran War Stock Market Diversification: बैलेंस्ड एडवांटेज फंड मार्केट की स्थिति देखकर इन्वेस्ट करते हैं। ये मार्केट कंडीशन के हिसाब से इक्विटी और डेट में निवेश का अनुपात बदले रहते हैं।

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भारत

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Pawan Jayaswal

Apr 02, 2026

Stock Market Diversification

डायवर्सिफिकेशन से जोखिम कम होता है। (PC: AI)

US Iran War Stock Market Diversification: मिडिल ईस्ट में जब से तनाव बढ़ा है, तब से निफ्टी 10.2 फीसदी टूट चुका है। जिनका पूरा पैसा शेयर बाजार में था, उनके पोर्टफोलियो भी उतने ही नीचे आ गए। और जो लोग सालों से डायवर्सिफिकेशन को बेकार की सलाह मानते थे, वो अब हाथ मलते बैठे हैं। यह सिर्फ नुकसान की कहानी नहीं है। यह एक सबक है। लेकिन इस दौर में कोई एक ऐसा निवेश नहीं था, जो पूरी तरह सुरक्षित रहा हो। हर जगह कुछ न कुछ असर पड़ा।

सोने ने भी दिया धोखा

संकट आता है, तो लोग सोने की तरफ दौड़ते हैं। यह परंपरा रही है। लेकिन इस बार सोना भी निफ्टी जितना ही गिरा। अब आपके मन में सवाल होगा कि इसकी वजह क्या रही? कच्चा तेल 72 डॉलर से उछलकर करीब 60 फीसदी महंगा हो गया। महंगाई का डर बढ़ा, ब्याज दरें बढ़ने की उम्मीद बनी और डॉलर मजबूत हुआ। कुछ केंद्रीय बैंकों ने सोना बेचना भी शुरू कर दिया। इन सब वजहों ने सोने की चमक फीकी कर दी। सोना अभी भी पोर्टफोलियो का हिस्सा होना चाहिए, लेकिन यह सोचना कि सोना हमेशा बचाएगा, यह सोच गलत है।

FD और डेट में जिसने पैसा रखा, वो चैन से सोया

जो लोग FD और अच्छे रेटिंग वाले कॉर्पोरेट डिपॉजिट में पैसा लगाए बैठे थे, उन्हें किसी झटके का सामना नहीं करना पड़ा। अभी ऊंची रेटिंग वाली कंपनियां 7.5 फीसदी तक ब्याज दे रही हैं और वरिष्ठ नागरिकों को 8 फीसदी तक रिटर्न मिल रहा है। एक बात ध्यान रखें। ज़्यादा रिटर्न के लालच में कम रेटिंग वाले बॉन्ड या डिपॉजिट मत लीजिए। छोटे निवेशकों के लिए AAA या AA+ रेटिंग से नीचे जाना ठीक नहीं। और जो ऊंचे टैक्स स्लैब में हैं, उन्हें यह भी याद रखना होगा कि ब्याज पर उनकी स्लैब रेट से टैक्स लगेगा।

बैलेंस्ड एडवांटेज फंड ने दिखाया दम

Balanced Advantage Funds यानी Dynamic Asset Allocation Funds इस दौर में काफी बेहतर साबित हुए। ये फंड बाजार की स्थिति देखकर अपने आप इक्विटी और डेट का अनुपात बदलते रहते हैं। जब बाजार महंगा होता है तो इक्विटी कम करते हैं, जब सस्ता होता है तो बढ़ाते हैं। इन फंडों में आमतौर पर 40 से 50 फीसदी इक्विटी, 15 से 25 फीसदी आर्बिट्राज और 35 फीसदी तक डेट होता है। नतीजा यह रहा कि जहां निफ्टी 10 फीसदी गिरा। वहीं इन फंडों में से सतर्क वाले सिर्फ 5 फीसदी के आसपास गिरे। टैक्स के नजरिए से भी ये फायदेमंद हैं। एक साल बाद बेचने पर 12.5 फीसदी LTCG लगता है। जिन निवेशकों को खुद से एलोकेशन मैनेज करना मुश्किल लगता है, उनके लिए ये फंड सबसे सही विकल्प हो सकते हैं।

अगर बिल्कुल कम जोखिम चाहिए…

कुछ Ultra Conservative Dynamic Allocation Funds हैं, जिनमें सीधी इक्विटी 15 फीसदी से कम रहती है। इन फंडों ने इस पूरे उथल-पुथल में सिर्फ 0 से 2 फीसदी की गिरावट देखी। जो लोग पूंजी बचाने को सबसे पहली प्राथमिकता मानते हैं, उनके लिए यह अच्छा विकल्प हो सकता है।

Multi Asset Funds: मल्टी एसेट फंड्स में इक्विटी, डेट, सोना, अंतरराष्ट्रीय शेयर और REIT जैसी कई चीजें एक साथ होती हैं। फंड मैनेजर बाजार देखकर इनका अनुपात बदलता रहता है।

बड़ी गलती- सारा पैसा भारतीय शेयरों में

यह सबक सबसे जरूरी है और सबसे कम चर्चा में रहता है। जब निफ्टी मार्च में 10.2 फीसदी गिरा, तो उसी दौरान अमेरिका, चीन, हॉन्गकॉन्ग और ब्राज़ील के बाजार आधे से भी कम गिरे। 2025 का पूरा साल देखें, तो तस्वीर और साफ होती है। जब निफ्टी ने 10.5 फीसदी रिटर्न दिया, उस दौरान कोरिया ने 75.6 फीसदी, जर्मनी ने 23 फीसदी और ब्राज़ील ने 34 फीसदी रिटर्न दिया। जियोपॉलिटिकल घटनाओं का असर हर देश पर एक जैसा नहीं पड़ता। अगर आपका पूरा पैसा सिर्फ भारत में है तो आप एक देश का पूरा जोखिम अकेले उठा रहे हैं।

अंतरराष्ट्रीय म्यूचुअल फंड, US Feeder Funds या GIFT City Funds के जरिए यह विविधता लाई जा सकती है। सीधे विदेशी शेयर खरीदना छोटे निवेशकों के लिए ठीक नहीं लेकिन फंड के रास्ते यह काम आसान है।

एक आखिरी बात

संकट आने पर सब कुछ बेचकर "सुरक्षित" जगह भागने की जो इच्छा होती है, वो अक्सर और नुकसान करती है। जियोपॉलिटिकल संकट आते हैं और जाते हैं। लेकिन गलत एलोकेशन से हुआ नुकसान लंबे समय तक पीछा करता है। जो बाजार का सही अनुमान लगाते हैं वो नहीं जीतते। जो सही तरह से डायवर्सिफिकेशन करके इन्वेस्ट रखते हैं, असली जीत उनकी होती है।